Alert: डेटिंग एप्स पर अब AI एजेंट्स कर रहे बातचीत, जानें क्यों मोल्टमैच और ओपनक्लॉ ने बढ़ाई सुरक्षा की चिंता
AI Agents Flirting with Humans:
क्या आप जानते हैं कि एप्स पर जिससे आप घंटों बात कर रहे हैं, वह कोई इंसान नहीं बल्कि एक एआई एजेंट हो सकता है? मोल्टमैच और ओपनक्लॉ जैसे टूल्स के आने के बाद अब एआई न सिर्फ आपकी प्रोफाइल स्कैन कर रहा है, बल्कि बिना आपकी जानकारी के इंसानों के साथ फ्लर्ट भी कर रहा है। टेक जगत में इसे सिंगुलैरिटी की शुरुआत माना जा रहा है, लेकिन साइबर एक्सपर्ट्स इसे प्राइवेसी के लिए एक बड़ा रेड फ्लैग बता रहे हैं।

विस्तार
अभी तक हम चैटबॉट्स से सिर्फ काम की बातें करते थे, लेकिन अब एआई आपकी पर्सनल लाइफ और भावनाओं में दखल दे रहा है। मोल्टमैच नाम के नए डेटिंग प्लेटफॉर्म ने तकनीक और रोमांस की सीमाओं को धुंधला कर दिया है। यहां एआई एजेंट्स इंसानों जैसी फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों से बातचीत कर रहे हैं, जो पहली नजर में बिल्कुल असली लगते हैं।
ओपनक्लॉ का इस्तेमाल किसके लिए किया जा रहा है?
इस पूरे खेल के पीछे ओपनक्लॉजैसे शक्तिशाली टूल्स का हाथ है। ऑस्ट्रियाई रिसर्चर की ओर से बनाया गया ये टूल मूल रूप से आपकी डिजिटल लाइफ (व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम ईमेल) को मैनेज करने के लिए था, लेकिन अब इसका इस्तेमाल सोलमेट ढूंढने के लिए किया जा रहा है।
फर्जी प्रोफाइल:
अभी तक इंसान ही फर्जी अकाउंट बनाकर फ्रॉड या फ्लर्ट करते थे, लेकिन अब इस लाइन में एआई भी शामिल हो गए हैं। एआई एजेंट इंटरनेट से किसी भी मॉडल की फोटो उठाकर बिना अनुमति के प्रोफाइल बना रहे हैं।
ऑटो-फ्लर्टिंग
: ये एजेंट आपकी पसंद-नापसंद को स्कैन करता है और सामने वाले यूजर से इस तरह बात करता है कि उसे भनक भी नहीं लगती कि वह एक मशीन से बात कर रहा है।
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क्या मोल्टमैच और ओपनक्लॉ का अपना सोशल नेटवर्क है?
हां, मोल्टमैच और ओपनक्लॉ का अपना सोशल नेटवर्क हैं, जहां पर एआई एजेंट्स आपस में बातें करते हैं, वहीं MoltMatch.com पर ये एजेंट्स इंसानों के बीच घुसपैठ कर रहे हैं। एलन मस्क ने भी इस तकनीक पर टिप्पणी करते हुए इसे सिंगुलैरिटी (वह बिंदु जहां एआई इंसानी दिमाग से आगे निकल जाए) का शुरुआती स्तर बताया है।
क्या इससे साइबर सुरक्षा पर संकट है?
हां, एक्सपर्ट्स का कहना है इसका असर साइबर सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।कंप्यूटर साइंस के छात्रों ने तो इसके खतरनाक पहलुओं को उजागर किया है:
पहचान की चोरी
: किसी की भी फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी पहचान बनाना अब बच्चों का खेल बन गया है।
डेटा माइनिंग
: फ्लर्टिंग के बहाने ये एजेंट्स आपसे आपकी निजी जानकारी उगलवा सकते हैं।
इमोशनल मैनिपुलेशन
: इंसान मशीन की बातों में आकर भावनात्मक रूप से ठगा जा सकता है।
https://youtu.be/tNZLs7f-TpE?si=WeWYxAYDyfAUbyRw