गेमिंग: पबजी पर बैन के बाद भारतीय खेल रहे हैं ब्रिटेन, कोरिया और हांगकांग के गेम्स, शॉर्ट वीडियो बनाने में देसी एप्स टॉप पर

राहुल संपाल
Tue, 14 Sep 2021 03:18 PM IST
सार

चाइना इंटरनेट रिपोर्ट 2021 के अनुसार, भारत के बाजारों में चीनी एप की हिस्सेदार में अहम गिरावट देखी जा रही है। साल 2018 में 44 फीसदी पर चीनी एप का कब्जा था जो वर्ष 2020 में घटकर महज 29 फीसदी तक रह गया है। ये रिपोर्ट गूगल प्लेस्टोर सहित विभिन्न स्टोर में भारतीय एप की बढ़ती हिस्सेदारी की तस्दीक करती है...

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After ban on chinese mobile apps by indian government, indigenous app makers is increasing rapidly in the country
भारत में पबजी पर प्रतिबंध - फोटो : File

    विस्तार

    भारत सरकार के चीनी एप बंद करने के 18 महीने बाद अब स्वदेशी मोबाइल एप के क्षेत्र में बदलाव नजर आने लगे हैं। आज देश में तेजी से स्वदेशी एप निर्माताओं की सक्रियता बढ़ने लगी है। वहीं दूसरी तरफ भारतीय बाजारों में चीनी एप के हिस्सेदारी में भी कमी देखने में मिल रही है। जबकि चीनी एप की जगह ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया और हांगकांग सहित अन्य देशों के गेमिंग एप ने ले ली है।

    मोदी सरकार ने सीमा पर तनाव के बीच टिकटॉक, वीचैट समेत चीन के 59 एप्स पर मार्च 2020 में रोक लगा दी थी। जबकि जनवरी 2021 में केंद्र सरकार ने कई एप पर स्थायी तौर पर रोक लगा दी है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट द्वारा जारी चाइना इंटरनेट रिपोर्ट 2021 के अनुसार, भारत के बाजारों में चीनी एप की हिस्सेदार में अहम गिरावट देखी जा रही है। साल 2018 में 44 फीसदी पर चीनी एप का कब्जा था जो वर्ष 2020 में घटकर महज 29 फीसदी तक रह गया है। ये रिपोर्ट गूगल प्लेस्टोर सहित विभिन्न स्टोर में भारतीय एप की बढ़ती हिस्सेदारी की तस्दीक करती है।

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    बैन से पहले भारत में 50 फीसदी हिस्सेदारी थी चीन की

    एप एनी के आंकड़ों के अनुसार, भारत में चीनी एप के प्रतिबंध के एक माह पहले तक देश की टॉप 10 कंपनियों में 50 फीसदी कंपनियां चीन की थीं। इसमें 20 फीसदी हिस्सेदारी स्वदेशी कंपनियों की थी। जिसमें सबसे टॉप पर आरोग्य सेतु एप था। केंद्र सरकार के प्रतिबंध के फैसले के बाद बाजार में तेजी से भारतीय एप निर्माता कंपनियों की रैकिंग बढ़ती गई। सितंबर तक एप एनी में टॉप 10 एप में से 60 फीसदी पर भारतीय निर्माताओं का ही वर्चस्व बरकरार है।

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    कई स्वदेशी एप आगे निकले

    देश में एक समय टिकटॉक जैसे एप का दबदबा था। इस एप ने शॉर्ट वीडियो के मामले में फेसबुक को भी कड़ी टक्कर दी थी। टिकटॉक के बहुत ही कम समय में 11.9 करोड़ ग्राहक बन गए थे। सितंबर के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, आज शॉर्ट वीडियो बनाने के मामले में टॉप 10 एप्स में 60 फीसदी भारतीय कंपनियों के है। इसमें एमएक्स टकाटक, मौज, शेयरचैट, जोश और पब्लिक आदि शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर एप ने शॉर्ट वीडियो बनाने की शुरुआत पिछले साल जून में टिकटॉक पर लगी रोक लगने के बाद की थी।

    चीनी गेमिंग एप पबजी ने लगभग देश के हर घर में जगह बना ली थी। एक समय 3.4 करोड़ भारतीय रोजाना इसे खेलते थे और इसे 17.5 करोड़ बार से ज्यादा डाउनलोड किया जा चुका था। एप एनी के अनुसार टॉप 10 गेमिंग एप्स में केवल मुंबई की एक कंपनी द्वारा बनाया गया, एक गेम लूडो किंग पहले पायदान पर है। वहीं चीनी एप की जगह ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया और हांगकांग सहित अन्य देशों के गेमिंग एप्स ने ले ली है। मोबाइल एप कारोबार के आंकड़ों पर नजर रखने वाली एक वैश्विक एजेंसी 42 मैटर्स के मुताबिक, इस साल अगस्त तक गूगल प्ले स्टोर के वैश्विक गेमिंग एप्स (19,323) में भारतीय गेम निर्माताओं की हिस्सेदारी चार फीसदी थी। लेकिन इनसे कमाई करना किसी से चुनौती से कम नही है क्योकि महज दो फीसदी एप ही शुल्क लेते हैं, जबकि दुनिया भर के औसतन चार एप्स फीसदी एप शुल्क लेते हैं।

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