Accenture CEO: एक हार के बाद पिता ने कही थी ऐसी बात, जिसने बदल दी एक्सेंचर की CEO जूली स्वीट की जिंदगी
Tech CEO Story:
क्या एक हार आपकी सफलता की सबसे बड़ी सीढ़ी बन सकती है? एक्सेंचर (Accenture) की CEO जूली स्वीट के साथ ऐसा ही हुआ। एक स्पीच प्रतियोगिता हारने के बाद पिता ने उन्हें ऐसा सबक दिया, जिसे वे 40 साल बाद भी अपनी सफलता की सबसे बड़ी वजह मानती हैं। जानिए आखिर क्या थी वह सीख?

विस्तार
Accenture CEO Julie Sweet success story:
ग्लोबल टेक-कंसल्टिंग और आईटी सर्विसेज की दुनिया में एक्सेंचर (Accenture) एक जाना-माना नाम है, और इसकी कमान संभालने वाली जूली स्वीट ने हाल ही में एक विशेष इंटरव्यू के दौरान जूली स्वीट और फाइजर (Pfizer) के सीईओ अल्बर्ट बोरला एक साथ नजर आए। इस बातचीत में जूली ने किसी भारी-भरकम बिजनेस स्ट्रेटेजी की बात नहीं की, बल्कि अपनी जिंदगी और करियर के उस सबसे बड़े टर्निंग पॉइंट को याद किया, जो उन्हें करीब 40 साल पहले उनके पिता से मिला था।
जब एक हार बनी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट
फाइजर के सीईओ अल्बर्ट बोरला के साथ बातचीत के दौरान जूली स्वीट ने अपने टीनएज दिनों की एक घटना साझा की। उन्होंने बताया कि कॉलेज की पढ़ाई के लिए वह पैसे जुटाने के लिए एक स्पीच प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। जिसमें वह जीत न सकी और एक ऐसी प्रतिभागी से हार गईं जो लायंस क्लब के प्रेसिडेंट की बेटी थी। घर लौटते समय कार में बैठकर जूली इस हार को लेकर अपने पिता से शिकायत कर रही थीं। तभी उनके पिता ने उन्हें एक ऐसी सीख दी, जो आज भी उनके साथ है।
पिता की वह बात जो आज भी याद है
जूली स्वीट के अनुसार, उनके पिता ने उनसे कहा था कि"तुम कभी किसी प्रेसिडेंट की बेटी नहीं बनोगी, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि तुम कुछ भी कर सकती हो। बस तुम्हें इतना बेहतर बनना होगा कि लोगों के पास तुम्हें चुनने के अलावा कोई विकल्प न बचे। आज रात तुम उतनी अच्छी नहीं थीं।" यह सुनना आसान नहीं था, लेकिन इसी बात ने उन्हें निरंतर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी।
साधारण परिवार से निकलकर बनीं ग्लोबल लीडर
जूली स्वीट ने बताया कि उनके पिता हाईस्कूल भी पूरा नहीं कर पाए थे। उन्होंने सेना में सेवा दी और बाद में कारों को पेंट करके परिवार का पालन-पोषण किया। इसके बावजूद वे अपनी बेटी को लगातार आगे बढ़ने और बेहतर करने के लिए प्रेरित करते रहे। जूली अक्सर लायंस क्लब और ऑप्टिमिस्ट क्लब जैसी संस्थाओं में होने वाली स्पीच प्रतियोगिताओं में लेकर जाते थे, ताकि वह सीख सकें और खुद को बेहतर बना सकें।
सिर्फ सपने नहीं, मेहनत भी जरूरी है
जूली स्वीट का कहना है कि उनके पिता की यह सीख उनकी पूरी जिंदगी में काम आई। उन्होंने कहा कि केवल यह मान लेना काफी नहीं है कि आप कुछ कर सकते हैं, बल्कि उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लगातार मेहनत भी करनी पड़ती है। उनके अनुसार, जीवन में अवसर हमेशा समान नहीं होते, लेकिन मेहनत और तैयारी आपको दूसरों से अलग पहचान दिला सकती है।
फाइजर CEO ने भी साझा किया अपना नजरिया
इस बातचीत के दौरान फाइजर के सीईओ अल्बर्ट बोरला ने भी अपनी सफलता को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जिंदगी की सबसे बड़ी समस्या यह नहीं है कि हम बहुत बड़ा लक्ष्य रखें और उसे हासिल न कर पाएं, बल्कि समस्या तब होती है जब हम बहुत छोटा लक्ष्य तय कर लेते हैं और उसे हासिल करके ही संतुष्ट हो जाते हैं। उनके अनुसार, बड़ी उपलब्धियां पाने के लिए बड़े सपने और लगातार प्रयास दोनों जरूरी हैं।
सीईटो बनने की कल्पना पर दिलचस्प बातचीत
इंटरव्यू के दौरान दोनों सीईओ ने एक-दूसरे की कंपनियों को लेकर भी हल्की-फुल्की चर्चा की। जब अल्बर्ट बोरला ने पूछा कि अगर जूली एक दिन के लिए फाइजर की CEO बन जाएं तो क्या करेंगी, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि एक दिन में वह कोई नुकसान नहीं कर पाएंगी, जो अच्छी बात होगी। साथ ही उन्होंने कंपनी की रिसर्च और साइंस को करीब से समझने की इच्छा भी जताई।