एस्ले रिपोर्ट: डेटिंग में AI से प्यार की तलाश नामंजूर, 60% महिलाएं मानती हैं धोखा, क्या है सिंगल्स का नया रुख?
डेटिंग और रिश्तों की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से अपनी जगह बना रहा है, लेकिन भारतीय युवा इसे लेकर काफी सतर्क हैं। एस्ले (Aashley) की 2026 की नई रिपोर्ट के अनुसार, 46.6% भारतीय सिंगल्स का मानना है कि डेटिंग में एआई का इस्तेमाल कभी नहीं होना चाहिए। हालांकि, वे इसे पार्टनर चुनने (मैचमेकर) के बजाय बातचीत शुरू करने और खुद को बेहतर तरीके से पेश करने के लिए एक मददगार साथी (विंगमैन) के तौर पर देख रहे हैं। आइए जानते हैं इस रिपोर्ट के बारे में विस्तार से...

विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब डेटिंग की दुनिया में भी जगह बना रहा है। लोग इसकी मदद से अपनी प्रोफाइल बेहतर कर रहे हैं, बायो लिख रहे हैं और किसी को मैसेज भेजने से पहले उसकी भाषा सुधार रहे हैं। हालांकि, पार्टनर चुनने के मामले में भारतीय सिंगल्स अभी भी एआई पर पूरी तरह भरोसा करने के लिए तैयार नहीं हैं। एस्ले की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 46.6% सिंगल्स का मानना है कि डेटिंग में एआई का इस्तेमाल कभी नहीं होना चाहिए। वहीं, 64.2% लोग AI के सुझावों के बजाय अपनी समझ को ज्यादा अहमियत देते हैं।
एस्ले की रिपोर्ट में क्या हुए खुलासे?
- एस्ले की 2026 की रिपोर्ट 'हाउ इंडिया इज यूजिंग टेक्नोलॉजी टू नेविगेट लव' के अनुसार, भारतीय सिंगल्स डेटिंग में एआई को ऐसा टूल मान रहे हैं, जो बातचीत शुरू करने और खुद को बेहतर तरीके से पेश करने में मदद कर सकता है। हालांकि, वे इसे अपना पार्टनर चुनने वाला मैचमेकर बनाने के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं।
- शहरी भारत के 8,240 सिंगल्स पर किए गए इस अध्ययन में सामने आया कि डेटिंग के मामले में लोग अब भी अपनी पसंद और समझ को प्राथमिकता देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 64.2% डेटर्स एआई के सुझावों के मुकाबले अपनी आंतरिक समझ पर ज्यादा भरोसा करते हैं। वहीं, 46.6% लोगों का मानना है कि डेटिंग में AI का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
- ये आंकड़े दिखाते हैं कि डेटिंग में तकनीक की मदद लेने को लेकर लोगों की राय अलग-अलग है। कुछ लोग एआई को काम आसान बनाने का जरिया मानते हैं, जबकि पार्टनर चुनने जैसे निजी फैसलों में वे अपनी समझ को ही अहमियत देना चाहते हैं।
खुद एआई इस्तेमाल करते हैं, लेकिन मैच करे तो आपत्ति
रिपोर्ट में डेटिंग के समय एआई के इस्तेमाल को लेकर एक और दिलचस्प अंतर देखने को मिला है। इसके अनुसार, 24.3% लोग खुद डेटिंग में AI का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अगर उनका मैच ऐसा करे तो उन्हें आपत्ति होती है।
इससे पता चलता है कि कुछ यूजर्स के लिए AI का इस्तेमाल अपनी प्रोफाइल या बातचीत को बेहतर बनाने तक तो ठीक है, लेकिन सामने वाले व्यक्ति की ओर से इसका इस्तेमाल भरोसे को प्रभावित कर सकता है। डेटिंग में लोग सामने वाले की असलियत और बातचीत में उसकी अपनी भूमिका को भी महत्व देते हैं।
एाअई से फोटो बेहतर बनाना 40.2% लोगों को लगता है धोखा
- जबकि डेटिंग प्रोफाइल में फोटो की अहम मानी जाती है, लेकिन AI की मदद से तस्वीरों को बेहतर बनाने को लेकर भी लोगों की राय सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 40.2% लोग AI से फोटो बेहतर बनाने को धोखा मानते हैं। ऐसे प्रोफाइल मिलने पर वे तुरंत अनमैच कर देते हैं।
- यानी कुछ यूजर्स के लिए AI का इस्तेमाल सिर्फ तस्वीर को आकर्षक बनाने तक सीमित नहीं है। अगर फोटो में बदलाव से सामने वाले व्यक्ति की असल शक्ल या पहचान को लेकर गलत धारणा बनती है, तो इसे भरोसे की समस्या के तौर पर देखा जा सकता है।
60.5% महिलाओं को एआई का इस्तेमाल खुद के प्रति सच्चा होना नहीं लगता
रिपोर्ट में महिलाओं की राय भी सामने आई है। इसके अनुसार, 60.5% महिलाओं का मानना है कि डेटिंग में एआई का इस्तेमाल करना खुद के प्रति सच्चा होना नहीं है। वहीं, 51.9% महिलाएं एआई से लिखा हुआ लगने वाला पहला मैसेज पूरी तरह नजरअंदाज कर देती हैं। इससे संकेत मिलता है कि डेटिंग में सिर्फ सही शब्दों का इस्तेमाल करना ही काफी नहीं है। बातचीत का स्वाभाविक होना और सामने वाले की अपनी आवाज महसूस होना भी अहम है।
कहां कर रहे एआई का इस्तेमाल?
एआई को लेकर हिचकिचाहट के बावजूद, कुछ कामों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, लोग अपनी डेटिंग प्रोफाइल की बायो बेहतर बनाने और ऐप पर दिए जाने वाले प्रॉम्प्ट लिखने के लिए एआई की मदद ले रहे हैं।
इसके अलावा, 51.2% लोग मैसेज भेजने से पहले उसे AI के जरिए चेक करते हैं। इससे उन्हें मैसेज की भाषा, शब्दों और उसे पेश करने के तरीके को सुधारने में मदद मिल सकती है। इस तरह एआई का इस्तेमाल डेटिंग में बातचीत को आसान बनाने के लिए तो हो रहा है, लेकिन इससे यह जरूरी नहीं कि लोग अपने निजी फैसले भी तकनीक के हवाले करना चाहते हैं।