क्या भारत में व्हॉट्सऐप पर लगेगा प्रतिबंध, 29 जून को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Fri, 24 Jun 2016 12:20 PM IST
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29 June, Supreme Court to hear a PIL petition on whatsapp
फोटो : GettyImages

    सुप्रीम कोर्ट अगले बुधवार एक याचिका के आधार पर मैसेजिंग प्लेटफार्म व्हॉट्सऐप पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर सुनवाई करेगा। याचिका में व्हॉट्सऐप की इंड टू इंड एन्क्रिप्शन को देश के लिए खतरा बताया गया है। याचिका में कहा गया है कि व्हॉट्सऐप की इंड टू इंड एन्क्रिप्‍शन सर्विस आतंकवादियों को एक ऐसा कम्युनिकेशन टूल देती है जिसको रोकना असंभव है।

    टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा के एक राइट टू इफॉर्मेशन (आरटीआई) कार्यकर्ता सुधीर यादव द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि व्हॉट्सऐप ने अप्रैल से हर संदेश के लिए अपनी 256 बिट एन्क्रिप्शन सर्विस शुरू की है जिसको तोड़ा नहीं जा सकता है।

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    यादव ने अपनी याचिका में कहा, "यहां तक कि अगर सरकार भी व्हॉट्सऐप किसी व्यक्ति का डेटा को सौंपने को कहती है तब भी व्हॉट्सऐप विफल हो जाएगा क्योंकि उसके पास भी डिक्रिप्शन कुंजी नहीं है।"

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    भारत में व्हॉट्सऐप पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए यादव ने कहना है कि कोई भी आतंकवादी या अपराधी आसानी से व्हॉट्सऐप पर चैट कर सकता है और देश को नुकसान पहुंचाने के लिए योजना बना सकता है। भारतीय खुफिया एजेंसियां उनकी बातचीत को आवश्यक कार्रवाई के लिए ट्रेक करने में सक्षम नहीं होगी।

    256 बिट एन्क्रिप्टेड मैसेज को तोड़ना मुश्किल

    क्या भारत में व्हॉट्सऐप पर लगेगा प्रतिबंध, 29 जून को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

    याचिका में कहा गया है कि व्हॉट्सऐप पर किसी भी मैसेज को डिक्रिप्ट करने के लिए 115, 792, 089, 237, 316, 195, 423, 570, 985, 008, 687, 907, 853, 269, 984, 665, 640, 564, 039, 457, 584, 007, 913, 129, 639, 935 कुंजी संयोजन की जरूरत होगी, जो एक सुपर कंप्यूटर के लिए लगभग असंभव है।

    एक 256 बिट एन्क्रिप्टेड मैसेज को तोड़ने में सैकड़ों वर्ष लग जाएंगे।

    इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि अन्य संदेश प्लेटफार्म जैसे हाइक, वाइबर और अन्य दूसरे मैसेजिंग ऐप उच्च एन्क्रिप्शन सेवा का इस्तेमाल कर रहे हैं और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।

    यादव, 27, ने बताया कि याचिका दायर करने से पहले उन्हें भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) और संचार मंत्रालय और आईटी को पत्र लिखा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

    शीर्ष अदालत में अब 29 जून को उनकी जनहित याचिका (पीआईएल) याचिका पर सुनवाई होनी है।

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