Meta Platforms: मौत के बाद भी एक्टिव रहेगा सोशल मीडिया अकाउंट? मेटा ने पेटेंट कराई नई AI तकनीक
Meta ने एक ऐसे AI टूल का पेटेंट कराया है, जो किसी व्यक्ति के निधन या लंबे समय तक गैर-हाजिरी के बाद भी उसके सोशल मीडिया अकाउंट को सक्रिय रख सकता है। यह तकनीक पोस्ट, मैसेज और यहां तक कि वीडियो कॉल का भी जवाब दे सकती है।

विस्तार
मेटा प्लेटफॉर्म्स ने एक चौंकाने वाला पेटेंट हासिल किया है। यह पेटेंट ऐसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम से जुड़ा है, जो किसी यूजर के निधन या लंबे समय तक सोशल मीडिया से दूर रहने की स्थिति में भी उसके अकाउंट को सक्रिय रख सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेटा एक ऐसा 'लार्ज लैंग्वेज मॉडल' (LLM) तैयार करेगा जो आपके पुराने डेटा जैसे आपकी पोस्ट, लाइक्स, कमेंट्स और बात करने के अंदाज का बारीकी से अध्ययन करेगा। एक बार ट्रेनिंग पूरी होने के बाद, यह एआई आपकी अनुपस्थिति में न केवल आपकी तरह ही नए पोस्ट और कमेंट्स लिख सकेगा, बल्कि आपके दोस्तों को सीधे मैसेज (DM) में जवाब भी देगा। इससे मौत के बाद भी शख्स के सोशल मीडिया अकाउंट पर एन्गेजमेंट बनी रहेगी।
सिर्फ मैसेज ही नहीं, वीडियो कॉल भी होगी
इस पेटेंट की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह केवल टेक्स्ट तक सीमित नहीं है। मेटा एक ऐसा सिस्टम भी बना रहा है जो यूजर के पुराने वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग्स का इस्तेमाल करके एक 'सिंथेटिक अवतार' तैयार करेगा। यह अवतार आपकी आवाज और चेहरे के हाव-भाव की नकल कर सकेगा। जब कोई आपके अकाउंट पर संपर्क करेगा, तो यह एआई रीयल-टाइम में उनसे ऑडियो या वीडियो कॉल के जरिए बात कर सकेगा।
उठ रहे हैं कई सवाल
हालांकि, मेटा प्लेटफॉर्म्स ने फिलहाल इस तकनीक को विकसित या लॉन्च करने की कोई योजना होने से इनकार किया है, लेकिन यह पेटेंट डिजिटल पहचान, सहमति और मृत्यु के बाद डेटा के इस्तेमाल जैसे गंभीर सवाल खड़े करता है।
गौरतलब है कि 2021 में माइक्रोसॉफ्ट ने भी एक ऐसे चैटबॉट का पेटेंट कराया था, जो मृत व्यक्तियों के डिजिटल कंटेंट के आधार पर उनकी तरह बातचीत कर सकता था।
मेटा पहले भी डिजिटल विरासत से जुड़े फीचर्स पर काम कर चुका है। फेसबुक पर मेमोरियलाइज्ड प्रोफाइल और ‘लेगेसी कॉन्टैक्ट’ जैसे टूल्स पहले से मौजूद हैं, जिनका जिक्र कंपनी के सीईओ मार्क जुकर्बर्ग सार्वजनिक रूप से कर चुके हैं।
नया पेटेंट इस बात का संकेत देता है कि टेक इंडस्ट्री में ‘डिजिटल आफ्टरलाइफ’ यानी मृत्यु के बाद भी ऑनलाइन मौजूदगी बनाए रखने की दिशा में गंभीरता से शोध किया जा रहा है। हालांकि, इसके साथ गोपनीयता, भावनात्मक प्रभाव और नैतिकता जैसे मुद्दे भी उतनी ही तेजी से चर्चा में आ रहे हैं।
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