चुनाव में फर्जी खबरों को रोकने के लिए Koo ने पेश किए ये पांच फीचर्स

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Sat, 05 Mar 2022 09:08 AM IST
सार

कू के मुताबिक एक पारदर्शी और विश्वसनीय मंच के रूप में कू एप स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रतिबद्ध है और भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के दिशानिर्देशों का पालन करता है।

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Koo introduced these five features to prevent fake news in elections
Koo app - फोटो : amarujala

    विस्तार

    घरेलू माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म कू एप ने पांच राज्यों में होने वाले चुनाव को लेकर बड़ी तैयारी की है। कू ने चुनाव के दौरान अपने प्लेटफॉर्म पर फर्जी खबरों को रोकने के लिए कई फीचर्स पेश किए हैं। कंपनी के एक बयान के मुताबिक पांच राज्यों में 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले और चुनाव के दौरान कू एप पर एक्टिव यूजर्स की संख्या और कू की संख्या में काफी इजाफा देखा गया है। तमाम पार्टी के नेता और राजनीतिक दल अपने मतदाताओं तक पहुंचने के लिए कू की मदद ले रहे हैं।

    अक्सर, मतदान और मतगणना के दौरान आमतौर पर उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के बारे में सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं और फर्जी खबरों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिलती है जिसका परिणाम भयावह हो जाता है। गलत सूचना न केवल चुनावी प्रक्रिया के सुचारू संचालन में हस्तक्षेप करती है बल्कि एक सहभागी लोकतंत्र में मतदाताओं के विश्वास को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।

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    कू के मुताबिक एक पारदर्शी और विश्वसनीय मंच के रूप में कू एप स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रतिबद्ध है और भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के दिशानिर्देशों का पालन करता है। इस प्रतिबद्धता के लिए कू ने कुछ फीचर्स पेश किए हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में...

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    1. कू सामुदायिक दिशानिर्देश

    कू एप ने अपने सामुदायिक दिशानिर्देशों (कम्यूनिटी गाइडलाइंस) को मंच पर मौजूद सभी 10 भाषाओं में उपलब्ध कराया है। ये दिशानिर्देश भारतीय संदर्भ और विचार के मुताबिक हैं और फर्जी खबरों और गलत सूचना के विशिष्ट संदर्भ के साथ ऑनलाइन स्वीकृत या प्रतिबंधित आचरण के तरीकों की जानकारी देते हैं। ये दिशानिर्देश यूजर्स को जानकारी साझा करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की पुष्टि करने के लिए संवेदनशील बनाते हैं और साथ ही इसके लिए पर्याप्त सबूत के बिना जानकारी को 'नकली' कहने से बचते हैं।

    2. फैक्ट चेकिंग

    एक सोशल मीडिया मध्यवर्ती के रूप में, जो केवल यूजर्स द्वारा साझा की गई सामग्री (कंटेंट) को होस्ट और प्रसारित करता है, जब तक कि कानून द्वारा आवश्यक न हो कू एप सूचना की सटीकता का आकलन नहीं करता है या किसी भी तरह से सामग्री में हस्तक्षेप नहीं करता है। कू यूजर्स को एक सुरक्षित, भरोसेमंद और विश्वसनीय इंटरफेस प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस प्रकार यूजर्स को फैक्ट-चेकिंग के मकसद से प्रतिष्ठित थर्ड-पार्टी संसाधनों तक पहुंच प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। प्रेस सूचना ब्यूरो और गूगल फैक्ट चेक कुछ प्रमुख फैक्ट-चेकर्स के रूप में सूचीबद्ध हैं। 15 फरवरी 2022 तक खुद को समाचार चैनल या पत्रकार के रूप में पेश करने वाले या किसी भी तरह से समाचार से संबंधित ऐसे 1,450 से अधिक खाते स्पैम के कारण प्रतिबंधित कर दिए गए हैं।

    3.स्वैच्छिक आचार संहिता

    चुनावों से संबंधित ऑनलाइन बातचीत को सुरक्षित रखने के लिए, कू ने इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) द्वारा 'स्वैच्छिक आचार संहिता' को अपनाया है। यह संहिता चुनावों के दौरान सोशल मीडिया के निष्पक्ष और नैतिक इस्तेमाल के लिए है। एक जिम्मेदार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के रूप में जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए, इस संहिता को अपनाकर कू यूजर्स को सुरक्षित और निष्पक्ष चुनाव के लिए अपनी प्रतिबद्धता का आश्वासन देता है। कू संहिता के हर अक्षर और भावना के प्रति समर्पित हैं और चुनावी संहिता के किसी भी उल्लंघन को सीमित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन करता है। स्वैच्छिक आचार संहिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए कू ने मतदाता जागरूकता के अभियानों का भी समर्थन किया है, जिसमें वोटवालीसेल्फी, वोटवाललव, प्लेज टू वोट शामिल हैं और इन्हें मंच पर महत्वपूर्ण जुड़ाव मिला है।

    4.शिकायत निवारण तंत्र

    कू ने एक रेजिडेंट शिकायत अधिकारी के माध्यम से एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया है। इस तंत्र के माध्यम से मंच 24 घंटे के भीतर फर्जी खबरों से संबंधित मामलों सहित उठाए गए मुद्दों के लिए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करता है। इसके अलावा, कू की कंटेंट मॉडरेशन कार्रवाई भारतीय कानूनों के हिसाब से बनी है और यह एक सूक्ष्म दृष्टिकोण रखती है, जो ऐसी सामग्री को सक्रिय रूप से नियंत्रित करती है जो मौजूदा दिशानिर्देशों का पालन नहीं करती है, जिससे मंच पर सुरक्षा और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलता है।

    5. मतदाता जागरूकता पैदा करने के लिए कू वोटर गाइड

    जनवरी 2022 में पहली बार मतदाताओं को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में समझ के साथ सशक्त बनाने और चुनावों में जनता का विश्वास बढ़ाने के लिए मंच ने कू वोटर्स गाइड जारी की। ये गाइड भारत के संविधान में निहित भारतीय मतदाता के मूल अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करती है और उन जिम्मेदारियों का विश्लेषण करती है जिन पर मतदाताओं को अपना वोट डालने से पहले और बाद में विचार करने की जरूरत होती है। यह एक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय सोशल मीडिया मध्यवर्ती के रूप में मतदाता जागरूकता बढ़ाने और चुनावी प्रक्रिया में अधिक विश्वास बनाने के लिए कू एप की कोशिशों को दर्शाता है। एक बहुभाषी मंच होने के नाते सभी चुनावी राज्यों के मतदाताओं को लाभान्वित करने के लिए ये गाइड हिंदी, मराठी, पंजाबी और अंग्रेजी में उपलब्ध है।

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