Fact check unit: पैरोडी और सटायर अकाउंट की मौज, आईटी एक्ट के तहत नहीं होगी कार्रवाई

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Mon, 24 Apr 2023 07:22 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में कुछ संशोधन किए, जिसमें सरकार से संबंधित नकली या गलत या भ्रामक ऑनलाइन सामग्री की पहचान करने के लिए एक तथ्य जांच इकाई का प्रावधान शामिल है।

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IT Rules amendments dont seem to offer protection to parody satire says Bombay HC
कुणाल कामरा (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

    विस्तार

    बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में संशोधन पैरोडी और व्यंग्य करने वालों को सुरक्षा प्रदान नहीं करता है यानी ऐसे लोगों और अकाउंट से शेयर किए गए पोस्ट को सरकार सोशल मीडिया से कंपनियों से कहकर डिलीट नहीं करवाएगी। हाईकोर्ट की बेंच ने यह भी कहा कि संशोधनों को चुनौती देने वाली कामरा की याचिका सुनवाई योग्य है।

    6 अप्रैल को, केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में कुछ संशोधन किए, जिसमें सरकार से संबंधित नकली या गलत या भ्रामक ऑनलाइन सामग्री की पहचान करने के लिए एक तथ्य जांच इकाई का प्रावधान शामिल है।

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    कामरा ने अपनी याचिका में दावा किया कि नए नियम संभावित रूप से उनकी सामग्री को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया है कि मनमाने ढंग से उनके कंटेंट या सोशल मीडिया खातों को सस्पेंड किया जा रहा है जिसके उन्हें पेशेवर रूप से नुकसान हो रहा है।

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    कामरा ने अपनी याचिका में मांग की है कि अदालत संशोधित नियमों को असंवैधानिक घोषित करे और सरकार को नियमों के तहत सटायर या पैरोडी पोस्ट करने लासे किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से रोकने का निर्देश दे।

    केंद्र सरकार ने अदालत में दायर एक हलफनामे में "दोहराया था कि तथ्य जांच इकाई की भूमिका केंद्र सरकार के किसी भी व्यवसाय तक सीमित है, जिसमें नीतियों, कार्यक्रमों, अधिसूचनाओं, नियमों, विनियमों, उनके कार्यान्वयन के बारे में जानकारी शामिल हो सकती है।" वगैरह"।

    केंद्र सरकार ने अदालत में दायर एक हलफनामे में कहा है कि फैक्ट चेक यूनिट केवल नकली या झूठी या भ्रामक जानकारी की पहचान कर सकती है और किसी राय, व्यंग्य या कला की नहीं। यह यूनिट कथित मनमानी से ग्रस्त नहीं है जैसा कि याचिकाकर्ता कामरा ने आरोप लगाया है। इस मामले की सुनवाई अब 27 अप्रैल को होगी।

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