पाकिस्तान की इस यूनिवर्सिटी में दी जाती है भारतीय जवानों को हनी ट्रैप करने की ट्रेनिंग!

चीन और पाकिस्तान की इंटेलीजेंस एजेंसियाों की ओर से भारतीय सेना के जवानों के लिए हनी ट्रैप का बड़ा जाल बिछाया जा रहा है। इसे लेकर भारत सरकार की ओर एडवाइजरी भी जारी की जा चुकी है और हनी ट्रैप से बचने के लिए जवानों की रोजाना ट्रेनिंग भी हो रही है। सैन्य और अर्धसैनिक बलों में अब रोजाना रॉल कॉल के दौरान जवानों को हनी ट्रैप के बारे में बताया जाता है।
सीमावर्ती इलाकों में हो रही महिला एजेंटों की भर्ती

कुछ दिन पहले ही एक रिपोर्ट आई थी कि आर्मी के बाद अब अर्धसैनिक बलों पर हनी ट्रैप का खतरा मंडरा रहा है। गोपनीय सूचनाएं लीक कराने के लिए दोनों देशों सीमावर्ती इलाकों में बड़े पैमाने पर महिला एजेंटों की भर्ती करनी शुरू कर दिया है। भारतीय जांच एजेंसियों के ताजा खुलासे में पता चला है कि इन दोनों देशों की खुफिया इकाई ने फेसबुक, ऑरकुट व इंस्टाग्राम की मदद से सेना व अर्धसैनिक बलों के अफसरों के फोन नंबर जुटा लिए हैं।
मिलिट्री के मीडिया हाउस में निकली सोशल मीडिया के पद पर वैकेंसी

वहीं अब फातिमा जिन्ना महिला यूनिवर्सिटी की साइट पर सोशल मीडिया स्पेसलिस्ट (महिला) की वैकेंसी का नोटिफिकेशन जारी हुआ है। वेबसाइट पर जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक यह वैकेंसी पाकिस्तानी मिलिट्री के एक मीडिया हाउस के लिए है। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि उम्मीदवार को सोशल मीडिया मार्केटिंग और डिजिटल मीडिया में अनुभव होना चाहिए। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि कैंडिडेट को टाइपिंग, फोटो-वीडियो और टेक्स्ट की एडिटिंग और प्रजेंटेशन आनी चाहिए। इसके अलावा कैंडिडेट के कम्यूनिकेशन स्किल्स अच्छे होने चाहिए और सोशल मीडिया टूल्स के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। सोशल मीडिया स्पेशलिस्ट के पद के लिए अंग्रेजी का ज्ञान रखने वाले कैंडिडेट्स को प्राथमिकता दी जाएगी। इस वैकेंसी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि कहीं यह वैकेंसी भी हनी ट्रैप का हिस्सा तो नहीं है।
तेजी से बढ़ रहा है हनी ट्रैप का मामला

आर्मी के बाद अब अर्धसैनिक बलों पर हैनी ट्रैप का खतरा मंडरा रहा है। गोपनीय सूचनाएं लीक कराने के लिए पहले ये दोनों देश अपने एजेंट को शहरों तक सीमित रखे हुए थे, लेकिन अब उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में बड़े पैमाने पर महिला एजेंटों की भर्ती करनी शुरू कर दी है। भारतीय जांच एजेंसियों के ताजा खुलासे में पता चला है कि इन दोनों देशों की खुफिया इकाई ने फेसबुक, ऑरकुट व इंस्टाग्राम की मदद से सेना व अर्धसैनिक बलों के अफसरों के फोन नंबर जुटा लिए हैं। जवानों के पास प्राइवेट नंबर से महिलाओं के फोन आ रहे हैं। सेना और अर्धसैनिक बलों में लागू की गई 'वेपन इन, मोबाइल आउट' पॉलिसी भी कामयाब नहीं हो पा रही है।