फेसबुक पेपर्स: विवाद से न तो यूजर्स पर फर्क पड़ा और न ही फेसबुक के विज्ञापनदाताओं पर

Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटनHarendra Chaudhary
Tue, 02 Nov 2021 02:49 PM IST
सार

ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं का अध्ययन करने वाली एजेंसी न्यूजह्विप के मुताबिक फेसबुक के बारे में छपने वाली खबरों में लोगों की दिलचस्पी कम से कम एक साल से गिरती चली गई है। इसलिए संभव है कि इस बार जो विवाद उठा, उस पर बहुत से लोगों ने ध्यान नहीं दिया। न्यूजह्विप ने कहा है- ‘फेसबुक पेपर्स जारी होने से फेसबुक से संबंधित रिपोर्टों में दिलचस्पी में मामूली बढ़ोतरी भी नहीं हुई।’

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Facebook Papers has made no difference to its users, advertisers, and investors on Facebook
मार्क जुकरबर्ग - फोटो : Agency (File Photo)

    विस्तार

    एक व्हिसलब्लोअर के खुलासों से फेसबुक कंपनी की दुनिया भर में बदनामी हुई है। व्हिसलब्लोअर फ्रांसिस हॉगेन ने जो दस्तावेज सार्वजनिक किए, उन्हें अब दुनिया भर में फेसबुक पेपर्स के नाम से जाना जाता है। इन दस्तावेजों से सामने आया कि फेसबुक कंपनी ने हमेशा सामाजिक हितों पर अपने मुनाफे को तरजीह दी। इसके लिए उसने वे पोस्ट और पेज भी बने रहने दिए, जिन्हें ‘खतरनाक’ श्रेणी में बताया गया है।

    खबरों को लेकर लोगों की कम हुई दिलचस्पी

    लेकिन इन पेपर्स से सार्वजनिक चर्चाओं में फेसबुक पर चाहे जितने सवाल उठाए गए हों, उसके यूजर्स, विज्ञापनदाताओं, और निवेशकों पर इनसे कोई फर्क नहीं पड़ा है। ऑनलाइन रिस्पॉन्स के जो भी प्रमुख पैमाने हैं, उनसे ये बात सामने आई है। ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं का अध्ययन करने वाली एजेंसी न्यूजह्विप के मुताबिक फेसबुक के बारे में छपने वाली खबरों में लोगों की दिलचस्पी कम से कम एक साल से गिरती चली गई है। इसलिए संभव है कि इस बार जो विवाद उठा, उस पर बहुत से लोगों ने ध्यान नहीं दिया। न्यूजह्विप ने कहा है- ‘फेसबुक पेपर्स जारी होने से फेसबुक से संबंधित रिपोर्टों में दिलचस्पी में मामूली बढ़ोतरी भी नहीं हुई।’

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    न्यूजह्विप के इस निष्कर्ष की पुष्टि गूगल ट्रेंड्स डाटा से भी होती है। पिछले एक साल के गूगल ट्रेंड्स के आंकड़ों के मुताबिक बीते एक साल में फेसबुक के बारे में खबरों को उस समय सबसे ज्यादा पढ़ा गया, जब तकनीकी दिक्कतों के कारण ये वेबसाइट डाउन हो गई थी। ये आउटेज पिछले महीने हुआ था।

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    अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने हाल में इंस्टाग्राम के बारे में अपनी एक खोजी रिपोर्ट छापी थी। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि इंस्टाग्राम की कई पोस्ट्स का किशोर उम्र की लड़कियों की दिमागी सेहत पर बहुत खराब असर पड़ता रहा है। ये बात जानने के बाद भी फेसबुक कंपनी ने इन दुष्प्रभावों को नजरअंदाज किए रखा। इंस्टाग्राम भी फेसबुक का ही एक प्लेटफॉर्म है। अब न्यूजह्विप ने बताया है कि वॉल स्ट्रीट जर्नल की ये खबर सोशल मीडिया इंटेरेक्शन के लिहाज से 48वें नंबर पर रही। यानी इसमें भी ज्यादा लोगों की दिलचस्पी नहीं दिखी।

    एपल कंपनी की कार्रवाई से गिरे फेसबुक के शेयर

    इसलिए अब विश्लेषकों का कहना है कि फेसबुक पेपर्स से जुड़ा सारा विवाद सिर्फ सरकारी अधिकारियों के बीच और मेनस्ट्रीम मीडिया की चर्चा तक सिमटा हुआ है। समझा जाता है कि फेसबुक से संबंधित खबरों बारे में सबसे ज्यादा दिलचस्पी तब थी जब पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सत्ता में थे। उसके बाद से लोगों की इस बात में रुचि घट गई है कि फेसबुक कंपनी के अंदर क्या हो रहा है।

    हाल में शेयर बाजारों में फेसबुक कंपनी के शेयरों के भाव गिरे हैं। शुरुआती रिपोर्टों में इसे फेसबुक पेपर्स के सामने आने का परिणाम बताया गया था। लेकिन अब विश्लेषकों का मानना है कि इन पेपर्स की भूमिका ज्यादा नहीं थी। फेसबुक के शेयरों के भाव लक्ष्य केंद्रित विज्ञापनों पर एपल कंपनी की कार्रवाई से गिरे।

    इस बीच कई सामाजिक और सिविल सोसायटी संगठनों ने फेसबुक के विज्ञापनदाताओं से अपील की है कि वे इस कंपनी का बहिष्कार करें। विज्ञापन की बहिष्कार की ये मुहिम अगले 10 नवंबर से शुरू की जाएगी। लेकिन वेबसाइट एक्सियोस.कॉम की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अभी तक इसका कोई असर नहीं हुआ है। असल में फेसबुक पेपर्स के सामने आने के बाद से किसी बड़े विज्ञापनदाता ने फेसबुक से मुंह नहीं मोड़ा है।

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