हर दो सेकंड में एक महिला के साथ सोशल मीडिया पर होता है अपराध, लेकिन गिरफ्त में नहीं आते साइबर अपराधी

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अंबर जैदी एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और महिलाओं से जुड़े मुद्दे पर लगातार सक्रिय रहती हैं। दूसरों की मदद करने वाली अंबर जैदी को भी सोशल मीडिया पर कई बार अभद्र टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है। वे इसके विरोध में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में कई बार शिकायतें भी दर्ज करा चुकी हैं, लेकिन अब तक किसी भी मामले में अपराधी को पकड़ा नहीं जा सका है। अंततः पुलिस इन मामलों को बंद कर देती है और महिलाओं के साथ यह अभद्रता चलती रहती है।
नेहा शालिनी दुआ महिलाओं की आर्थिक तरक्की और लैंगिक जागरुकता के लिए काम करती हैं। उन्होंने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बच्चों को 'सेक्सुअल अवेयरनेस' के मुद्दे पर काम करना शुरू किया। दिल्ली सरकार ने उनकी नेहा फाउंडेशन को पश्चिमी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बच्चों को सेक्सुअल शिक्षा देने की जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन समाज के ही कुछ लोगों को यह काम पसंद नहीं आया और उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर उनके लिए काफी अभद्र टिप्पणियां की गईं। लेकिन किसी भी मामले में कोई अपराधी पकड़ा नहीं गया।
अंबर जैदी बताती हैं कि 2018 मेंं दर्ज उनकी एक शिकायत के लिए लगभग डेढ़ साल बाद जांचकर्ता अधिकारी ने ही उन्हें यह सलाह दी कि अब उन्हें इस मामले को वापस ले लेना चाहिए। इस मामले में उन्हें बताया गया कि उन्हें अभद्र टिप्पणियां सउदी अरब से की गईं और वहां तक पहुंच पाना और अपराधियों को पकड़ पाना जांचकर्ताओं के लिए संभव नहीं है। आखिरकार यह मामला हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। यही हाल अन्य मामलों में भी होता है।
क्यों नहीं पकड़ में आते अपराधी
दिल्ली पुलिस के साइबर सेल के एक अधिकारी के मुताबिक अनुमान है कि हर दो सेकंड में एक महिला के साथ सोशल मीडिया पर एक अपराध होता है, लेकिन साइबर अपराधों की प्रकृति और उनकी पहुंच ऐसी है कि उन तक आसानी से पहुंच पाना संभव नहीं होता। ज्यादातर सोशल मीडिया अकाउंट फर्जी होते हैं और वे वीपीएन सर्वरों के जरिए अंजाम दिए जाते हैं, जिन तक पहुंच पाना आधुनिक उपकरणों के माध्यम से भी संभव नहीं होता। यही कारण है कि इन मामलों में अपराधी बच निकलते हैं।
कुछ ही मामले जिनमें आर्थिक लेनदेन की गई होती है और उनकी सीमा भारतीय क्षेत्र में होती है, उन्हीं मामलों मेंं कुछ हद तक सफलता मिल पाती है। लेकिन जिन मामलों में लेनदेन के लिए बाहरी स्रोतों का इस्तेमाल किया गया होता है, उन पर पकड़ बनाना संभव नहीं होता।