कानपुर में वैक्सीन लगवाने के बाद 40 छात्र अस्पताल में भर्ती, पढ़िए सरकार ने क्या कहा?

भारत में दुनिया का सबसे बड़ा कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू हो गया है लेकिन इसी बीच अफवाहों का भी बाजार में गर्म हो रहा है। सोशल मीडिया पर हर रोज तमाम ऐसे पोस्ट शेयर हो रहे हैं जिनमें वैक्सीन लगवाने के बाद तबीयत खराब होने और मृत्यु होने का फर्जी दावा किया जा रहा है। अब अखबार की एक कतरन सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें दावा किया जा रहा है कि कोरोना का टीका लगवाने के बाद कानुपर में 40 छात्रों की मौत हो गई है। अखबार बच्चों की फोटो भी छपी है।
सरकार ने बताई कतरन की सच्चाई?
पीआईबी फैक्ट चेक की टीम ने इस फोटो को ट्वीट करते हुए फर्जी करार दिया है। पीआईबी फैक्ट चेक ने कहा है कि यह दावा फर्जी है और इसका कोरोना-19 टीकाकरण से कोई संबंध नहीं है। दरअसल अखबार की जो कटिंग वायरल हो रही है वह साल 2018 की है जब कानपुर में रुबेला की वैक्सीन लगाने से कुछ बच्चों को बुखार, सिरदर्द जैसी दिक्कत हुई थीं। तो यदि आपके पास भी अखबार की यह कटिंग पहुंची है तो उसे किसी को ना भेजें और अफवाह को रोकें।
बता दें कि भारत में कोरोना टीकाकरण अभियान को शुरू हुए दो दिन हो चुके हैं। इस दौरान लाखों लोगों को टीका लगाया गया, लेकिन कुछ-कुछ जगहों पर कुछ लोगों में इसके साइड-इफेक्ट भी देखने को मिल रहे हैं। यह जानकारी रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक संवाददाता सम्मेलन में दी।
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 16 और 17 जनवरी को टीका लगाए जाने के बाद 447 एइएफआई (एडवर्स इवेंट फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन) यानी टीकाकरण के बाद प्रतिकूल घटना रिपोर्ट की गई हैं। हालांकि संवाददाता सम्मेलन के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव डॉ. मनोहर अगनानी ने बताया कि अधिकांश मामलों में वैक्सीन का प्रतिकूल प्रभाव मामूली स्तर का था।
डॉ. मनोहर अगनानी ने बताया कि टीका लगाए जाने के बाद सिर्फ तीन मामले ऐसे देखने को मिले, जिसमें लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। दरअसल, वैक्सीन दिए जाने के बाद अगर किसी को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है तो उसे गंभीर एइएफआई (एडवर्स इवेंट फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन) माना जाता है।