अंतरिक्ष में भारत की नई छलांग: प्राइवेट कंपनी लॉन्च करेगी 12 स्वदेशी सैटेलाइट, अगले साल होगी पहली लॉन्चिंग

सुयश पांडेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीसुयश पांडेय
Wed, 21 Jan 2026 12:47 PM IST
सार

बंगलूरू की स्पेस-टेक स्टार्टअप कंपनी पिक्सेल स्पेस के नेतृत्व में भारतीय स्टार्टअप्स का एक कंसोर्टियम भारत का पहला निजी तौर पर तैयार 'नेशनल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन' लॉन्च करने जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 12 उपग्रहों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो पृथ्वी की हाई-क्वालिटी तस्वीरें और जरूरी डाटा जुटाएगा।

Pixxel-Led Consortium to Launch India’s First Private National Earth Observation Satellite Constellation
IN-SPACe - फोटो : X

    विस्तार

    बंगलूरू की स्पेस-टेक स्टार्टअप 'पिक्सेल स्पेस' के नेतृत्व में भारतीय स्टार्टअप्स का एक समूह एक बड़ा काम करने जा रहा है। यह समूह भारत का पहला निजी तौर पर बनाया गया 'नेशनल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन' लॉन्च करेगा। यानी ऐसे कई उपग्रहों का नेटवर्क, जो पृथ्वी की तस्वीरें और जरूरी डाटा जुटाएगा। इसके पहले उपग्रहों के सेट के अगले साल लॉन्च होने की उम्मीद है।

    IN-SPACe के साथ अहम समझौता

    इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए पिक्सेल के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने बंगलूरू में IN-SPACe के साथ एक समझौता किया है। इससे भारत के पहले स्वदेशी और व्यावसायिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट नेटवर्क का रास्ता साफ हो गया है। इस मिशन में कुल 12 उपग्रह बनाए और तैनात किए जाएंगे। इसमें पिक्सेल स्पेस के साथ पियरसाइट, सैटश्योर एनालिटिक्स इंडिया और ध्रुव स्पेस भी शामिल हैं।

    पिक्सेल स्पेस के सीईओ अवैस अहमद ने कहा कि यह 1,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की राष्ट्रीय परियोजना है। इसे स्टार्टअप्स को देकर सरकार ने दिखाया है कि भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर अब बड़े स्तर पर काम करने में सक्षम है।

    कब लॉन्च होंगे सैटेलाइट

    पिक्सेल के मुताबिक, 2027 की पहली तिमाही में पहले 4 उपग्रह कक्षा में भेजे जाएंगे। बाकी उपग्रहों को भी अगले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लॉन्च किया जाएगा। यह 12 उपग्रहों का नेटवर्क आधुनिक तकनीक से लैस होगा और अलग-अलग तरह की इमेजिंग देगा। जैसे हाई-रेजोल्यूशन ऑप्टिकल, मल्टीस्पेक्ट्रल, SAR (सिंथेटिक एपर्चर रडार) और हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग।

    कई क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

    IN-SPACe के जरिए सरकारी एजेंसियों को भरोसेमंद डाटा मिलेगा। कृषि, पर्यावरण, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और समुद्री क्षेत्रों में इस डाटा का इस्तेमाल करके बिजनेस बढ़ाया जा सकेगा। पिक्सेल इसे सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि पृथ्वी का एक 'हेल्थ मॉनिटर' बनाना चाहता है, जो संकट से पहले ही खतरे पहचान सके।

    दिलचस्प बात यह है कि अगस्त 2025 में इस कंसोर्टियम ने यह सरकारी प्रोजेक्ट 'जीरो बिड' पर जीता था। यानी उन्होंने सरकार की 350 करोड़ रुपये की सहायता लेने से मना कर दिया और खुद ही डिजाइन, निर्माण और संचालन करने का भरोसा दिखाया।

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