आपका हो सकता है वर्चुअल पर्सनल असिस्टेंट

आपने बहुत से बड़े लोगों के निजी सहायक देखे होंगे, जो उनके हर काम का ध्यान रखते हैं। उनका दिन का रूटीन प्लान करते हैं, किस किस से मिलना है? कहां और कब मिलना है? दिन में कौन से काम निपटाने हैं। ये पर्सनल असिस्टेंट बड़े लोगों को मीटिंग का वक्त याद दिलाते हैं। उनके कहने पर लोगों को फोन लगाते हैं। फ्लाइट के टिकट बुक करते हैं। इस तरह वो बड़े लोगों की जिंदगी आसान करते हैं। ऐसा सोचकर आपको भी जलन होगी। आप सोचते होंगे कि काश! आपके पास भी पर्सनल असिस्टेंट होते।
तो सोचना छोड़िए। अब आप भी पर्सनल असिस्टेंट रख सकते हैं, पर वो इंसान नहीं होगा। वो आपका वर्चुअल पर्सनल असिस्टेंट होगा जिसे आप आवाज देकर काम ले सकेंगे।

ये पर्सनल असिस्टेंट आपके फोन पर उपलब्ध है। आपके लैपटॉप पर मौजूद है। जरूरत है, बस उससे काम लेने का तरीका जानने की। तकनीक की दुनिया में रोज नई क्रांति आ रही है। आज एप्पल के सीरी से लेकर माइक्रोसॉफ्ट के कोर्टाना और अमेजन के अलेक्सा से लेकर गूगल के नाओ तक तमाम डिजिटल वर्चुअल पर्सनल असिस्टेंट आ गए हैं। इस मामले में एप्पल का सीरी का नंबर पहला है। इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ने कोर्टाना के नाम से वर्चुअल निजी सहायक बाजार में उतारा है। इसके बाद तो मानो वर्चुअल पर्सनल असिस्टेंट को बनाने की होड़ लग गई है।
सब दावा करते हैं कि वो आपका काम और आपकी जिंदगी आसान कर देंगे। लेकिन आज भी लोग वर्चुअल दुनिया के इन निजी सहायकों से काम लेने में हिचकिचाते हैं।
ये आसान काम नहीं है। आइए ये जानने की कोशिश करते हैं कि कैसे इनकी मदद से आपकी भागदौड़ भरी जिंदगी को थोड़ा आसान बनाया जा सकता है। शुरुआत में अपने फोन को आवाज देकर कोई काम करने के लिए कहना बड़ा अजीब लगता है। फिर लहजे का मसला खड़ा होता है। आप कहते कुछ हैं, आपका वर्चुअल सहायक समझता कुछ और है। कई बार खीझ होती है, गुस्सा भी आता है और कई बार हंसी भी आती है। कुछ वर्चुअल पर्सनल असिस्टेंट वाकई बड़े काम के होते हैं।
एप्पल का सीरी पिछले पांच सालों से बाजार में है। 'कल्ट ऑफ मैक' के संपादक लिएंडर काने कहते हैं कि जब तक आप जबरदस्ती खुद को वर्चुअल सहायक से काम लेने को मजबूर नहीं करते, तब तक आप इसका फायदा नहीं उठा सकते। सबसे बड़ा मसला होता है बोली समझने का। अंग्रेज़ी में ही वॉयस कमांड देते वक्त बहुत से लोगों का लहजा अलग-अलग होता है। हालांकि कुछ काम हैं जिनमें ये वर्चुअल पीए काफी मददगार हो सकते हैं जैसे किसी को फोन लगाना हो तो आप अपने फोन के वर्चुअल सहायक को आवाज देकर कह सकते हैं कि इस आदमी को फोन लगाओ।

काम सही ढंग से हो इसलिए अपने वाक्य छोटे ही रखिए। आप वर्चुअल पीए को ये भी बता सकते हैं कि ये मैसेज एसएमएस से भेजा जाए या फिर व्हाट्सऐप से। अगर आपको जल्दी-जल्दी कुछ लोगों को ई-मेल भेजना हो तो भी ये वर्चुअल पीए काफी काम आ सकता है। आप अपने वर्चुअल असिस्टेंट की मदद से लोगों से मिलने का, मीटिंग का या फिर दूसरे काम निपटाने का वक्त तय कर सकते हैं। आप अपने वर्चुअल सहायक से किसी खास दिन के लिए पोशाक चुनने में भी मदद मांग सकते हैं।
ये छोटे-छोटे काम आपकी जिंदगी को काफी आसान बना देंगे। अभी कुछ दिन पहले ही गूगल ने एक ऐसा ऐप बनाने का एलान किया है जो आपके ठिकाने, आपके काम, आपके आस-पास के मौसम पर निगाह रखेगा। यही नहीं ये ऐप ये भी पता लगा लेगा कि आपने हेडफोन पहना है कि नहीं। इसका मतलब ये कि अगर आप मीटिंग में है तो इस ऐप को पता होगा कि आपको अभी तंग नहीं करना है। आज नए नए ऐप बनाने में, तकनीक को बेहतर करने में अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
गूगल, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल जैसी कंपनियां आपकी हर हरकत पर निगाह रखना चाहती हैं, तो जल्द ही हर इंसान की जेब में एक वर्चुअल पीए होगा और अगर आप अपनी प्राइवेसी को बहुत अहमियत नहीं देते, तो आप इससे अपने राज साझा कर सकेंगे। ये आपको तमाम मसलों पर सुझाव भी देगा। हो सकता है कि आगे चलकर ये वर्चुअल निजी सहायक आपकी डेट तय करने में भी मददगार हो।