Dating Apps: वैलेंटाइन-डे पर रहें सतर्क! Bumble-Tinder जैसे डेटिंग एप्स पर हुआ साइबर अटैक, जानिए पूरा मामला
Dating Apps Cyber Attack:
वैलेंटाइन डे से ठीक पहले लोकप्रिय डेटिंग एप्स पर साइबर हमलों की खबर ने यूजर्स की चिंता बढ़ा दी है। Bumble और Match Group समेत कई कंपनियों के सिस्टम को निशाना बनाया गया। भले ही कंपनियां डेटा सुरक्षित होने का दावा कर रही हों

विस्तार
वैलेंटाइन डे से ठीक पहले, जब डेटिंग ऐप्स पर सबसे ज्यादा ट्रैफिक होता है, हैकर्स ने दुनिया के कुछ सबसे बड़े प्लेटफॉर्म्स को अपना निशाना बनाया है। Bumble और टिंडर की पैरेंट कंपनी Match Group जैसी कंपनियों ने पुष्टि की है कि उनके सिस्टम पर साइबर हमले की कोशिश की गई है। इस खबर ने यूजर्स की नींद उड़ा दी है क्योंकि इन एप्स पर यूजर्स की बेहद निजी जानकारियां मौजूद होती हैं।
हैकर्स ने कैसे लगाया सेंध
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स ने सिर्फ डेटिंग एप्स ही नहीं, बल्कि Crunchbase और Panera Bread जैसी कंपनियों के इंटरनल सिस्टम को भी निशाना बनाया। हैरान करने वाली बात यह है कि यह हमला किसी सॉफ्टवेयर की तकनीकी खराबी की वजह से नहीं, बल्कि इंसानी गलती की वजह से हुआ।
हैकर्स ने फिशिंग (Phishing) तकनीक का इस्तेमाल किया। उन्होंने कंपनी के कर्मचारियों या कॉन्ट्रैक्टर्स को झांसे में लेकर उनके लॉगिन क्रेडेंशियल्स हासिल कर लिए और नेटवर्क के अंदर घुस गए।
Bumble और Match Group का क्या कहना है?
Bumble ने माना कि एक कॉन्ट्रैक्टर के फिशिंग ईमेल में फंसने से हैकर्स को इंटरनल नेटवर्क तक पहुंच मिली। हालांकि कंपनी का कहना है कि हमलावरों को समय रहते हटा दिया गया और यूजर अकाउंट, पासवर्ड या चैट सुरक्षित रहे।
Match Group ने 16 जनवरी को साइबर अटैक की कोशिश की पुष्टि की है। हैकिंग ग्रुप ShinyHunters ने इसकी जिम्मेदारी ली, लेकिन कंपनी का दावा है कि किसी भी यूजर का लॉगिन डेटा, फाइनेंशियल जानकारी या निजी चैट लीक नहीं हुई।
यूजर्स के लिए क्यों है ज्यादा जोखिम?
अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की तुलना में डेटिंग एप्स में यूजर्स की ज्यादा जानकारियां होती हैं। इसमें यूजर की फोटो, कॉन्टैक्ट डिटेल्स और लोकेशन जैसी जानकारियां तो होती ही हैं। साथ ही उम्र, रंग, कद, पसंद-नापसंद, बातचीत जैसी कई निजी जानकारियां डेटिंग एप्स को साइबर अपराधियों की पहली पसंद बना देती हैं। साथ ही, कई लोग एक ही पासवर्ड अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर इस्तेमाल करते हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही नुकसान सीमित बताया जा रहा हो, लेकिन छोटी-सी जानकारी भी आगे चलकर पहचान की चोरी, फ्रॉड या टारगेटेड स्कैम में इस्तेमाल हो सकती है।
- YouTube: अब बैकग्राउंड में नहीं चलेगा यूट्यूब! इन यूजर्स के लिए बंद हुआ फीचर, जानिए पूरी डिटेल
- Space: क्या अंतरिक्ष में तेजी से बूढ़ा होने लगता है शरीर? वैज्ञानिकों ने सुलझाया उम्र का अनोखा रहस्य
- OpenAI ला सकता है ‘ह्यूमन-ओनली’ सोशल नेटवर्क: Face ID से होगी पहचान, X और इंस्टाग्राम को मिलेगी कड़ी टक्कर
- Innovation: सिर्फ 20 सकेंड में जम जाएगी बर्फ, इस जादुई लिक्विड से दूर होगा डेटा सेंटर का सबसे बड़ा सिरदर्द