Space: क्या अंतरिक्ष में तेजी से बूढ़ा होने लगता है शरीर? वैज्ञानिकों ने सुलझाया उम्र का अनोखा रहस्य
क्या अंतरिक्ष की यात्रा हमें जल्दी बूढ़ा बना सकती है? एक नई रिसर्च में सामने आया है कि अंतरिक्ष में शरीर तेजी से बदलाव दिखाता है। लेकिन धरती पर लौटते ही कई असर खुद-ब-खुद कम हो जाते हैं।

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अक्सर उम्र बढ़ने को एक धीमी और स्थायी प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन अंतरिक्ष में गए एस्ट्रोनॉट्स पर हुई नई स्टडी कुछ और ही कहानी बताती है। शोध में सामने आया कि स्पेस में शरीर तेजी से बदलाव दिखाता है, लेकिन धरती पर लौटते ही कई असर खुद-ब-खुद कम हो जाते हैं।
वैज्ञानिकों ने पाया कि छोटी अवधि के स्पेस मिशन पर गए एस्ट्रोनॉट्स के शरीर में ऐसे बदलाव दिखे, जो आमतौर पर उम्र बढ़ने से जोड़े जाते हैं। माइक्रोग्रैविटी, नींद में गड़बड़ी और फिजिकल स्ट्रेस जैसे हालातों ने शरीर को एक तरह के “स्ट्रेस मोड” में डाल दिया। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि एस्ट्रोनॉट्स सच में बूढ़े हो गए। ये बदलाव अस्थायी थे और वातावरण बदलते ही शरीर ने खुद को संभाल लिया।
कैसे की गई स्टडी?
“Astronauts as a Human Ageing Model” नाम की इस रिसर्च में चार एस्ट्रोनॉट्स को शामिल किया गया, जिन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर नौ दिन बिताए। वैज्ञानिकों ने लॉन्च से पहले, मिशन के दौरान और धरती पर लौटने के बाद उनके ब्लड सैंपल लिए, जिससे रियल टाइम में शरीर के बदलावों को समझा जा सका।
इस स्टडी में उम्र को कैलेंडर से नहीं, बल्कि एपिजेनेटिक क्लॉक्स से मापा गया। ये क्लॉक्स DNA में होने वाले बदलावों के आधार पर शरीर की बायोलॉजिकल उम्र बताते हैं, जो स्ट्रेस और माहौल से प्रभावित हो सकती है। स्पेस में रहते समय इन क्लॉक्स में अस्थायी बढ़ोतरी दिखी, लेकिन यह हर एस्ट्रोनॉट में अलग-अलग स्तर पर थी।
धरती पर लौटते ही बदली तस्वीर
धरती पर वापस आने के बाद ज्यादातर एस्ट्रोनॉट्स की बायोलॉजिकल एज दोबारा पहले जैसी होने लगी। कुछ मामलों में यह थोड़ी देर के लिए शुरुआती स्तर से भी नीचे चली गई। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसमें इम्यून सिस्टम की बड़ी भूमिका रही, जो जल्दी रिकवर करने में सक्षम होता है।
उम्र को देखने का नया नजरिया
शोधकर्ता साफ कहते हैं कि यह स्टडी यह साबित नहीं करती कि स्पेस ट्रैवल से लंबे समय में उम्र तेजी से बढ़ती है। मिशन छोटा था और प्रतिभागी भी कम थे। लंबे स्पेस मिशन में नतीजे अलग हो सकते हैं। फिर भी, यह रिसर्च दिखाती है कि इंसानी शरीर कितनी तेजी से कठिन परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदल सकता है।
इस स्टडी से यह सोच मजबूत होती है कि उम्र बढ़ना कोई एकतरफा प्रक्रिया नहीं है। हमारा पर्यावरण और परिस्थितियां हमारी उम्र बढ़ने की रफ्तार को कम या ज्यादा कर सकती हैं। अंतरिक्ष ने इन बदलावों को कुछ समय के लिए उजागर किया, और धरती पर लौटते ही शरीर ने संतुलन बना लिया।