App: बिना कोडिंग के खुद बना पाएंगे अपना एप, नथिंग फोन 3 यूजर्स के लिए 'एसेंशियल एप्स बिल्डर' बीटा रोलआउट शुरू

सुयश पांडेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीसुयश पांडेय
Thu, 12 Feb 2026 12:37 PM IST
सार

Essential Apps Builder:

लंदन की स्मार्टफोन कंपनी नथिंग ने अपने एआई विजन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'एसेंशियल एप्स बिल्डर' का बीटा वर्जन जारी कर दिया है। यह टूल 'वाइब कोडिंग' तकनीक पर काम करता है। इसके जरिए यूजर सिर्फ सामान्य भाषा में अपनी जरूरत लिखकर कस्टम एप या विजेट तैयार कर सकते हैं।

Nothing Launches AI-Powered ‘Essential Apps Builder’: Create Custom Apps Without Coding
नथिंग एसेंशियल एप्स बिल्डर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एक्स

    विस्तार

    लंदन की स्मार्टफोन कंपनी नथिंग ने अपने एआई बेस्ड ऑपरेटिंग सिस्टम की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कार्ल पेई की अगुवाई वाली इस कंपनी ने अब एसेंशियल एप्स बिल्डर का बीटा वर्जन जारी कर दिया है। इस बार कंपनी ने एक ऐसा टूल पेश किया है जिससे लोग बिना कोडिंग सीखे भी एप बना पाएंगे। कंपनी का दावा है कि यह टूल 'वाइब कोडिंग' के जरिए काम करता है। यानी आपको सिर्फ टेक्स्ट में बताना है कि आप कैसा एप चाहते हैं और सिस्टम उसे खुद ही तैयार करके दे देगा। एसेंशियल एप्स बिल्डर, नथिंग के प्लेग्राउंड हब का हिस्सा है। इसकी खास बात यह है कि यूजर सिर्फ सामान्य बोलचाल की भाषा में निर्देश देकर अपने लिए कस्टम एप बना सकते हैं। इसके लिए किसी तकनीकी जानकारी या प्रोग्रामिंग स्किल की जरूरत नहीं है। कुल मिलाकर यह टूल उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो एप बनाना चाहते हैं लेकिन उन्हें कोडिंग नहीं आती। आपको बता दें कि नथिंग के सीईओ और सह-संस्थापक कार्ल पाई ने अपनी खुद की कंपनी शुरू करने से पहले 2013 में पीट लाउ के साथ मिलकर वनप्लस (OnePlus) की स्थापना की थी जहां उन्होंने 7 साल तक काम किया।

    क्या है 'एसेंशियल एप्स बिल्डर' और 'वाइब कोडिंग'?

    हम अक्सर ऐसे एप्स इस्तेमाल करते हैं जो लाखों-करोड़ों लोगों के लिए बनाए जाते हैं लेकिन वे हमेशा हमारी छोटी-छोटी निजी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते। इसी समस्या को दूर करने के लिए नथिंग ने एसेंशियल एप्स बिल्डर पेश किया है। यह टूल 'वाइब-कोडिंग' तकनीक पर काम करता है। इसका मतलब है कि आपको कोडिंग सीखने या समझने की जरूरत नहीं है। आप बस अपनी जरूरत सामान्य शब्दों में लिखते हैं और एआई उसी आधार पर आपके लिए एप या विजेट तैयार कर देता है। फिलहाल यह टूल लोकेशन के आधार पर रिमाइंडर, कैलेंडर एजेंडा और वन-टैप कॉन्टैक्ट विजेट जैसे फीचर्स बना सकता है। यानी आप अपनी जरूरत के मुताबिक छोटे-छोटे उपयोगी टूल खुद बना सकते हैं वो भी बिना किसी कोडिंग की जानकारी के।

    कैसे काम करता है 'एप्स बिल्डर'?

    नथिंग का प्लेग्राउंड कंपनी का अपना एप स्टोर जैसा प्लेटफॉर्म है और इसी के अंदर एप्स बिल्डर दिया गया है। इसे इस्तेमाल करना बेहद आसान है। इसमें आपको बस अपने हिसाब से सामान्य भाषा में जरूरत लिखनी होती है। इसके बाद एआई आपके लिखे हुए टेक्स्ट को समझकर खुद कोड तैयार करता है और आपके लिए एक विजेट (Widget) बना देता है। अगर तैयार विजेट आपकी मन मुताबिक नहीं है तो आप एआई से उसमें बदलाव करने के लिए कह सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए आपको कोडिंग की कोई जानकारी होने की जरूरत नहीं है। जो विजेट तैयार होता है उसे आप सीधे अपने फोन पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

    किन डिवाइसेज पर करेगा काम?

    अभी के समय में एसेंशियल एप्स बिल्डर सिर्फ नथिंग फोन 3 पर उपलब्ध है, जिसे जुलाई 2025 में लॉन्च किया गया था। कंपनी ने इसे एक साथ सभी यूजर्स के लिए जारी नहीं किया है बल्कि इसे चरणों में रोलआउट किया जा रहा है। इसका उपयोग करने के लिए यूजर्स को पहले वेटलिस्ट जॉइन करनी होगी। आगे की योजना के तहत नथिंग का कहना है कि जल्द ही यह फीचर उन सभी नथिंग (Nothing) और सीएमएफ (CMF) डिवाइसेज पर भी उपलब्ध कराया जाएगा, जो नथिंग ओएस 4.0 पर चलते हैं। कंपनी की कोशिश है कि इस साल के अंत तक इसे सभी यूजर्स के लिए पूरी तरह लॉन्च कर दिया जाए। उस समय इसमें 'रिमिक्सिंग एप्स' जैसा नया फीचर भी जोड़ा जाएगा, जिससे यूजर मौजूदा एप्स में बदलाव कर सकेंगे।

    क्या 'वाइब कोडिंग' का दौर खत्म हो रहा है?

    एक तरफ नथिंग वाइब-कोडिग को बढ़ावा दे रहा है वहीं टेक इंडस्ट्री में कुछ अगल ही दिशा देखने को मिल रही है। कई बड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अब 'एजेंटिक इंजीनियरिंग' का समय शुरू हो रहा है। एआई विशेषज्ञ आंद्रेज कार्पेथी (जिन्होंने वाइब कोडिंग शब्द दिया था) के मुताबिक, अब ध्यान सिर्फ आसान तरीके से कोड लिखवाने पर नहीं है। अब फोकस ऐसे एआई एजेंट्स पर है जो खुद ही पूरा काम संभाल सकें। एजेंटिक इंजीनियरिंग में इंसान खुद कोड नहीं लिखता। वह एक सुपरवाइजर की तरह काम करता है और एआई एजेंट्स को निर्देश देता है। ये एआई एजेंट्स खुद से पूरा कोड तैयार करते हैं और काम पूरा करते हैं। क्लाउड ओपस 4.6 जैसे नए और एडवांस एआई मॉडल इस बदलाव को और तेज बना रहे हैं। यानी भविष्य में एआई सिर्फ मददगार ही नहीं बल्कि खुद काम करने वाला 'डिजिटल असिस्टेंट' बन सकता है।

    किसी 'खिलौने' जैसा लगता है टूल

    फिलहाल इस आइडिया के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां हैं जिसकी वजह से यह एक पावरफुल टूल नहीं लगता। सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह अभी शुरुआती बीटा चरण में है। फिलहाल यह फीचर सिर्फ नथिंग फोन 3 पर ही काम करता है और केवल छोटे साइज के विजेट्स (2x2 और 4x2) को सपोर्ट करता है। यानी इसकी क्षमताएं अभी सीमित हैं। हालांकि कंपनी का कहना है कि आने वाले समय में इसमें और फीचर्स जोड़े जाएंगे- जैसे इंटरनेट डाटा का उपयोग, मीडिया लाइब्रेरी का एक्सेस, कैमरा एक्सेस और ब्लूटूथ सपोर्ट। इन अपडेट्स के बाद यह टूल पहले से ज्यादा उपयोगी और मजबूत बन सकता है लेकिन अभी के लिए यह एक शुरुआती प्रयोग जैसा ही लगता है।

    सही प्रॉम्ट मिलने पर ही अच्छे परिणाम

    जहां तक दूसरी चुनौती की बात है, सबसे बड़ी दिक्कत तकनीक नहीं बल्कि इंसान खुद है। कई बार यूजर को साफ तौर पर पता ही नहीं होता कि उसे वास्तव में क्या चाहिए। एआई तभी सही और असरदार नतीजे देता है जब उसे स्पष्ट और सही निर्देश (प्रॉम्ट) मिलें। अगर आप अपनी जरूरत ठीक से समझा नहीं पाए तो परिणाम भी आपकी उम्मीद के मुताबिक नहीं होंगे। वाइब के आधार पर एप बनाना सुनने में अच्छा लगता है लेकिन असली उपयोग के लिए सिर्फ वाइब्स काफी नहीं हैं, साफ सोच और स्पष्ट निर्देश भी उतने ही जरूरी हैं।

    व्हाट्सएप भी ला रहा है प्रीमियम एआई फीचर्स (पेड सब्सक्रिप्शन)

    सिर्फ नथिंग ही नहीं, बल्कि मेटा भी अपने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। खबर है कि जल्द ही व्हाट्सएप एक पेड सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च कर सकता है। इसमें यूजर्स को खास एआई फीचर्स दिए जाएंगे। इस प्लान के तहत यूजर्स एआई की मदद से वीडियो बना सकेंगे और उन्हें अपनी पसंद के हिसाब से रीमिक्स भी कर पाएंगे, जिसे 'वाइब्स वीडियो जेनेरेटर' कहा जा सकता है। इसके अलावा मैनस एआई एजेंट्स जैसे एडवांस टूल्स भी मिल सकते हैं जो बिजनेस और काम से जुड़ी जरूरतों को आसान बनाएंगे। साथ ही कस्टमाइजेशन के लिए नए एप थीम्स, प्रीमियम स्टिकर्स और ज्यादा चैट्स को पिन करने की सुविधा भी दी जा सकती है। यानि आने वाले समय में व्हाट्सएप सिर्फ एक साधारण चैटिंग एप नहीं रहेगा, बल्कि एआई से जुड़ा एक ज्यादा स्मार्ट और पर्सनल प्लेटफॉर्म बन सकता है।

    आने वाले अपडेट्स और नए फीचर्स

    फरवरी के अंत तक आने वाले नथिंग ओएस अपडेट के साथ एप्स बिल्डर और ज्यादा ताकतवर हो जाएगा। इस अपडेट के बाद इसे कैमरा, माइक्रोफोन, ब्लूटूथ, एक्टिविटी रिकग्निशन और सिस्टम वेदर एपीआई जैसे कई अहम फीचर्स का एक्सेस मिल जाएगा। इन सुविधाओं के जुड़ने से यूजर्स पहले की तुलना में ज्यादा एडवांस और अपनी जरूरत के मुताबिक एप्स बना सकेंगे। कंपनी की आगे की योजना भी काफी बड़ी है। नथिंग ने वादा किया है कि यह टूल लगातार बेहतर होता रहेगा। फरवरी अपडेट में एक्टिविटी रिकग्निशन, सेंसर डाटा और वेदर API का सपोर्ट मिलेगा। साल के अंत तक 'रीमिक्सिंग एप्स' जैसा फीचर भी जोड़ा जाएगा, जिससे यूजर पहले से बने एप्स में बदलाव कर सकेंगे। इसके अलावा, भविष्य में इसे कैमरा, माइक्रोफोन, ब्लूटूथ और कॉलिंग जैसी सुविधाओं का पूरा एक्सेस देने की भी तैयारी है। यानि आने वाले अपडेट्स के बाद एप्स बिल्डर सिर्फ छोटे विजेट्स तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि एक ज्यादा उपयोगी और पावरफुल टूल बन सकता है।

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