इस महिला ने बनाया मोबाइल ऐप जो महिलाओं को याद दिलाता है नियमित टीकाकरण

मैं उस दिन क्षेत्र भ्रमण के दौरान एक झुग्गी वाले इलाके में पहुंची थी। अपने काम के दरम्यान मैंने एक छोटे बच्चे की ऐसी मां से बात की, जिसे अपने बेटे की सही उम्र तक याद नहीं थी। मैं दक्षिण-पश्चिमी महाराष्ट्र के पिछड़े इलाकों में नवजात और शिशु स्वास्थ्य विकास कार्यक्रम चलाने वाली एक गैर सरकारी संस्था के लिए काम करती थी। वैसे मेरा ताल्लुक मुंबई से है। मैंने गोवा के प्रतिष्ठित बिट्स पिलानी इंस्टीट्यूट से पढ़ाई की है।
मां द्वारा अपने बच्चे की उम्र याद न रख पाने वाली घटना ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि सरकार और विभिन्न संगठनों द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चलाई जाने वाली तमाम योजनाएं अपने लक्ष्य से कितनी दूर हैं! जिस महिला को अपनी संतान की उम्र तक न पता हो, वह सही समय पर बच्चे को टीका कैसे लगवाएगी? इन सवालों ने मेरे दिमाग में इस बाबत कुछ करने के लिए प्रेरित किया। मैंने तकनीकी शिक्षा हासिल की थी और इसी आधार पर मेरे दिमाग में एक ऐसे मोबाइल ऐप की परिकल्पना ने जन्म लिया, जो इस समस्या के समाधान के करीब थी।
मेरे पास विचार तो था, पर मैं अकेले कोई ऐसा ऐप नहीं बना सकती थी। इसके लिए मैंने मुंबई के मॉगर्न स्टैनलीज दफ्तर से जुड़े ऐप डेवलपर समूह से संपर्क साधा। इसके बाद मैंने पिछले साल के सितंबर में पहली बार अपने ऐप- फौलोऐप को अमली जामा पहनाते हुए इसे मॉगर्न स्टैनलीज से जुड़े अधिकारियों के सामने रखा। सभी लोग इस ऐप के विचार से काफी प्रभावित हुए और इसने कंपनी की सालाना तकनीकी प्रतियोगिता, टेक्नोफीलिया में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इतना सब होने के बावजूद मेरे ऐप की परीक्षा बाकी थी। इसके लिए इस ऐप को पाइलट प्रोजेक्ट के तहत सीमांत महाराष्ट्र के मालवानी इलाके में प्रयोग करने का फैसला किया गया, जो सफल रहा। परियोजना के शुरुआती चरण में ही सौ महिलाओं को ऐप से जोड़ा गया।
यह ऐप लोगों को उनके बच्चे के टीकाकरण के लिए अलार्म की तरह रिमाइंडर देता है। इस रिमाइंडर मैसेज में उन्हें याद दिलाया जाता है कि उन्हें अपने बच्चे को कौन-सा टीका किस दिन लगवाना है। इस ऐप के जरिये परिवार के पंजीकृत मोबाइल पर टीकाकरण की तारीख याद दिलाने के लिए सॉफ्टवेयर की मदद से एक ऑटो जनरेटेड फोन किया जाता है। फोन कॉल में मां और बच्चे, दोनों का नाम लिया जाता है और उनके अगले टीकाकरण के बारे में बताया जाता है।
सॉफ्टवेयर द्वारा जो कॉल की जाती है, उसमें सवाल पूछा जाता है कि उन्होंने टीकाकरण कराया है या नहीं। अगर जवाब हां है, तो एक दबाना होता है और न है तो दो। वहीं, अगर कोई जवाब नहीं मिलता है, तो तीन, पांच और दस दिन बाद फिर से उन्हें इस बारे में याद दिलाने के लिए कॉल की जाती है। यही नहीं, उनकी इस कॉल को रिकॉर्ड भी किया जाता है, ताकि जानकारी देने वालों की प्रतिक्रिया समझी जा सके। और एक खास बात यह है कि इसके लिए किसी स्मार्टफोन की भी अनिवार्यता नहीं है। इसके अलावा भविष्य में इसी तकनीक की मदद से किसी भी इलाके में होने वाले टीकाकरण की प्रतिशतता की सटीक जानकारी भी हासिल की जा सकती है, जोकि सरकार के लिए हमेशा से ही एक बड़ी चुनौती रही है। आज इस ऐप से पांच सौ से अधिक महिलाएं जुड़कर अपने बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य और सुखद भविष्य के प्रति निश्चिंत हैं।