Meta Layoffs: मेटा ने पहले दिया 'वर्क फ्रॉम होम', फिर तड़के सुबह 8 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाला

Suyash Pandey
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीSuyash Pandey
Wed, 20 May 2026 01:39 PM IST
सार

Meta Layoffs:

मेटा ने अपने बड़े वर्कफोर्स रीस्ट्रक्चरिंग अभियान के तहत करीब 8 हजार कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने पहले कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (WFH) करने का निर्देश दिया और उसके बाद तड़के ईमेल भेजकर नौकरी खत्म होने की सूचना दी गई। बताया गया है कि सबसे पहले छंटनी से जुड़े ईमेल सिंगापुर स्थित कर्मचारियों को सुबह लगभग 4 बजे भेजे गए। इसके बाद अलग-अलग टाइम जोन के हिसाब से अन्य क्षेत्रों में भी नोटिफिकेशन भेजे गए।

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Meta Asked Employees To Work From Home Before Laying Off 8,000 Staff In Early Morning Emails
Meta Layoff - फोटो : AI

    विस्तार

    मेटा में एक बार फिर छंटनी का दौर शुरू हो गया है। इस बार कंपनी का तरीका थोड़ा अलग और हैरान करने वाला रहा। कर्मचारियों को पहले घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने का निर्देश मिला और फिर सुबह-सुबह नौकरी जाने के ईमेल आने लगे।

    पहले वर्क फ्रॉम होम का आदेश, फिर अचानक छंटनी का ईमेल

    मेटा में इस बार की छंटनी बेहद शांति और सावधानी के साथ अंजाम दी गई। कंपनी ने अमेरिका और ब्रिटेन समेत दुनिया भर के अपने ऑफिसों में कर्मचारियों को अचानक निर्देश दिया कि वे उस दिन घर से ही काम (वर्क फ्रॉम होम) करें। इस फैसले के पीछे कंपनी का मकसद स्पष्ट था, ऑफिस के गलियारों में किसी भी तरह की हलचल, शोर या विरोध से बचना। जब कर्मचारी घरों में थे, तभी अचानक छंटनी के ईमेल आने शुरू हो गए।

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    मेटा अपनी कुल वर्कफोर्स का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा यानी लगभग 8 हजार कर्मचारियों को बाहर कर रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रक्रिया की शुरुआत सिंगापुर के ऑफिस से हुई। यहां प्रभावित कर्मचारियों को स्थानीय समयानुसार सुबह 4 बजे (भारतीय समयानुसार रात 1:30 बजे) नौकरी से निकाले जाने के ईमेल मिले। अब कंपनी दुनिया भर में अपने अलग-अलग टाइम जोन के हिसाब से इसी तरह से सूचनाएं भेज रही है।

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    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है छंटनी की असली वजह

    मेटा में हो रहे इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य कारण कंपनी की नई प्राथमिकता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) है। पहले लगभग 78 हजार कर्मचारियों वाली इस कंपनी में अब न केवल हजारों लोगों की छंटनी की जा रही है, बल्कि हजारों अन्य कर्मचारियों का रोल भी बदला जा रहा है। मेटा की चीफ पीपल ऑफिसर जेनेल गेल ने एक इंटरनल मेमो के जरिए बताया कि कंपनी का पूरा जोर अब नई एआई-नेटिव टीमों को तैयार करने पर है। इसके तहत 7 हजार कर्मचारियों को इन नई टीमों में शिफ्ट किया जाएगा। वहीं, भर्ती प्रक्रिया को सीमित करते हुए 6 हजार खाली पदों को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है।

    कंपनी का उद्देश्य अब एक फ्लैट और चुस्त ढांचा तैयार करना है, जहां छोटी टीमें तेजी से और अधिक जवाबदेही के साथ काम कर सकें। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट टीमों पर देखने को मिल रहा है। मार्क जुकरबर्ग का पूरा ध्यान अब भविष्य की तकनीक यानी एआई पर है और कंपनी ने इस साल एआई प्रोजेक्ट्स पर 125 से 145 अरब डॉलर तक भारी-भरकम निवेश करने की योजना बनाई है। स्पष्ट है कि मेटा अब कम लोगों और छोटी टीमों के साथ एक बड़ी एआई-संचालित कंपनी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    ऑफिस में कर्मचारी असंतोष और गिरता मनोबल

    छंटनी की खबर पिछले महीने ही लीक हो जाने के कारण मेटा के भीतर का माहौल पहले से ही तनावपूर्ण बना हुआ था। इससे कर्मचारियों का मनोबल तेजी से गिरता गया। स्थिति इतनी असामान्य हो गई थी कि कुछ कर्मचारी डरे हुए थे कि न जाने कब उनकी नौकरी चली जाए। इसके चलते उन्होंने ऑफिस से फ्री स्नैक्स और स्पेयर लैपटॉप चार्जर जैसी चीजें बटोरकर अपने घर ले जानी शुरू कर दी थीं।

    तनाव की यह स्थिति तब और बढ़ गई जब कंपनी के अंदर एक नया विवाद खड़ा हुआ- खबरें आईं कि मेटा अपने एआई सिस्टम को ट्रेन करने के लिए कर्मचारियों के माउस मूवमेंट और कीबोर्ड टाइपिंग तक को ट्रैक कर रही है। इस निजता के उल्लंघन पर कर्मचारियों में भारी गुस्सा था और करीब 1 हजार लोगों ने इसके खिलाफ एक ऑनलाइन पिटीशन पर हस्ताक्षर भी किए। जानकारों का मानना है कि कंपनी का वर्क फ्रॉम होम का निर्देश महज एक औपचारिकता नहीं थी। बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति थी ताकि छंटनी के इस कड़वे दौर को शांति से पूरा किया जा सके और ऑफिस में किसी भी तरह के विरोध या हंगामे की स्थिति पैदा न हो।

    सिर्फ मेटा नहीं, पूरी टेक इंडस्ट्री का है यही हाल

    यह संकट केवल मेटा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरी टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री इसी दौर से गुजर रही है। पिछले कुछ समय में टेक जगत की बड़ी कंपनियों में बड़े पैमाने पर छंटनी का सिलसिला जारी है। हाल ही में सिस्को (Cisco) ने भी अपने 4 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है। वहीं, अप्रैल महीने में ओरेकल (Oracle) ने भी बिल्कुल मेटा की तर्ज पर ही सुबह-सुबह ईमेल भेजकर एक साथ करीब 20 हजार से 30 हजार कर्मचारियों की छंटनी की थी। इन दिग्गज कंपनियों के अलावा माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और डिज्नी जैसी बड़ी कंपनियां भी अपने यहां छंटनी की घोषणाएं कर चुकी हैं। इससे पूरी टेक इंडस्ट्री में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

    एक्सपर्ट की राय: 'सिर्फ कोडिंग से अब काम नहीं चलेगा'

    टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेक इंडस्ट्री में जो उथल-पुथल हम देख रहे हैं, वह कोई अस्थायी मंदी नहीं बल्कि एक बड़ा ढांचागत बदलाव है। उन्होंने बताया कि एआई अब रूटीन कोडिंग, कस्टमर सपोर्ट और डेटा मैनेजमेंट जैसे कामों को इतनी कुशलता से करने लगा है कि कंपनियों को अब भारी-भरकम वर्कफोर्स की जरूरत नहीं रह गई है।

    एक्सपर्ट्स के अनुसार, भविष्य में केवल उन्हीं टेक प्रोफेशनल्स की नौकरी सुरक्षित रहेगी जो एआई सिस्टम्स को न केवल इस्तेमाल करना, बल्कि उन्हें डिजाइन और मैनेज करना जानते हैं। यह वक्त की मांग है कि अब कर्मचारी खुद को केवल सिस्टम ऑपरेटर तक सीमित न रखें, बल्कि एक सिस्टम आर्किटेक्ट के रूप में अपनी भूमिका बदलें। संक्षेप में कहें तो अब आपको सिर्फ सिस्टम चलाने वाला नहीं, बल्कि सिस्टम बनाने वाला बनना होगा।

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