गूगल ने अपने प्ले-स्टोर से हटाया यह लोकप्रिय गेमिंग एप, लगा था बड़ा आरोप

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Sat, 27 May 2023 01:30 PM IST
सार

Google ने अपने प्ले-स्टोर से गेमिंग एप Slavery Simulator को हटा दिया है। यह गेमिंग एप खिलाड़ियों को ब्राजील में नस्लवाद को बढ़ावा दे रहा था। एप पर वर्चुअल ब्लैक गुलामों को खरीदने, बेचने और प्रताड़ित करने की अनुमति देता था

विज्ञापन
Google Removes Slavery Simulator Game app From Play Store After Racism Outcry in Brazil
Slavery Simulator - फोटो : PLAY STORE

    विस्तार

    Google ने अपने प्ले-स्टोर से गेमिंग एप Slavery Simulator को हटा दिया है। यह गेमिंग एप खिलाड़ियों को ब्राजील में नस्लवाद को बढ़ावा दे रहा था। एप पर वर्चुअल ब्लैक गुलामों को खरीदने, बेचने और प्रताड़ित करने की अनुमति देता था। इस एप को लेकर कई महीनों से बवाल चल रहा था। अपने नाम स्लेवरी सिमुलेटर के अनुसार ही यह गेम पुर्तगाली भाषा के खेल में खिलाड़ियों को गुलामों के तौर पर प्रस्तुत किया और पैसे बनाए।

    ब्राजील की जांच एजेंसी ने इस गेम के खिलाफ विस्तार से जांच शुरू की है। इस एप को सैकड़ों लोगों ने डाउनलोड किया था। यहां हैरान करने वाली बात यह है कि गूगल प्ले-स्टोर पर इस एप के डिस्क्रिप्शन में लिखा था कि यह किसी भी प्रकार की दासता का विरोध करता है और इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन है।

    विज्ञापन

    एप को प्ले-स्टोर से हटाने के बाद गूगल ने अपने एक बयान में कहा है कि यह एप किसी खास समुदाय के लोगों के खिलाफ नफरत और हिंसा को बढ़ावा दे रहा था। यह एप नस्लवाद को भी बढ़ावा दे रहा था और लोगों के रंग का मजाक उड़ा रहा था। गूगल ने अन्य लोगों से भी नफरत वाले कंटेंट के खिलाफ शिकायत करने की अपील की है।

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    ब्राजील के नस्लीय समानता मंत्रालय ने कहा कि उसने Google को "घृणित भाषण, असहिष्णुता और नस्लवाद वाली सामग्री को फिल्टर करने के लिए और बिना संयम के इसे इतनी आसानी से फैलने से रोकने के लिए उपाय करने के लिए कहा था। आपको बता दें कि 1888 में गुलामी को खत्म करने वाले अमेरिका के अंतिम देश ब्राजील में जातिवाद अभी भी एक समस्या है। 56 प्रतिशत से अधिक आबादी एफ्रो-ब्राजील की है।

    रियो डी जनेरियो में एक वामपंथी क्षेत्रीय विधायक रेनाटा सूजा ने कहा, "ब्राजील उन देशों में से एक है जहां Google के प्लेटफॉर्म पर सबसे अधिक उपभोक्ता हैं और वहां जब कोई इस तरह का एप आता है तो लोगों के गुलामी के काले दिन याद आ जाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह न केवल नस्लवाद है, बल्कि फासीवाद भी है।

    और पढ़ें...
    Login or Signup
    अपना शहर चुनें