कोरोना वायरस को ट्रैक करने के लिए दुनिया में कौन-कौन से एप का हो रहा इस्तेमाल?
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दुनिया के 200 से अधिक देश इस वक्त कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहे हैं। सभी देश अपने-अपने तरीके से कोरोना को कंट्रोल भी कर रहे हैं। कोरोना के संक्रमण को रोकने में टेक्नोलॉजी का पूरी दुनिया में खूब इस्तेमाल हो रहा है। कोरोना के संक्रमण का पता लगाने में मोबाइल एप काफी मदद कर रहे हैं। भारत सरकार भी आरोग्य सेतु जैसे एप का इस्तेमाल कर रही है। आइए जानते हैं अन्य देश कोरोना के संक्रमण को ट्रैक करने के लिए कौन-कौन से मोबाइल एप का इस्तेमाल कर रहे हैं।
- ऑस्ट्रेलिया-ऑस्ट्रेलिया में कोरोना संक्रमितों को ट्रैक करने के लिए COVIDSafe एप का इस्तेमाल हो रहा है। कोविडसेफ एक ब्लूटूथ आधारित एप है जो ब्लूटूथ के सिग्नल पर काम करता है। संक्रमित व्यक्ति के 1.5 मीटर की रेंज में आने वाले सभी लोगों को ट्रैक किया जाता है।
- चीन-चीन कोरोना संक्रमितों को ट्रैक करने के लिए क्यूआर कोड का इस्तेमाल करता है। क्यूआर कोड के जरिए लोगों की ट्रैवल हिस्ट्री और स्वास्थ्य की हालत के बारे में जानकारी जुटाई जाती है। क्यूआर कोड को बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर स्कैन करना होता। इसके अलावा चीन में किसी ऑफिस में जाने से पहले भी क्यूआर कोड को स्कैन करना होता है। क्यूआर कोड में अलग-अलग कलर के साथ लोगों की सेहत को लेकर जानकारी दी गई है। क्यूआर कोड स्कैन पर यदि ग्रीन सिग्नल आता है तो उसके बाद ही आपको कहीं बाहर जाने की इजाजत मिलेगी। यह क्यूआर कोड एक एप से कनेक्ट होता है।
- दक्षिण कोरिया-दक्षिण कोरिया दुनिया का पहला देश है जिसने कोरोना से निपटने के लिए सबसे पहले टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया। दक्षिण कोरिया को इसका फायदा भी मिला। दक्षिण कोरिया की रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (KCDC) ने COVID-19 स्मार्ट प्रबंधन प्रणाली (एसएमएस) तैयार किया है जो कि एक मोबाइल एप के जरिए कंट्रोल होता है। इसके अलावा क्वारंटीन किए गए लोगों पर नजर रखने के लिए दक्षिण कोरिया स्मार्ट रिस्टबैंड का भी इस्तेमाल कर रहा है।
- भारत-भारत सरकार ने आरोग्य सेतु एप को लॉन्च किया है जिसके जरिए लोगों को कोरोना के बारे में जानकारी दी जा रही है। आरोग्य सेतु एप कोरोना संक्रमित इलाके में जाने पर अलर्ट करता है। आरोग्य सेतु एप को अभी तक 7.5 करोड़ से अधिक लोगों ने डाउनलोड कर लिया है। आरोग्य सेतु एप 11 भाषाओं में उपलब्ध है। आरोग्य सेतु एप की कार्यप्रणाली उदाहरण सहित समझने के लिए यहां क्लिक करें।
- जर्मनी-जर्मनी की सरकार ने एक प्रोजेक्ट की मदद ली है जिसका नतीजा अखिल यूरोपीय प्राइवेसी प्रोटेक्टिंग प्रोक्सिमिटी ट्रेसिंग के रूप में सामने आया। इस प्रोजेक्ट में 130 विशेषज्ञ शामिल थे जिन्होंने सुझाव दिए थे कि एक ऐसा एप बने जो ब्लूटूथ की मदद से लोकेशन को सेव किए बिना कोरोना संक्रमण की जानकारी दे सके, लेकिन इसी बीत प्राइवेसी को लेकर विवाद छिड़ गया। दुनियाभर के 280 रिसर्चरों ने एक खुले पत्र में चेतावनी दी है कि इसके जरिए सरकार पूरे इलाके की निगरानी कर सकती है। उन्होंने सुझाव दिए थे कि डाटा को केंद्रीय रूप से सेव न कर अलग अलग जगहों पर सेव करना चाहिए। इसके बाद जर्मनी में एपल और गूगल की मदद ली गई है जिसके बाद यूजर्स का डाटा उसके फोन में ही सेव किया जा रहा और उसके बाद सरकार को अपडेट दिया जा रहा है।
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