14 साल के छात्र ने बनाई मछुआरों के लिए खास ऐप, गूगल ने अवार्ड से नवाजा

पाकिस्तान, ढाका और श्रीलंका ने एक साल में 900 से अधिक मछुआरों को उनकी नावों के साथ गिरफ्तार कर लिया, क्योंकि वे मछली पकड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमाओं को पार कर गए। वे तब तक बंदी बन रहे जब तक भारत सरकार ने उनकी रिहाई की प्रक्रिया शुरू की या जेल सजा पूरी हुई। उनके परिवारों को बड़ी मुसीबत झेलनी पड़ी क्योंकि वे मुख्य रोजी अर्जक हैं। लेकिन एक 14 साल के भारतीय लड़के इस संकट का हल खोज निकला है।
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक चेन्नई में नेशनल पब्लिक स्कूल में 10वीं कक्षा के एक छात्र रमेश अद्वय ने स्मार्टफोन के लिए एक ऐसी एप्लिकेशन तैयार की है, जो मछुआरों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है। यह ऐप अंतरराष्ट्रीय समुदी सीमा पार करने पर मछुआरों को चेतावनी देगी।
इसको FELT नाम दिया गया है। FELT यानी FishErmen Lifeline Terminal मछुआरों के लिए लाइफलाइन टर्मिनल। यह ऐप मछुआरों को उनके मार्ग नक्शा स्थानों के साथ-साथ जगह के मौसम के बारे जानकारी देती है।
गूगल ने दिए 33.57 लाख रुपये

यह ऐप जान बचाने और मछुआरों की उत्पादकता बढ़ाने का काम करती है। इसके लिए रमेश ने प्रतिष्ठित एशिया का गूगल कम्युनिटी इम्पैक्ट अवार्ड जीता है। गूगल की तरफ से 50,000 डॉलर (करीब 33.57 लाख रुपये) के स्कॉलरशिप के लिए रमेश को अंतिम 20 डेवलपर्स में शामिल किया गया है।
फिशरमेन लाइफलाइन टर्मिनल (एफईएलटी) भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम से मिलने वाले सिगल के बिना काम करता है। यह हाथ में रखने वाला टर्मिनल है जो स्टैंडर्ड पोजिशन सर्विसेज (एसपीएस) का इस्तेमाल करता है।