Meta Smart Glass: चश्मा चेहरा देखकर बता देगा कौन हैं आप, मेटा ने नए स्मार्टग्लास पर क्यों उठ रहे सवाल?
Meta Smart Glass Privacy Concerns:
करीब पांच साल पहले फेसबुक से हटाई गई फेस रिकग्निशन तकनीक अब मेटा (Meta) के स्मार्ट ग्लासेस में वापसी कर सकती है। इस स्मार्ट ग्लास को पहनने वाला यूजर सामने खड़े व्यक्ति की पहचान और जानकारी हासिल कर सकेगा। हालांकि, इससे प्राइवेसी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

विस्तार
मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा (फेसबुक) अपने वियरेबल डिवाइसेस को बाजार में सबसे अलग बनाने की होड़ में है। खबर है कि कंपनी एक सीक्रेट प्रोजेक्ट 'नेम टैग' पर काम कर रही है। इसके तहत स्मार्ट ग्लासेस में लगे एआई असिस्टेंट के जरिए सामने वाले व्यक्ति की पहचान की जा सकेगी और उसके बारे में जानकारी जुटाई जा सकेगी। माना जा रहा है कि यह फीचर इसी साल के अंत तक लॉन्च हो सकता है।
बाजार में बढ़त और जुकरबर्ग का विजन
मेटा इस फीचर के जरिए अपने चश्मों को प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के एआई उत्पादों से कहीं आगे ले जाना चाहता है। कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग का मानना है कि चेहरा पहचानने की क्षमता एआई असिस्टेंट को और अधिक व्यावहारिक और उपयोगी बनाएगी। हालांकि, कंपनी के भीतर इस पर काफी मंथन चल रहा है कि इसे जिम्मेदारी के साथ कैसे पेश किया जाए। एक आंतरिक मेमो के अनुसार, अमेरिका के मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए मेटा इसे लॉन्च करने का सही मौका मान रहा है।
प्राइवेसी को लेकर उठ रहे सवाल
भले ही यह फीचर सुनने में जादुई लगे, लेकिन 'अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन' (ACLU) जैसे संगठन इसे लेकर डरे हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कों पर घूमते हुए लोगों को पल भर में पहचान लेना हमारी उस गुमनामी को खत्म कर देगा जिस पर हम सभी भरोसा करते हैं। इस तकनीक का इस्तेमाल सरकारें, कॉर्पोरेट या कोई भी आम व्यक्ति गलत इरादे से कर सकता है।
प्राइवेसी अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था 'अमेरिकन सिविल लिबर्टिज यूनियन' के वकील नाथन फ्रीड वेस्लर ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक जगहों पर फेस रिकग्निशन तकनीक लोगों की पहचान की आजादी के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
आलोचकों का कहना है कि सरकारें, कंपनियां या आम लोग भी इसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी वजह से अमेरिका के कुछ शहरों और राज्यों में इस तकनीक पर पाबंदियां लगाई जा चुकी हैं। हाल ही में डेमोक्रेटिक सांसदों ने इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट से सार्वजनिक जगहों पर फेस रिकग्निशन का उपयोग रोकने की मांग की है।
‘सुपर सेंसिंग’ ग्लासेस पर भी काम
मेटा का तर्क है कि यह तकनीक दृष्टिबाधित लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं होगी। बी माई आइज जैसी संस्थाओं का मानना है कि यह फीचर उन लोगों की जिंदगी बदल सकता है जिन्हें दुनिया को देखने में दिक्कत होती है। मेटा इसके अलावा सुपर सेंसिंग ग्लासेस पर भी काम कर रहा है जो लगातार आसपास की निगरानी करेंगे और यूजर को जरूरी काम याद दिलाएंगे।
पहले भी हुआ था विवाद
2024 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के दो छात्रों ने एक कमर्शियल फेस रिकग्निशन टूल को Ray-Ban Meta ग्लासेस के साथ जोड़कर बोस्टन सबवे में अजनबियों की पहचान कर ली थी। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था और प्राइवेसी को लेकर नई बहस छिड़ गई थी। Meta का कहना है कि उसके ग्लासेस में रिकॉर्डिंग के दौरान LED लाइट जलती है, ताकि लोगों को पता रहे कि कैमरा सक्रिय है।
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