विस्तार से: ड्रोन हमले से निपटने के लिए भारत कितना है तैयार, दुश्मन को नाकाम करने के लिए क्या है इंतजाम

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Wed, 30 Jun 2021 07:01 PM IST
सार

आखिर इन संदिग्ध ड्रोन को पहले डिटेक्ट क्यों नहीं किया जा रहा है, क्या भारत के पास ऐसे ड्रोन को हमले से पहले डिटेक्ट करने की कोई तकनीक है, कौन-कौन से ड्रोन हैं जो राडार से बच सकते हैं। आइए इन सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं...

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India needs drone detection systems how anti dron works and how it is safe from radar
ड्रोन्स का बढ़ता उपयोग - फोटो : iStock

    विस्तार

    सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन की गतिविधियां बढ़ गई हैं। पिछले कुछ दिनों में भारतीय सेना ने कई ड्रोन मार गिराए हैं तो ड्रोन को जब्त भी किया गया है। भारत में कुछ साल पहले तक आम आदमी को ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं थी लेकिन भारत सरकार ने अब इसकी इजाजत दे दी है। अब यही ड्रोन देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनने लगे हैं।

    हाल ही में जम्मू-कश्मीर में ड्रोन के जरिए ही आतंकवादी हमले को अंजाम दिया गया है जिसके बाद भारत सरकार काउंटर ड्रोन पॉलिसी बनाने पर विचार करने लगी है। जम्मू एयरबेस पर हुए ड्रोन अटैक में एयरफोर्स के 2 जवानों को हल्की चोटें आई और एक बिल्डिंग को भी नुकसान पहुंचा है। इसके हमले के बाद कई अन्य इलाकों में भी संदिग्ध ड्रोन देखे गए हैं।

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    ऐसे में एक बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इन संदिग्ध ड्रोन को पहले डिटेक्ट क्यों नहीं किया जा रहा है, क्या भारत के पास ऐसे ड्रोन को हमले से पहले डिटेक्ट करने की कोई तकनीक है, कौन-कौन से ड्रोन हैं जो राडार से बच सकते हैं। आइए इन सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं...

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    DRDO तैयार कर रहा काउंटर ड्रोन

    DRDO ने आधिकारिक तौर पर तो इसकी पुष्टि नहीं की है लेकिन कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन काउंटर ड्रोन टेक्नोलॉजी विकसित कर ली है जो दुश्मन के किसी भी ड्रोन को डिटेक्ट करने और उसे नष्ट करने में सक्षम है। काउंटर ड्रोन को एंटी ड्रोन डिवाइस भी कहा जा रहा है जो लेजर आधारित डिटेक्शन तकनीक से लैस है।

    यह पहला मौका नहीं है जब DRDO ने एंटी ड्रोन पर काम कर रहा है। लंबे समय से स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर सुरक्षा के लिए ऐसे ड्रोन का इस्तेमाल हो रहा है जिसे DRDO ने ही तैयार किया है। एंट्री डोन, छोटे ड्रोन को तीन किलोमीटर की दूरी से ही डिटेक्ट करने में सक्षम हैं। इसके अलावा ये 1-2.5 किलोमीटर के दायरे में मार करने में भी सक्षम हैं।

    एंटी ड्रोन की खासियत

    एंटी ड्रोन को खासतौर पर अन्य ड्रोन की पहचान करने और उन्हें डिटेक्ट करने के लिए डिजाइन किया जाता है। एंटी ड्रोन पूरी तरह से मानव रहित होते हैं। ऐसे ड्रोन में राडार इनबिल्ट होता है और इनकी अधिकतम स्पीड 440 किलोमीटर प्रति घंट तक होती है। इनमें इनबिल्ट बैटरी है जिसकी मदद से एक बार चार्ज करने के बाद ये ड्रोन 4-5 दिनों तक उड़ान भर सकते हैं।

    एंटी ड्रोन 55 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकतेहैं और पड़ोसी देशों के सैटेलाइट को जाम भी कर सकते हैं। ऐसे ड्रोन के कैमरे की क्वॉलिटी बेहतरीन होती है। ऐसे ड्रोन खुद ही नष्ट होने में सक्षम हैं यानी पकड़े जाने पर भी दुश्मन देश को डाटा नहीं मिलेगा।

    क्या होते हैं ड्रोन, कहां-कहां होता है इस्तेमाल

    ड्रोन को अनमेन्ड एरियल व्हीकल (UAV) यानी मानववरहित विमान भी कहा जाता है। ये एक तरह से आसमान उड़ते हुए रोबोट की तरह होते हैं। ड्रोन का इस्तेमाल फिल्म शूटिंग से लेकर सामान की डिलीवरी और निगरानी तक के काम में होता है। रेस्क्यू ऑपरेशन में ये काफी मददगार साबित होते हैं। साइज छोटी होने की वजह से सैनिक गतिविधियों में इनका इस्तेमाल आजकल अधिक होने लगा है। ड्रोन का इस्तेमाल किटनाशक का छिड़काव करने में भी होता है।

    ड्रोन हमले को रोकने के लिए भारत के पास क्या इंतजाम है

    अमेरिका और रूस की तरह के भारत के पास भी ड्रोन हमले को रोकने के लिए कई इंतजाम हैं। देश के करीब हर बड़े एयरबेस, मिलिट्री बेस और इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर AVIAN रडार टेक्नोलॉजी है जो कि करीब 10-15 किलोमीटर के दायरे में उड़ रही किसी भी वस्तु को डिटेक्ट कर सकती है, हालांकि AVIAN रडार जैसी टेक्नोलॉजी काफी महंगी होती है, ऐसे में इसका इस्तेमाल तमाम छोटी-बड़ी जगहों पर मुश्किल है।

    कितने प्रकार के होते हैं ड्रोन

    नैनो ड्रोन: ऐसे ड्रोन जिनका वजन 250 ग्राम तक होता है।माइक्रो ड्रोन: इन ड्रोन का वजन 250 ग्राम से अधिक लेकिन 2 किलो ग्राम से कम होता है।स्मॉल ड्रोन: वे ड्रोन जिनका वजन 2 ग्राम किलो से अधिक लेकिन 25 किलो ग्राम से कम होता है।मीडियम ड्रोन: वे ड्रोन जिनका वजन 25 किलो ग्राम से अधिक लेकिन 150 किलो ग्राम से कम होता है।लार्ज ड्रोन: वे ड्रोन जिनका वजन 150 किलो ग्राम से अधिक होता है।

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