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भारत के पहले टेनिस स्टार विजय अमृतराज को दें जन्मदिन की बधाई
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 14 Dec 2012 12:10 AM IST
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भारत में टेनिस का इतिहास बहुत पुराना नहीं है। 1970 के दशक में विजय अमृत राज के आने के बाद ही भारत को टेनिस में पहचान मिली। पूर्व टेनिस खिलाड़ी विजय अमृत राज आज (14 दिसंबर) 59 साल के हो गए। रमेश कृष्णन की विरासत को विजय अमृत राज नई बुलंदियों पर लेकर गए। 1973 में विंबल्डन के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाकर विजय अमृतराज ने अपने खेल का सबको दीवाना बना दिया। हालांकि इस अहम मुकाबले में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था।
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14 दिसंबर 1953 को चेन्नई में जन्में विजय विश्व टेनिस में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले खिलाड़ी हैं। 1973 में वह विंबलडन और यू.एस. ओपन के क्वॉर्टर फाइनल तक पहुंचे, जहां उन्हें यान कोडेस और केन रोजवैल जैसे दिग्गज ही हरा सके। 1976 के विंबलडन में विजय और आनंद सेमीफाइनल तक पहुंचे थे।
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1981 के विंबलडन में क्वॉर्टर फाइनल में उन्हें पांच सेटों तक चले मैच में जिमी कॉनर्स से मात खानी पड़ी। फाइव सैटर्स खेलना विजय की खासियत थी। वे नैसर्गिक रूप से ग्रासकोर्ट प्लेयर थे और सर्व ऐंड वॉली पर ज्यादा निर्भर रहते थे। विश्व के सबसे अच्छे खिलाड़ियों से उनका लगातार हारना केवल स्टेमिना की कमी के कारण होता था, जो कि ज्यादातर भारतीय टेनिस खिलाड़ियों की समस्या रही है।
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1979 के विंबलडन में जब ब्योन बोर्ग अपने खेल की बुलंदी पर थे। दूसरे राउंड में विजय का उनसे सामना हुआ। विजय ने बोर्ग को छकाते हुए पहला सेट 6-2 से जीता। बोर्ग ने दूसरा सेट 6-4 से जीता। सबको हैरत में डालते हुए विजय ने पिछले चैंपियन को न सिर्फ तीसरे सेट में 6-4 से हराया चौथे में 4-1 से लीड ले ली। पराजय के सामने खडे़ बोर्ग ने केवल बेहतर स्टैमिना की बदौलत सैट और मैच बचा लिया। कोई हैरानी नहीं कि ऐसे मैच देखते हुए ही टेनिस की दुनिया विजय को करो या मरो शैली वाले खिलाड़ी के तौर पर जानती थी।