लियोनल मेसी को दुनिया उनके गोल, ड्रिब्लिंग, रिकॉर्ड और ट्रॉफियों के लिए जानती है। 2022 में अर्जेंटीना को विश्व कप जिताने वाले मेसी अब अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से भी विदा ले चुके हैं। 31 अगस्त 2026 को उन्होंने अर्जेंटीना के साथ अपने ऐतिहासिक सफर को खत्म करने का एलान किया, लेकिन मेसी की कहानी सिर्फ मैदान पर किए गए कमाल तक सीमित नहीं है। उनके बचपन, परिवार, दोस्तों और शुरुआती करियर से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं, जो बताते हैं कि दुनिया का महानतम फुटबॉलर बनने से पहले मेसी एक बेहद शांत, शर्मीला और परिवार से गहराई से जुड़ा बच्चा था।
मेसी के गोल-रिकॉर्ड तो सब जानते हैं: लेकिन उनकी जिंदगी के ये पांच अनसुने किस्सों का नहीं होगा पता; यहां पढ़ें
लियोनल मेसी को दुनिया उनके गोल, रिकॉर्ड और ट्रॉफियों के लिए जानती है, लेकिन उनके महान करियर के पीछे कई ऐसे किस्से हैं जो कम चर्चा में रहे। बचपन में दादी सेलिया का साथ, ला मासिया में बेहद शर्मीला स्वभाव, पिता जॉर्ज की अहम भूमिका और आर्सेनल से जुड़ा दिलचस्प अध्याय, मेसी की जिंदगी के ये पहलू उनके स्टारडम से बिल्कुल अलग कहानी बताते हैं।
1. हर गोल के बाद आसमान की तरफ क्यों देखते हैं मेसी?
मेसी के गोल सेलिब्रेशन की सबसे पहचान वाली तस्वीर है, दोनों हाथों की अंगुलियां आसमान की तरफ उठाना। दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसक इस इशारे को देख चुके हैं, लेकिन इसके पीछे की कहानी शायद हर कोई नहीं जानता। यह इशारा उनकी नानी सेलिया ओलिवेरा कुक्कितिनी की याद में है। मेसी के फुटबॉल करियर की शुरुआती राह में सेलिया की भूमिका बेहद खास थी। जब वह छोटे थे, तब वह उन्हें स्थानीय क्लब ग्रांडोली के मैदान तक लेकर जाती थीं। उस समय मेसी अपनी उम्र के दूसरे बच्चों की तुलना में काफी छोटे थे और शुरुआती दौर में उनके आकार को लेकर सवाल उठते थे, लेकिन सेलिया को अपने नाती की प्रतिभा पर पूरा भरोसा था।
रिपोर्टों के मुताबिक, सेलिया ही वह शख्स थीं जिन्होंने छोटे मेसी को मैदान पर मौका दिलाने के लिए जोर दिया था। बाद में जब उनका निधन हुआ, तब मेसी सिर्फ करीब 10 साल के थे। यही कारण है कि उनके गोल के बाद आसमान की ओर उठती अंगुलियां सिर्फ एक सेलिब्रेशन नहीं, बल्कि बचपन के उस रिश्ते को याद करने का तरीका हैं। मेसी की महानता के पीछे जिस शख्स का शुरुआती दौर में सबसे बड़ा भावनात्मक असर रहा, वह उनकी नानी थीं।
2. ला मासिया में साथी खिलाड़ी समझते थे कि मेसी बोल नहीं सकते!
आज मैदान पर मेसी की मौजूदगी ही काफी होती है। लेकिन कभी ऐसा भी समय था जब वह इतने शांत रहते थे कि उनके साथी खिलाड़ी उन्हें लेकर एक अजीब धारणा बना बैठे थे। 13 साल की उम्र में मेसी अर्जेंटीना के रोसारियो से बार्सिलोना की मशहूर ला मासिया अकादमी पहुंचे। नया देश, नई भाषा, नया माहौल और परिवार से दूरी, इन सबने उन्हें बेहद संकोची बना दिया था। मेसी के बचपन के साथी और बाद में दुनिया के बड़े खिलाड़ियों में शामिल हुए सेस्क फाब्रेगास ने वर्षों बाद बताया कि ला मासिया में शुरुआती दिनों में साथी खिलाड़ियों को लगता था कि मेसी शायद बोलते ही नहीं हैं। मेसी ने खुद भी इस किस्से का जिक्र किया था।
दिलचस्प बात यह थी कि ड्रेसिंग रूम में जितना शांत यह लड़का था, मैदान पर गेंद मिलते ही उतना ही खतरनाक हो जाता था। जेरार्ड पिके और फाब्रेगास जैसे खिलाड़ी उसी युवा टीम का हिस्सा थे। वहां मेसी की पहचान धीरे-धीरे उनकी आवाज से नहीं, बल्कि उनके पैरों से बनने लगी। यानी जिस खिलाड़ी को साथी मौन समझते थे, कुछ ही समय बाद वही गेंद के साथ सबसे ज्यादा बोलने लगा।
मेसी की कहानी में उनके पिता जॉर्ज मेसी का नाम शुरुआत से जुड़ा रहा है। जॉर्ज सिर्फ उनके पिता नहीं थे, बल्कि लंबे समय तक उनके करियर के सबसे महत्वपूर्ण सलाहकार और प्रतिनिधि भी रहे। जब मेसी छोटे थे और उनके सामने ग्रोथ हार्मोन की कमी से जुड़ी चुनौती आई, तब परिवार के सामने महंगे इलाज का सवाल था। यही वह समय था जब मेसी के फुटबॉल भविष्य को लेकर कई अनिश्चितताएं थीं। जॉर्ज ने बेटे के करियर को आगे बढ़ाने के लिए लगातार रास्ते तलाशे। उन्होंने मेसी के खेल के वीडियो तैयार करवाए और उन्हें अलग-अलग क्लबों तक पहुंचाया।
बाद में 2000 में मेसी के बार्सिलोना जाने पर जॉर्ज उनके साथ स्पेन पहुंचे। एक किशोर के लिए दूसरे देश में नई जिंदगी शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन जॉर्ज उनके साथ रहे। आठ अगस्त 2026 को जॉर्ज मेसी का 68 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन के बाद अर्जेंटीना फुटबॉल और बार्सिलोना समेत पूरी फुटबॉल दुनिया ने श्रद्धांजलि दी। और यह भी दिलचस्प है कि मेसी ने अपने अंतरराष्ट्रीय संन्यास का संदेश विश्व कप फाइनल के दो दिन बाद, 21 जुलाई को ही लिख लिया था। लेकिन पिता के निधन के बाद उन्होंने इसे और मजबूती से महसूस किया और आखिरकार 31 अगस्त को दुनिया के सामने अपना फैसला रखा।
आज यह कल्पना करना मुश्किल है कि मेसी बार्सिलोना के अलावा किसी और क्लब की जर्सी में नजर आ सकते थे। लेकिन उनके शुरुआती करियर में आर्सेनल ने उन्हें साइन करने की कोशिश की थी। आर्सेन वेंगर के नेतृत्व वाला आर्सेनल उस समय युवा प्रतिभाओं पर खास नजर रखता था। मेसी बार्सिलोना की ला मासिया में तेजी से अपनी पहचान बना रहे थे और आर्सेनल उन्हें इंग्लैंड लाने में दिलचस्पी रखता था।
वेंगर ने बाद में खुद बताया था कि आर्सेनल ने मेसी को हासिल करने की कोशिश की थी। उस समय मेसी की उम्र करीब 15-16 साल थी। हालांकि यह डील आगे नहीं बढ़ सकी और वह बार्सिलोना में ही बने रहे। आर्सेनल के साथ जाने का मतलब होता एक बिल्कुल अलग करियर। लेकिन मेसी ने बार्सिलोना में रहकर वह इतिहास रचा, जिसने उन्हें क्लब के सबसे महान खिलाड़ियों में शामिल कर दिया।