फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Sports ›   Preethi Pal Wins Bronze Medal at Paris Paralympics 2024 Know About Her Life Story

प्रीति पाल की कहानी: शारीरिक और आर्थिक समस्याओं से जूझने के बावजूद नहीं मानी हार, अब पेरिस में लहराया तिरंगा

Fri, 30 Aug 2024 06:52 PM IST
Mayank Tripathi स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: Mayank Tripathi Updated Fri, 30 Aug 2024 06:52 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में जन्मीं प्रीति किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। जन्म के छह दिन बाद ही उनके शरीर के निचले हिस्से पर प्लास्टर बांधना पड़ा था। कमजोर और असामान्य पैर की स्थिति के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

विज्ञापन
Preethi Pal Wins Bronze Medal at Paris Paralympics 2024 Know About Her Life Story
प्रीति पाल - फोटो : @India_AllSports

विस्तार

पेरिस पैरालंपिक का दूसरा दिन भारत के लिए शानदार रहा। भारतीय एथलीट्स ने कुल चार पदक अपने नाम किए। इनमें एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य शामिल हैं। प्रीति पाल ने ट्रैक और फील्ड में भारत के लिए पहला पदक जीतकर इतिहास रच दिया। यह इन खेलों में ट्रैक इवेंट में पहला पदक है। प्रीति के लिए इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं रहा। उन्होंने छह साल पहले सोशल मीडिया पर पैरालंपिक खेलों की वीडियो देखकर दौड़ना शुरू किया था। आज उनकी मेहनत रंग लाई है।
विज्ञापन

जन्म के छह दिन बाद हुई दिक्कत
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में जन्मीं प्रीति किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। जन्म के छह दिन बाद ही उनके शरीर के निचले हिस्से पर प्लास्टर बांधना पड़ा था। कमजोर और असामान्य पैर की स्थिति के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई सालों तक इलाज के बाद भी कुछ खास असर नहीं पड़ा। प्रीति को पांच साल की उम्र में कैलिपर पहनना पड़ा जिसका आठ सालों तक उन्होंने उपयोग किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ लोगों ने उनके चलने पर शंका जताई लेकिन प्रीति ने कभी हार नहीं मानी और संघर्षों के साथ यहां तक पहुंची।
विज्ञापन
विज्ञापन

सोशल मीडिया ने बदला जीवन
प्रीति का जीवन जीने के नजरिया तब बदला जब उन्होंने 17 की उम्र में सोशल मीडिया पर पैरालंपिक खेलों की वीडियो देखीं। इनसे प्रेरित होकर उन्हें अहसास हुआ कि वह भी अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं। छोटी उम्र में उन्होंने स्टेडियम में अभ्यास करना शुरू किया। हालांकि, आर्थिक तंगी के कारण उन्हें आने-जाने में काफी संघर्ष करना पड़ा था। उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उनकी मुलाकात पैरालंपिक एथलीट फातिमा खातून से हुई। वो फातिमा ही थीं जिन्होंने प्रीति को पैरा एथलेटिक्स से परिचित कराया। फातिमा के समर्थन से, प्रीति ने 2018 में स्टेट पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लिया। इसके अलावा उन्होंने कई राष्ट्रीय स्पर्धाओं में भी भाग लिया। उनके प्रयासों का फल तब मिला जब उन्होंने 100 मीटर और 200 मीटर दोनों स्प्रिंट में चौथा स्थान हासिल करते हुए एशियाई पैरा खेलों 2022 के लिए क्वालिफाई किया।
विज्ञापन

पेरिस में जीता अपना पहला पैरालंपिक पदक
प्रीति भले ही एशियन पैरा खेलों में कोई पदक नहीं जीत पाईं लेकिन वह पैरालंपिक खेलों के लिए खुद को प्रोत्साहित करती रहीं। वह कोच गजेन्द्र सिंह से प्रशिक्षण लेने के लिए दिल्ली चली गईं जहां उन्होंने अपनी दौड़ने की तकनीक को निखारने और अपने प्रदर्शन में महत्वपूर्ण सुधार करने पर ध्यान केंद्रित किया। प्रीति की मेहनत का फल उन्हें 2024 में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए चयनित होने पर मिला जहां उन्होंने पेरिस में अपना पहला पैरालंपिक पदक हासिल करने से पहले 100 मीटर और 200 मीटर दोनों स्पर्धाओं में कांस्य पदक जीते।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed