CWG: 32 साल बाद कश्यप ने दिलाया गोल्ड
भारत के शीर्ष पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी पी कश्यप का कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाने का सपना रविवार को पूरा हो गया। 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों में कश्यप को पुरुष सिंगल्स में कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा था लेकिन इस बार वह सोने से कम कुछ नहीं चाहते थे।
मजबूत इरादों, बेहतरीन तकनीक और शानदार जुझारू खेल से कश्यप आखिरकार स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब हो ही गए। उन्होंने पुरुष सिंगल्स के फाइनल में सिंगापुर के डेरेक वोंग को हराया और भारत को 32 साल के लंबे अंतराल के बाद इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक दिलाया। इस जीत के साथ ही कश्यप कॉमनवेल्थ गेम्स के रिकॉर्डबुक में अपना लिखवाने में कामयाब हो गए।
वहीं महिलाओं में ज्वाला गट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी महिला डबल्स में स्वर्ण पदक जीतने से चूक गई। ज्वाला और अश्विनी की फाइनल में हार के साथ ही भारत ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स से विदाई भी ले ली। भारत का बैडमिंटन में एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य समेत यह कुल चौथा पदक है।
महिला डबल्स में ज्वाला और पोनप्पा को रजत
रविवार को सभी की निगाहें कश्यप और डेरेक वोंग के बीच होने वाले मुकाबले पर लगी थी। तीन सेटों तक चले इस रोमांचक और संघर्षपूर्ण मुकाबले में कश्यप ने बेहतरीन खेल दिखाया और वोंग पर 21-14, 11-21, 21-19 से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। पी कश्यप ने जीत के बाद कहा कि इस तरह के बड़े मैच में स्वर्ण पदक जीतना मेरे लिए बड़ी बात है। यह एक सपने की तरह है। यह सपना मैं बचपन से देखता था। मैं इस टूर्नामेंट में गोल्ड पाने की चाहत के साथ ही उतरा था। यह जीत मेरे लिए बहुत जरूरी थी।
भारत को आखिरी बार इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक 1982 में सैयद मोदी ने दिलाया था। वहीं भारत को इस स्पर्धा का पहला गोल्ड मेडल 1978 में प्रकाश पादुकोण ने दिलाया था। इस तरह से कश्यप पुरुष सिंगल्स में स्वर्णिम कामयाबी हासिल करने वाले कुल तीसरे भारतीय शटलर बने। 27 वर्षीय कश्यप का कॉमनवेल्थ गेम्स में भी यह पहला स्वर्ण पदक है।
दूसरी ओर महिला डबल्स के फाइनल में ज्वाला गट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी अपना खिताब बचाने में विफल रही। 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता जोड़ी को मलयेशियाई जोड़ी लो यिन लिम और लेई पेई जिंग की जोड़ी ने दो सेटों में 21-17, 23-21 से शिकस्त दी।