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Nitesh Kumar: ट्रेन दुर्घटना में पैर खोने के कारण महीनों तक बिस्तर पर रहे; कोहली से ली प्रेरणा, अब जीता सोना
Mon, 02 Sep 2024 05:04 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Mon, 02 Sep 2024 05:04 PM IST
सार
नितेश ने फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन के डेनियल बेथेल को हराया। हालांकि, नितेश के लिए यहां तक पहुंचना आसान नहीं था क्योंकि एक समय ऐसा भी था जब वह महीनों तक बिस्तर पर पड़े रहे थे और उनका हौसला टूटा हुआ था।
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नितेश कुमार
- फोटो : Khel India
विस्तार
पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी नितेश कुमार पेरिस पैरालंपिक के पुरुष एकल एसएल3 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे। नितेश ने फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन के डेनियल बेथेल को 21-14, 18-21, 23-21 से हराया। हालांकि, नितेश के लिए यहां तक पहुंचना आसान नहीं था क्योंकि एक समय ऐसा भी था जब वह महीनों तक बिस्तर पर पड़े रहे थे और उनका हौसला टूटा हुआ था। दरअसल, नितेश जब 15 साल के थे तब उनकी जिंदगी में दुखद मोड़ आया और 2009 में विशाखापत्तनम में एक ट्रेन दुर्घटना में उन्होंने अपना पैर खो दिया।
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खेल बना ताकत का स्रोत
बिस्तर पर पड़े रहने के कारण वह काफी निराशा हो चुके थे। नितेश को आईआईटी-मंडी में पढ़ाई के दौरान उन्हें बैडमिंटन की जानकारी मिली और फिर यह खेल उनकी ताकत का स्रोत बन गया। उन्होंने इस दौर को याद करते हुए कहा था, मेरा बचपन थोड़ा अलग रहा है। मैं फुटबॉल खेलता था और फिर यह दुर्घटना हो गई। मुझे हमेशा के लिए खेल छोड़ना पड़ा और पढ़ाई में लग गया। लेकिन खेल फिर मेरी जिंदगी में वापस आ गए।
बिस्तर पर पड़े रहने के कारण वह काफी निराशा हो चुके थे। नितेश को आईआईटी-मंडी में पढ़ाई के दौरान उन्हें बैडमिंटन की जानकारी मिली और फिर यह खेल उनकी ताकत का स्रोत बन गया। उन्होंने इस दौर को याद करते हुए कहा था, मेरा बचपन थोड़ा अलग रहा है। मैं फुटबॉल खेलता था और फिर यह दुर्घटना हो गई। मुझे हमेशा के लिए खेल छोड़ना पड़ा और पढ़ाई में लग गया। लेकिन खेल फिर मेरी जिंदगी में वापस आ गए।
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प्रमोद भगत और कोहली से ली प्रेरणा
साथी पैरा शटलर प्रमोद भगत की विनम्रता और स्टार क्रिकेटर विराट कोहली से प्रेरणा लेकर नितेश ने अपने जीवन को फिर से संवारना शुरू कर दिया। उन्होन कहा, प्रमोद भैया मेरे प्रेरणास्रोत रहे हैं। इसलिए नहीं कि वे कितने कुशल और अनुभवी हैं बल्कि इसलिए भी कि वे एक इंसान के तौर पर कितने विनम्र हैं। विराट कोहली ने जिस तरह से खुद को एक फिट एथलीट में बदला है, मैं इसलिए उनकी प्रशंसा करता हूं। अब वह इतने फिट और अनुशासित हैं।
साथी पैरा शटलर प्रमोद भगत की विनम्रता और स्टार क्रिकेटर विराट कोहली से प्रेरणा लेकर नितेश ने अपने जीवन को फिर से संवारना शुरू कर दिया। उन्होन कहा, प्रमोद भैया मेरे प्रेरणास्रोत रहे हैं। इसलिए नहीं कि वे कितने कुशल और अनुभवी हैं बल्कि इसलिए भी कि वे एक इंसान के तौर पर कितने विनम्र हैं। विराट कोहली ने जिस तरह से खुद को एक फिट एथलीट में बदला है, मैं इसलिए उनकी प्रशंसा करता हूं। अब वह इतने फिट और अनुशासित हैं।
नौसेना अधिकारी के बेटे नितेश ने कभी वर्दी पहनने की ख्वाहिश की थी। उन्होंने कहा, 'मैं वर्दी का दीवाना था। मैं अपने पिता को उनकी वर्दी में देखता था और मैं या तो खेल में या सेना या नौसेना जैसी नौकरी में रहना चाहता था।' लेकिन दुर्घटना ने उन सपनों को चकनाचूर कर दिया। पर पुणे में कृत्रिम अंग केंद्र की यात्रा ने नितेश का दृष्टिकोण बदल दिया।