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Paris Olympics: जीतने के बाद मनु भाकर की पहली प्रतिक्रिया, भगवान को दिया धन्यवाद, कहा- भारत और पदक जीतेगा
Sun, 28 Jul 2024 05:00 PM IST
Mayank Tripathi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: Mayank Tripathi
Updated Sun, 28 Jul 2024 05:00 PM IST
सार
उन्होंने अपने कोच और प्रशंसकों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, "हमने कड़ी मेहनत की है। हमें बाकी सब भाग्य और भगवान पर छोड़ देना चाहिए। हम जितना कर सकते हैं, करेंगे।
मेरे साथ खड़े रहने के लिए सभी दोस्तों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों का बहुत-बहुत धन्यवाद।"
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मनु भाकर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत की निशानेबाज मनु भाकर ने महिलाओं के 10 मीटर एयर पिस्टल में शानदार प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इसी के साथ उन्होंने पेरिस ओलंपिक में भारत के पदकों का खाता भी खोल दिया। भाकर ने जीतने के बाद भगवान को धन्यवाद दिया और उम्मीद जताई कि भारत और पदक जीतेगा।
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पदक जीतने के बाद मनु ने साझा किया अनुभव
भाकर ने अपने इस प्रदर्शन के साथ टोक्यो ओलंपिक की निराशा को पीछे छोड़ दिया। भारत ने लंदन ओलंपिक 2012 से निशानेबाजी में कोई पदक नहीं जीता था। अब भाकर ने इस सूखे को खत्म कर दिया है। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, "आखिरी शॉट में, मैं अपनी पूरी ताकत से लड़ रही थी। शायद मैं अगले (इवेंट) में बेहतर प्रदर्शन कर पाऊं। मैं वही कर रही थी जो मुझे करना चाहिए था। टोक्यो के बाद, मैं बहुत निराश थी। मुझे इससे उबरने में बहुत समय लगा।"
भाकर ने अपने इस प्रदर्शन के साथ टोक्यो ओलंपिक की निराशा को पीछे छोड़ दिया। भारत ने लंदन ओलंपिक 2012 से निशानेबाजी में कोई पदक नहीं जीता था। अब भाकर ने इस सूखे को खत्म कर दिया है। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, "आखिरी शॉट में, मैं अपनी पूरी ताकत से लड़ रही थी। शायद मैं अगले (इवेंट) में बेहतर प्रदर्शन कर पाऊं। मैं वही कर रही थी जो मुझे करना चाहिए था। टोक्यो के बाद, मैं बहुत निराश थी। मुझे इससे उबरने में बहुत समय लगा।"
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कोच और प्रशंसकों को दिया धन्यवाद
इसके अलावा उन्होंने अपने कोच और प्रशंसकों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, "हमने कड़ी मेहनत की है। हमें बाकी सब भाग्य और भगवान पर छोड़ देना चाहिए। हम जितना कर सकते हैं, करेंगे।
मेरे साथ खड़े रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद (सभी दोस्तों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों का)। उन्हीं की बदौलत मैं यहां मजबूती से खड़ी हूं। हर बार मैं बहुत मेहनत करती हूं और आप सभी ने मेरी जिंदगी को इतना आसान बना दिया है। मैं अपने प्रशंसकों और अपने कोचों को धन्यवाद देना चाहूंगी।"
इसके अलावा उन्होंने अपने कोच और प्रशंसकों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, "हमने कड़ी मेहनत की है। हमें बाकी सब भाग्य और भगवान पर छोड़ देना चाहिए। हम जितना कर सकते हैं, करेंगे।
मेरे साथ खड़े रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद (सभी दोस्तों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों का)। उन्हीं की बदौलत मैं यहां मजबूती से खड़ी हूं। हर बार मैं बहुत मेहनत करती हूं और आप सभी ने मेरी जिंदगी को इतना आसान बना दिया है। मैं अपने प्रशंसकों और अपने कोचों को धन्यवाद देना चाहूंगी।"
कौन हैं मनु भाकर?
निशानेबाज मनु भाकर का जन्म हरियाणा के झज्जर में 18 फरवरी, 2002 को हुआ था और वह निशानेबाजी में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे होनहार युवा एथलीटों में से एक हैं। छोटी उम्र से ही मनु को खेलों में रुचि थी। शूटिंग से पहले उन्होंने मुक्केबाजी, टेनिस और स्केटिंग जैसे खेलों में भी अपना हाथ आजमाया था।
निशानेबाज मनु भाकर का जन्म हरियाणा के झज्जर में 18 फरवरी, 2002 को हुआ था और वह निशानेबाजी में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे होनहार युवा एथलीटों में से एक हैं। छोटी उम्र से ही मनु को खेलों में रुचि थी। शूटिंग से पहले उन्होंने मुक्केबाजी, टेनिस और स्केटिंग जैसे खेलों में भी अपना हाथ आजमाया था।
2017 में किया था अंतरराष्ट्रीय डेब्यू
मनु ने पहला स्वर्ण पदक 16 साल की उम्र में जीता था। उन्होंने ग्वाडलजारा में 2018 आईएसएसएफ विश्व कप में 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में जीत हासिल की थी। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में साल 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद अभिषेक वर्मा के साथ उन्होंने 2018 में जकार्ता में खेले गए एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। चीन के हांगझोऊ में हुए 19वें एशियन गेम्स 2023 में 25 मीटर रैपिड पिस्टल में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था।
अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र के अलावा उन्होंने घरेलू मोर्चे पर भी दमदार प्रदर्शन किया। टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने दमदार प्रदर्शन किया था। हालांकि, वह पदक से चूक गईं थीं। भारतीय खेलों में उनके योगदान के लिए मनु को भारत सरकार की तरफ से प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था।
मनु ने पहला स्वर्ण पदक 16 साल की उम्र में जीता था। उन्होंने ग्वाडलजारा में 2018 आईएसएसएफ विश्व कप में 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में जीत हासिल की थी। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में साल 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद अभिषेक वर्मा के साथ उन्होंने 2018 में जकार्ता में खेले गए एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। चीन के हांगझोऊ में हुए 19वें एशियन गेम्स 2023 में 25 मीटर रैपिड पिस्टल में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था।
अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र के अलावा उन्होंने घरेलू मोर्चे पर भी दमदार प्रदर्शन किया। टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने दमदार प्रदर्शन किया था। हालांकि, वह पदक से चूक गईं थीं। भारतीय खेलों में उनके योगदान के लिए मनु को भारत सरकार की तरफ से प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था।
माता-पिता ने भी किया समर्थन
मनु ने एक साक्षात्कार के दौरान बताया था कि उनके माता-पिता ने हमेशा उनका समर्थन किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय भी माता-पिता को ही दिया। वहीं, अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में बात करते हुए उन्होंने कहा था, "मैं पेरेंट्स की बहुत आभारी हूं। उन्होंने कभी मुझे किसी चीज के लिए मना नहीं किया। अभी मैं वायलिस सीखना चाहती हूं।" मनु के पिता राम किशन भाकर मर्चेंट नेवी में इंजीनियर के पद पर काम करते हैं। उनके पिता ने प्रतिस्पर्धी शूटिंग सीखने के लिए 1.5 लाख रुपए खर्च किए थे।
मनु ने एक साक्षात्कार के दौरान बताया था कि उनके माता-पिता ने हमेशा उनका समर्थन किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय भी माता-पिता को ही दिया। वहीं, अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में बात करते हुए उन्होंने कहा था, "मैं पेरेंट्स की बहुत आभारी हूं। उन्होंने कभी मुझे किसी चीज के लिए मना नहीं किया। अभी मैं वायलिस सीखना चाहती हूं।" मनु के पिता राम किशन भाकर मर्चेंट नेवी में इंजीनियर के पद पर काम करते हैं। उनके पिता ने प्रतिस्पर्धी शूटिंग सीखने के लिए 1.5 लाख रुपए खर्च किए थे।
नौवीं तक था डॉक्टर बनने का सपना
मनु के पिता राम किशन भाकर ने उनका हमेशा साथ दिया। पिता ने मनु को पूरा समर्थन दिया। जिस खेल में उन्हें आगे बढ़ने का मन था उसी में बढ़ने दिया। बहुत से विद्यार्थियों की तरह मनु भी नौवीं कक्षा तक डॉक्टर बनना चाहती थीं। वह खेल में शुरू से अच्छी रही लेकिन पढ़ाई पर मुख्य ध्यान रहा।
10वीं में मनु के जीवन का अलग मोड़ आया, जब कक्षा में टॉप करने के साथ उनका चयन शूटिंग के लिए राष्ट्रीय टीम में हुआ। उनके कोच अनिल जाखड़ के कहने पर मनु ने शूटिंग को एक मौका दिया और 11वीं में जब वह 16 साल की थी तब आईएसएसएफ विश्व कप, राष्ट्रमंडल खेल और यूथ ओलंपिक खेल में स्वर्ण पदक जीतकर अपना नाम बनाया।
मनु के पिता राम किशन भाकर ने उनका हमेशा साथ दिया। पिता ने मनु को पूरा समर्थन दिया। जिस खेल में उन्हें आगे बढ़ने का मन था उसी में बढ़ने दिया। बहुत से विद्यार्थियों की तरह मनु भी नौवीं कक्षा तक डॉक्टर बनना चाहती थीं। वह खेल में शुरू से अच्छी रही लेकिन पढ़ाई पर मुख्य ध्यान रहा।
10वीं में मनु के जीवन का अलग मोड़ आया, जब कक्षा में टॉप करने के साथ उनका चयन शूटिंग के लिए राष्ट्रीय टीम में हुआ। उनके कोच अनिल जाखड़ के कहने पर मनु ने शूटिंग को एक मौका दिया और 11वीं में जब वह 16 साल की थी तब आईएसएसएफ विश्व कप, राष्ट्रमंडल खेल और यूथ ओलंपिक खेल में स्वर्ण पदक जीतकर अपना नाम बनाया।