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Chess: शतरंज खिलाड़ी हरिकृष्णन ए रा भारत के 87वें ग्रैंडमास्टर बने, कोच को बड़े टूर्नामेंट में खेलने की उम्मीद
Sun, 13 Jul 2025 05:55 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Sun, 13 Jul 2025 05:55 PM IST
सार
हरिकृष्णन 2022 में चेन्नई में ग्रैंडमास्टर श्याम सुंदर मोहनराज की अकादमी से जुड़े थे। हरिकृष्णन के ग्रैंडमास्टर बनने से मोहनराज की खुशी का ठिकाना नहीं रहा है।
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शतरंज
- फोटो : Adobe
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विस्तार
भारत के हरिकृष्णन ए रा भारत के 87वें ग्रैंडमास्टर बन गए हैं। 24 साल के हरिकृष्णन ने शुक्रवार को फ्रांस के ला प्लेन अंतरराष्ट्रीय शतरंज महोत्सव में अपना तीसरा ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल किया और देश के 87वें ग्रैंडमास्टन बने। हरिकृष्णन 2022 में चेन्नई में ग्रैंडमास्टर श्याम सुंदर मोहनराज की अकादमी से जुड़े थे। हरिकृष्णन के ग्रैंडमास्टर बनने से मोहनराज की खुशी का ठिकाना नहीं रहा है।
मोहनराज इसलिए ज्यादा खुश हैं क्योंकि कुछ महीनों के भीतर उनकी अकादमी के दो खिलाड़ी ग्रैंडमास्टर बने। श्रीहरि एल आर भारत के 86वें ग्रैंडमास्टर थे और अब हरिकृष्णन ने यह उपलब्धि हासिल की है। हरिकृष्णन ने अपना पहला ग्रैंडमास्टर नॉर्म कुछ साल पहले हासिल किया था और फिर स्पेन में आंदुजार ओपन में दूसरा नॉर्म हासिल किया। मोहनराज ने उस समय को याद किया जब वह एक साल से अधिक समय तक कोई ग्रैंडमास्टर तैयार नहीं कर पाए थे। मोहनराज को वह समय याद है जब अंतरराष्ट्रीय मास्टर बन चुके हरिकृष्णन ग्रैंडमास्टर बनने के लिए मार्गदर्शन लेने उनकी अकादमी में आए थे।
उन्होंने कहा, दो महीने में ही अकादमी ने दो ग्रैंडमास्टर तैयार कर दिए हैं। पिछले दो-तीन वर्षों से जिन ग्रैंडमास्टर्स को मैं लगातार प्रशिक्षित कर रहा हूं, उनकी वजह से यह बहुत अच्छा लग रहा है। यह मेरे और हरिकृष्णन, दोनों के लिए बड़ी राहत की बात है क्योंकि उन्होंने लगातार दो ग्रैंडमास्टर नॉर्म गंवा दिए थे।
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मोहनराज इसलिए ज्यादा खुश हैं क्योंकि कुछ महीनों के भीतर उनकी अकादमी के दो खिलाड़ी ग्रैंडमास्टर बने। श्रीहरि एल आर भारत के 86वें ग्रैंडमास्टर थे और अब हरिकृष्णन ने यह उपलब्धि हासिल की है। हरिकृष्णन ने अपना पहला ग्रैंडमास्टर नॉर्म कुछ साल पहले हासिल किया था और फिर स्पेन में आंदुजार ओपन में दूसरा नॉर्म हासिल किया। मोहनराज ने उस समय को याद किया जब वह एक साल से अधिक समय तक कोई ग्रैंडमास्टर तैयार नहीं कर पाए थे। मोहनराज को वह समय याद है जब अंतरराष्ट्रीय मास्टर बन चुके हरिकृष्णन ग्रैंडमास्टर बनने के लिए मार्गदर्शन लेने उनकी अकादमी में आए थे।
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उन्होंने कहा, दो महीने में ही अकादमी ने दो ग्रैंडमास्टर तैयार कर दिए हैं। पिछले दो-तीन वर्षों से जिन ग्रैंडमास्टर्स को मैं लगातार प्रशिक्षित कर रहा हूं, उनकी वजह से यह बहुत अच्छा लग रहा है। यह मेरे और हरिकृष्णन, दोनों के लिए बड़ी राहत की बात है क्योंकि उन्होंने लगातार दो ग्रैंडमास्टर नॉर्म गंवा दिए थे।
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