Lord Ganesha Worship: बुधवार का दिन भगवान श्रीगणेश को समर्पित है। हिंदू धर्म में विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश को सभी देवी-देवताओं में प्रथम पूजनीय माना जाता है। किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य से पहले गणेश जी की ही पूजा की जाती है। इसके अलावा बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस दिन गणेशजी के निमित्त व्रत और पूजा करने से भक्तों के सारे संकट दूर हो जाते हैं एवं गणेशजी अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। कहा जाता है कि बिना दूर्वा के भगवान गणेश की पूजा अधूरी मानी जाती है। बुधवार के दिन भगवान गणेशजी की पूजा के दौरान उनको दूर्वा अर्पित करने से वे बहुत ही शीघ्र प्रसन्न होते हैं। ऐसे में चलिए आज जानते हैं कि गणेशजी को दूर्वा क्यों पसंद है और क्या है इसके पीछे की पौराणिक कथा....
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बुधवार के दिन भगवान गणेश को क्यों चढ़ाई जाती है दूर्वा
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कथा
एक पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में अनलासुर नाम का एक दैत्य था। उसके आंतक से धरती और स्वर्ग पर त्राहि-त्राहि मची हुई थी। अनलासुर एक ऐसा दैत्य था, जो मुनि-ऋषियों और साधारण मनुष्यों को जीवित ही निगल जाता था। अनलासुर के आतंक से सभी देवी-देवता परेशान हो चुके थे। इसके बाद सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनि भगवान शिव से विनती करने पहुंचे। भगवान भोलेनाथ ने समस्त देवी-देवताओं और मुनि-ऋषियों की प्रार्थना को सुनकर कहा कि दैत्य अनलासुर का नाश केवल श्री गणेश ही कर सकते हैं।
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बुधवार के दिन भगवान गणेश को क्यों चढ़ाई जाती है दूर्वा
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इसके बाद सभी देवों की प्रार्थना पर गणेश जी ने अनलासुर को निगल लिया, तब उनके पेट में बहुत जलन होने लगी। इस परेशानी से निपटने के लिए कई प्रकार के उपाय किए गए, लेकिन उपाय कारगर नहीं हुआ। उसी समय कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठें बनाकर श्रीगणेशजी को खाने को दीं। जैसे ही गणेशजी ने दूर्वा को ग्रहण किया, तुरंत उनके पेट की जलन शांत हो गई और उसी समय से गणेश जी पर दूर्वा चढ़ाने की परंपरा की शुरुआत हुई।
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मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति किसी बीमारी, दरिद्रता या किसी और संकट से जूझ रहा है, तो सच्चे मन से गणेश जी की पूजा करके दूर्वा अर्पित करने से उसे इन सभी समस्याओं से जल्दी ही छुटकारा मिल जाता है।
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दूर्वा चढ़ाने के नियम
बुधवार के दिन गणेश मंदिर में दूर्वा की ग्यारह गांठें चढ़ाने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और बुध दोष समाप्त हो जाते हैं। दूर्वा को चढ़ाने के लिए किसी साफ जगह से ही दूर्वा घास को तोड़ना चाहिए। साथ ही दूर्वा चढ़ाते समय गणेशजी के 11 मंत्रों का जाप जरूर करें...