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यहां हनुमान जी का नाम लेना भी है गुनाह
चमोली/इंटरनेट डेस्क।
Updated Thu, 30 May 2013 04:48 PM IST
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कलियुग में ईश्वर के प्रतिनिधि के तौर पर हनुमान जी पृथ्वी पर देह सहित मौजूद हैं। इसलिए मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान मंदिर में लोगों की लंबी कतार लगती है और लोग अपनी-अपनी मुरादें हनुमान जी को सुनाते हैं।
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लेकिन एक स्थान ऐसा है जहां के लोग हनुमान जी पूजा नहीं करते हैं बल्कि इनके हृदय में हनुमान जी के प्रति नफरत की भावना है। सारा देश भगवान श्री कृष्ण को माखन चोर कहता हैं लेकिन यहां लोग हनुमान जी को चोर कहते हैं, वह भी पहाड़ का चोर।
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हनुमान जी के प्रति यह नफरत आज की नहीं है बल्कि उस समय से है जब मेघनाद के नागपाश में बंधकर लक्ष्मण जी बेहोश हो गये थे। इस समय लक्ष्मण को होश में लाने के लिए सुषेण नामक वैद्य ने हनुमान जी को हिमालय से संजीवनी बूटी लाने के लिए कहा।
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हनुमान जी पवन की गति से उड़कर उत्तराखंड के चमोली जिला में स्थित द्रोणगिरी पर्वत पर पहुंचे। द्रोणगिरी पर्वत चमोली जिला के जोशीमठ विकास खंड के अंतर्गत बसा हुआ है। इसी पर्वत की तलहटी में द्रोणागिरी नामक गांव बसा हुआ है।
यहां के लोगों का कहना है कि हनुमान जी जब संजीवनी बूटी लेने आये तब गांव की एक वृद्घ महिला ने हनुमान जी को पर्वत का वह हिस्सा दिखाया जहां संजीवनी बूटी उगती थी। इस बूटी तक पहुंचने का रास्ता भी महिला ने ही दिखाया।
हनुमान जी संजीवनी बूटी के बदले पहाड़ का वह हिस्सा ही उखाड़कर ले गये। इसलिए हनुमान जी से इनकी नाराजगी है। हनुमान जी के प्रति नाराजगी का आलम यह है कि, इस गांव में हनुमान जी का नाम लेने वाले और उनकी पूजा करने वाले को बिरादरी से बाहर भी कर दिया जाता है।
वैसे इस गांव के लोगों की राम जी से कोई नाराजगी नहीं है। राम की पूजा बड़ी ही श्रद्घा भक्ति से करते हैं। यहां के लोग हर साल द्रोणगिरी की पूजा करते हैं लेकिन इस पूजा में महिलाओं को शामिल नहीं किया जाता है क्योंकि एक महिला ने ही द्रोणगिरी पर्वत का वह हिस्सा दिखाया था जहां संजीवनी बूटी उगती थी।