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उन्नति और समृद्घि चाहते हैं तो श्राद्घ पक्ष में ऐसी गलती न करें
Updated Wed, 18 Sep 2013 09:46 AM IST
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पितृ लोक में निवास करने वाले पितृगण कल पृथ्वी पर पधारेंगे और 15 दिनों तक पृथ्वी पर रहने के बाद वापस अपने लोक लौट जाएंगे। इन 15 दिनों को शास्त्रों में पितृपक्ष नाम दिया गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि पितृपक्ष के दौरान पितर अपने परिजनों के आस-पास रहते हैं इसलिए इन दिनों कोई भी ऐसा काम नहीं करें जिससे पितृगण नाराज हों।
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पितरों के नाराज होने से जीवन में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। आर्थिक एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आती हैं। नाराज होने पर पितृगण संतान सुख में भी बाधक बनते हैं। इसलिए पितरों को खुश रखने के लिए पितृ पक्ष यानी श्राद्घ पक्ष में कुछ बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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पितृपक्ष के दौरान ब्राह्मण, जमाता, भांजा, मामा, गुरू, नाती को भोजन करना चाहिए। इससे पितृगण अत्यंत प्रसन्न होते हैं। जो किसी कारण से इन्हें श्राद्घ पक्ष में भोजन नहीं करवाता है उससे पितृगण तथा देवता भी नाराज होते हैं।
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ब्राह्मणों को भोजन करवाते समय भोजन का पात्र दोनों हाथों से पकड़कर लाना चाहिए अन्यथा भोजन का अंश राक्षस ग्रहण कर लेते हैं जिससे ब्रह्मणों द्वारा अन्न ग्रहण करने के बावजूद भी पितृगण भोजन का अंश ग्रहण नहीं करते हैं।
पितृ पक्ष में द्वार पर आने वाले किसी भी जीव-जंतु को मारना नहीं चाहिए बल्कि उनके योग्य भोजन का प्रबंध करना चाहिए। ब्रह्मण अथवा कोई भीखारी आए तो उसे भोजन करवाएं इससे पितृगण संतुष्ट होकर उन्नति का आशीर्वाद देते हैं।
हर दिन भोजन बनने के बाद एक हिस्सा निकालकर गाय, कुत्ता, कौआ अथवा बिल्ली को देना चाहिए। मान्यता है कि इन्हें दिया गया भोजन सीधे पितरों प्राप्त हो जाता है। शाम के समय घर के द्वार पर एक दीपक जलाकर पितृगणों का ध्यान करें।