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यह है स्वर्ग का पेड़, नीचे बैठने भर से दूर हो जाती है थकान, कहानी भी है बड़ी रोचक
amarujala.com- Presented by: आकांक्षा सिंह
Updated Fri, 03 Mar 2017 11:46 AM IST
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परिजात वृक्ष अपनी खासियत के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। कृष्ण द्वारा रोपित यह पेड़ पलभर में लोगों की थकान मिटा देता है। इसके नीचे बैठने से ही आप एकदम तरोताजा महसूस करते हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के पास किंटूर में इस वृक्ष को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं इसके पीछे की कहानी। आखिर कैसे स्वर्ग का यह पेड़ धरती पर आया। जानिए इसकी पूरी कहानी।
द्वापर युग में जब देवर्षि नारद कृष्ण से मिलने आए तो उन्होंने कृष्ण को अपने साथ लाए परिजात फूल भेंट किए। कृष्ण ने यह फूल पास बैठी अपनी पत्नी रुक्मणी को दे दिए। जब कृष्ण की दूसरी पत्नी सत्यभामा को यह बात पता चली तो उन्हें कृष्ण पर बहुत गुस्सा आया। उन्होंने कृष्ण से कहा कि उन्हें भी स्वर्ग से आए परिजात के फूल चाहिए। कृष्ण के लाख समझाने के बावजूद सत्यभामा ने अपनी जिद नहीं छोड़ी।
हारकर कृष्ण ने फूल लाने के लिए अपने दूत को स्वर्ग भेजा लेकिन इंद्र ने फूल देने से मना कर दिया। यह बात जानकर कृष्ण ने इंद्र पर आक्रमण करने की ठानी। कृष्ण ने इंद्र को परास्त किया और वृक्ष को जीत लिया। इससे क्रोधित इंद्र ने श्राप दिया कि अब से इस परिजात वृक्ष पर कभी फल नहीं लगेंगे। कृष्ण ने स्वर्ग से लाया वह वृक्ष सत्यभामा की वाटिका में रोपित कर दिया लेकिन उन्हें सबक सिखाने के लिए कृष्ण ने एक तरकीब सोची।
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कृष्ण ने ऐसा कर दिया कि जब भी परिजात वृक्ष पर फूल लगते, वह गिरते रुक्मणी का वाटिका में। इसीलिए परिजात वृक्ष के फूल पेड़ से दूर गिरते हैं।
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द्वापर युग में जब देवर्षि नारद कृष्ण से मिलने आए तो उन्होंने कृष्ण को अपने साथ लाए परिजात फूल भेंट किए। कृष्ण ने यह फूल पास बैठी अपनी पत्नी रुक्मणी को दे दिए। जब कृष्ण की दूसरी पत्नी सत्यभामा को यह बात पता चली तो उन्हें कृष्ण पर बहुत गुस्सा आया। उन्होंने कृष्ण से कहा कि उन्हें भी स्वर्ग से आए परिजात के फूल चाहिए। कृष्ण के लाख समझाने के बावजूद सत्यभामा ने अपनी जिद नहीं छोड़ी।
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हारकर कृष्ण ने फूल लाने के लिए अपने दूत को स्वर्ग भेजा लेकिन इंद्र ने फूल देने से मना कर दिया। यह बात जानकर कृष्ण ने इंद्र पर आक्रमण करने की ठानी। कृष्ण ने इंद्र को परास्त किया और वृक्ष को जीत लिया। इससे क्रोधित इंद्र ने श्राप दिया कि अब से इस परिजात वृक्ष पर कभी फल नहीं लगेंगे। कृष्ण ने स्वर्ग से लाया वह वृक्ष सत्यभामा की वाटिका में रोपित कर दिया लेकिन उन्हें सबक सिखाने के लिए कृष्ण ने एक तरकीब सोची।
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कृष्ण ने ऐसा कर दिया कि जब भी परिजात वृक्ष पर फूल लगते, वह गिरते रुक्मणी का वाटिका में। इसीलिए परिजात वृक्ष के फूल पेड़ से दूर गिरते हैं।