खूबसूरत स्त्री को देखकर बहके पति, पत्नी ने उठाए यह कदम
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पुराणों में ऐसी कथाएं मिलती हैं जब रुपवती स्त्री और अप्सराओं को देखकर राजे, महाराजे और देवताओं का भी मन डोल गया और वह अपने कर्तव्य को भूलकर रुपवती स्त्री का प्रेम पाने के लिए मचल उठे।
देवराज इन्द्र गौतम मुनि की पत्नी को देखकर ऐसे व्याकुल हो उठे कि झूठ का सहारा लेकर गौतम मुनि की पत्नी का मान तक भंग कर डाला। सूर्य के पुत्र अश्विनी कुमार ने एक बार महर्षि च्यवन की पत्नी सुकन्या को देखा तो उनके रुप पर मोहित हो गए।
इन्होंने सुकन्या को अपनी पत्नी बनाना चाहा लेकिन सुकन्या ने अपने पतिव्रत धर्म से अश्विनी कुमार को पराजित कर दिया। यह तो रही देवताओं की कहानी आइये देखते हैं उस मनुष्य का हाल जो रुपवती स्त्री को देखकर बहक गया।
जब रुपवती स्त्री को देखकर बहका इंसान
यह कहानी है राजा दुर्जय की। इनकी पत्नी रुपवती होने के साथ ही साथ पतिव्रता और ईश्वर भक्ति थी। इसके बावजूद एक बार जब यह यमुना तट पर घूम रहे थे तब इनकी नजर स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी पर गयी जो यमुना तट पर बैठकर गायन कर रही थी। राजा दुर्जय उर्वशी के रूप और गायन पर ऐसे मोहित हुए कि अपने पति धर्म को भूलकर उर्वशी को पाने के लिए व्याकुल हो उठे।
दुर्जय ने उर्वशी के सामने प्रेम प्रस्ताव रखा जिसे उर्वशी ने भी स्वीकार कर लिया। दोनों काफी समय तक साथ रहे। एक दिन अचानक ही दुर्जय को अपने राज्य और पत्नी की याद आई और उर्वशी से पुनः मिलने का वादा करके अपने राज्य की ओर चल पड़े।
महल में प्रवेश करते ही उन्हें सामने अपनी पत्नी दिखी जो उनका इंतजार कर रही थी। सामने पत्नी को देखते ही दुर्जय घबरा गए। राजा की हालत देखकर इनकी पत्नी ने अपने पतिव्रत धर्म की शक्ति से यह पता लगा लिया कि राजा उर्वशी के रुप पर मोहित होकर बहके गए हैं।
पत्नी से इस तरह वापस पा लिया अपना पति
राजा दुर्जय को उनकी पत्नी ने कहा कि आपसे गलती तो हो गई है लेकिन आपकी खुशी में मेरी भी खुशी है। अगर आप अपने किए का प्रायश्चित कर लें तो आप इस पाप से मुक्त हो सकते हैं।
राजा ने कण्व ऋषि से प्रयश्चित का उपाय पूछा और तपस्या करने हिमालय की ओर चल पड़े लेकिन एक गंधर्व के गले में अद्भुत माला देखकर फिर से उर्वशी का ख्याल हो आया और गंधर्व से माला लेकर उर्वशी की तलाश में चल पड़े।
लेकिन जब उर्वशी ने राजा को देखा तो इस बार नाराज हो गई क्योंकि वह जान चुकी थी की राजा की पत्नी पतिव्रता है और अगर फिर से राजा को अपनाया तो इस बार शाप मिल सकता है।
उर्वशी ने राजा को अपना भयावह रूप दिखाया जिससे राजा का मोह दूर हो गया और पाप से मुक्ति के लिए तपस्या करने चले गए।
यह कहानी कूर्मपुराण से ली गई है।