नहीं जानते होंगे, प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ का नया नाम क्या होगा?
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भगवान भोलेनाथ का पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ के नाम से जाना जाता है। लेकिन सोमनाथ का नाम हर नए सृष्टि के साथ बदल जाता है। इस क्रम में जब वर्तमान सृष्टि का अंत हो जाएगा और ब्रह्मा जी नई सृष्टि करेंगे तब सोमनाथ का नाम 'प्राणनाथ' होगा।
इस घटना का उल्लेख स्कंद पुराण के प्रभास खंड में किया गया है। इस पुराण में बताया गया है कि पार्वती के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए महादेव कहते हैं कि अब तक सोमनाथ के आठ नाम हो चुके हैं।
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पूर्वकाल में यह ज्योतिर्लिंग स्पर्शलिंग के नाम से जाना जाता था। उस समय सृष्टि में मुझे कोई मनुष्य नहीं जानता था। जब प्रलय के बाद महाकल्प का आरंभ होता है और नए ब्रह्मा उत्पन्न होते हैं तब ब्रह्मा के आठ वर्ष पूरा होने पर इस ज्योतिर्लिंग का नाम बदल जाता है।
अब तक छह ब्रह्मा बदल गए हैं। यह सातवें ब्रह्मा का युग है, इस ब्रह्मा का नाम है 'शतानंद'। इस युग में मेरा नाम सोमनाथ है। बीते कल्प से पहले जो ब्रह्मा थे उनका नाम विरंचि था। उस समय इस शिवलिंग का नाम मृत्युंजय था।
दूसरे कल्प में ब्रह्मा पद्मभू नाम से जाने जाते थे, उस समय इस ज्योतिर्लिंग का नाम कालाग्निरुद्र था। तीसरे ब्रह्मा की सृष्टि स्वयंभू नाम से हुई, उस समय सोमनाथ का नाम अमृतेश हुआ।
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चौथे ब्रह्मा का नाम परमेष्ठी हुआ, उन दिनों सोमनाथ अनामय नाम से विख्यात हुए। पांचवें ब्रह्मा सुरज्येष्ठ हुए तब इस ज्योतिर्लिंग का नाम कृत्तिवास था। छठे ब्रह्मा हेमगर्भ कहलाए। इनके युग में सोमनाथ भैरवनाथ कहलाए।
आने वाले नए युग में ब्रह्मा चतुर्मुख नाम से जाने जाएंगे। इस समय सोमेश्वर ज्योतिर्लिंग प्राणनाथ कहलाएंगे।