फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   ShivJi Symbol Significance in Sawan Know Spiritual Meaning Of Snake in Neck and Ganga ji in Hair

सावन माह में समझिए शिव के प्रतीकों का रहस्य, गले में सर्प और जटाओं में बहती गंगा के आध्यात्मिक संदेश

Wed, 16 Jul 2025 12:23 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 16 Jul 2025 12:23 PM IST
सार

Sawan 2025: भगवान शिव के गले में लिपटा सर्प ‘वासुकी’ नाग है। यह मृत्यु और भय का प्रतीक है। शिव का उसे गले में धारण करना यह दर्शाता है कि उन्होंने मृत्यु और भय पर विजय प्राप्त की है।

विज्ञापन
ShivJi Symbol Significance in Sawan Know Spiritual Meaning Of Snake in Neck and Ganga ji in Hair
Sawan 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Sawan 2025: सनातन धर्म में भगवान शिव को संहार और पुनर्निर्माण के देवता माना गया है। वे परम तपस्वी, योगियों के योगी, करुणा और विवेक के प्रतीक हैं। शिव की वेशभूषा और उनके द्वारा धारण किए गए प्रत्येक प्रतीक के पीछे गहन पौराणिक और धार्मिक अर्थ छिपा हुआ है। इन प्रतीकों के माध्यम से ब्रह्मांडीय सत्य, जीवन और मृत्यु, वैराग्य और चेतना के रहस्य समझाए गए हैं।
विज्ञापन


गले में सर्प (वासुकी नाग)
भगवान शिव के गले में लिपटा सर्प ‘वासुकी’ नाग है। यह मृत्यु और भय का प्रतीक है। शिव का उसे गले में धारण करना यह दर्शाता है कि उन्होंने मृत्यु और भय पर विजय प्राप्त की है। सर्प कुंडलिनी शक्ति का भी प्रतीक है, जो आत्मज्ञान की ओर ले जाती है। यह संयम और जागरूकता का प्रतीक भी माना जाता है।
विज्ञापन


जटाओं में बहती गंगा
शिव की जटाओं में गंगा का वास होना इस बात का संकेत है कि वे सृष्टि के संतुलन और जीवन के प्रवाह के नियंत्रक हैं। पौराणिक कथा अनुसार, जब भागीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए तप किया तो शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में समाहित कर उसकी वेग को संयमित किया। यह शिव की करुणा, नियंत्रण और संयम का प्रतीक है।
विज्ञापन
विज्ञापन

Sawan Shivratri 2025: सावन शिवरात्रि पर वृषभ समेत इन राशि वालों को नौकरी-कारोबार में होगा विशेष लाभ

शरीर पर भस्म
भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म यानी राख धारण करते हैं। यह संसार की नश्वरता और माया के विनाश का संकेत है। भस्म यह दर्शाता है कि शरीर भी अंततः पंचतत्व में विलीन हो जाएगा। यह वैराग्य, त्याग और आत्मज्ञान का प्रतीक है।

हाथ में त्रिशूल
त्रिशूल भगवान शिव का प्रमुख अस्त्र है, जो सृष्टि, स्थिति और संहार – इन तीन शक्तियों का प्रतिनिधित्व करता है। त्रिशूल यह भी दर्शाता है कि शिव मन, बुद्धि और अहंकार पर नियंत्रण रखते हैं। यह धर्म, न्याय और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

Sawan 2025: जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में होता है ये बड़ा अंतर, जानें पूजा के नियम और महत्त्व

कमर में बाघम्बर (बाघ की खाल)
बाघ की खाल पर बैठना और उसे कमर में धारण करना भगवान शिव की वीरता और बलशाली स्वरूप को दर्शाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि शिव ने क्रोध, वासना और हिंसा जैसे दुर्गुणों पर विजय प्राप्त कर ली है। बाघ शक्ति का प्रतीक है, जिसे शिव ने अपने अधीन कर रखा है।

गले में मुंडमाला
भगवान शिव के गले में मुंडमाला यानी कपालों की माला होती है, जो सृष्टि के चक्र और मृत्यु के रहस्य को दर्शाती है। यह इस बात की प्रतीक है कि शिव समय और मृत्यु से परे हैं। यह अहंकार के नाश और आत्मा की अमरता का संकेत भी देती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed