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पितृ पक्ष 2026: 26 सितंबर पितृ पक्ष शुरू, जानें पूर्णिमा श्राद्ध और प्रतिपदा श्राद्ध में क्या अंतर

Tue, 22 Sep 2026 08:17 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 22 Sep 2026 08:17 AM IST
सार

पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत से पहले पूर्णिमा श्राद्ध को लेकर कई लोगों के मन में सवाल रहता है। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध होगा, जबकि मुख्य श्राद्ध कर्म प्रतिपदा तिथि से शुरू होंगे। जानिए पूर्णिमा और प्रतिपदा श्राद्ध का क्या है नियम और महत्व।

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Pitru Paksha 2026 September 26 Purnima Shradh, Know Why Pratipada Begins the Main Shradh Period
पितृ पक्ष 2026 - फोटो : अमर उजाला

पितृपक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा अर्पित करने का विशेष समय माना जाता है। इस अवधि में लोग अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म करते हैं। हर साल पितृपक्ष की तिथियों को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं। खासतौर पर तब, जब पूर्णिमा श्राद्ध और मुख्य पितृपक्ष की शुरुआत अलग-अलग दिनों में होती है। पंचांग के अनुसार, 26 सितंबर 2026, शनिवार को भाद्रपद पूर्णिमा का श्राद्ध किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 27 सितंबर 2026, रविवार से आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू होगी। इसी तिथि से मुख्य पितृपक्ष यानी महालया पक्ष की शुरुआत मानी जाएगी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध है, तो मुख्य पितृपक्ष 27 सितंबर से ही क्यों शुरू माना जाता है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

Pitru Paksha 2026 September 26 Purnima Shradh, Know Why Pratipada Begins the Main Shradh Period
26 सितंबर को होगा पूर्णिमा श्राद्ध - फोटो : Amar Ujala

26 सितंबर को होगा पूर्णिमा श्राद्ध
26 सितंबर 2026 को भाद्रपद पूर्णिमा है। इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है, जिनका निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ था। यानी यदि परिवार में किसी व्यक्ति की मृत्यु पूर्णिमा के दिन हुई थी, तो पितृपक्ष के दौरान उनका श्राद्ध पूर्णिमा श्राद्ध की तिथि पर किया जाता है। पूर्णिमा श्राद्ध को मुख्य पितृपक्ष से पहले आने वाली महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। हालांकि, इस दिन सभी पितरों का श्राद्ध करने का नियम नहीं है। यह विशेष रूप से उन पूर्वजों के लिए होता है, जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई थी।

Pitru Paksha 2026 September 26 Purnima Shradh, Know Why Pratipada Begins the Main Shradh Period
मुख्य पितृपक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से मानी जाती है। - फोटो : Amar Ujala

27 सितंबर से मुख्य पितृपक्ष क्यों शुरू होगा?
पूर्णिमा श्राद्ध के अगले दिन यानी 27 सितंबर 2026 से आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू होगी। इसी के साथ मुख्य पितृपक्ष या महालया पक्ष की शुरुआत मानी जाती है। प्रतिपदा तिथि पर उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है, जिनका निधन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हुआ था। इसके बाद द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी आदि तिथियों के अनुसार संबंधित पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है। यही कारण है कि 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध होने के बावजूद मुख्य पितृपक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से मानी जाती है। दोनों तिथियों का अपना अलग धार्मिक महत्व और श्राद्ध का अलग नियम है।

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Pitru Paksha 2026 September 26 Purnima Shradh, Know Why Pratipada Begins the Main Shradh Period
27 सितंबर से आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा के साथ मुख्य पितृपक्ष शुरू होगा। - फोटो : AI

पितृपक्ष 2026 कब से कब तक रहेगा? 
साल 2026 में पितृपक्ष से जुड़ी दो तारीखें विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध होगा और 27 सितंबर से आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा के साथ मुख्य पितृपक्ष शुरू होगा। पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्व पितृ अमावस्या के साथ होगा। यह दिन उन पूर्वजों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है, जिनकी श्राद्ध तिथि मालूम नहीं है या किसी वजह से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं किया जा सका।

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Pitru Paksha 2026 September 26 Purnima Shradh, Know Why Pratipada Begins the Main Shradh Period
पूर्णिमा श्राद्ध और प्रतिपदा श्राद्ध में अंतर - फोटो : AI

पूर्णिमा श्राद्ध और प्रतिपदा श्राद्ध में अंतर
पूर्णिमा श्राद्ध और प्रतिपदा श्राद्ध के बीच मुख्य अंतर संबंधित तिथि का है। 26 सितंबर को होने वाला पूर्णिमा श्राद्ध उन पूर्वजों के लिए किया जाता है, जिनका निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ था। वहीं, 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध उन पूर्वजों के लिए होगा, जिनकी मृत्यु कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हुई थी। इस तरह दोनों श्राद्ध अलग-अलग तिथियों और उनसे संबंधित पूर्वजों के लिए किए जाते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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