Sawan 2025 Jalabhishek vs Rudrabhishek: शिवभक्तों के लिए विशेष माने जाने वाले श्रावण मास की शुरुआत इस बार 11 जुलाई 2025 से चुकी है। यह महीना भगवान शिव की पूजा, व्रत, उपवास और कांवड़ यात्रा जैसे अनुष्ठानों के लिए विशेष महत्व रखता है। श्रावण के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है, जिसे जलाभिषेक कहा जाता है। इसके साथ ही एक अन्य महत्वपूर्ण विधि है रुद्राभिषेक, जो वैदिक मंत्रों और विशेष सामग्री के साथ किया जाता है। कई बार लोग इन दोनों पूजा विधियों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में बड़ा अंतर होता है। आइए जानते हैं कि जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में क्या अंतर होता है।
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Sawan 2025: जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में होता है ये बड़ा अंतर, जानें पूजा के नियम और महत्त्व
Wed, 16 Jul 2025 03:31 PM IST
ज्योति मेहरा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Wed, 16 Jul 2025 03:31 PM IST
सार
श्रावण के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है, जिसे जलाभिषेक कहा जाता है। इसके साथ ही एक अन्य महत्वपूर्ण विधि है रुद्राभिषेक। आइए जानते हैं कि जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में क्या अंतर होता है।
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जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में क्या अंतर है?
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क्या होता है जलाभिषेक?
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क्या होता है जलाभिषेक?
जलाभिषेक का अर्थ है भगवान शिव का जल से अभिषेक करना। पूजा के दौरान शिवलिंग पर पवित्र जल अर्पित किया जाता है जिससे उन्हें शीतलता प्रदान हो और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। यह एक सरल और सामान्य विधि है जिसे श्रद्धालु घर पर भी कर सकते हैं। जलाभिषेक विशेष रूप से सावन मास में किया जाता है, जब भक्तगण शिवलिंग पर गंगाजल, दूध या सामान्य जल अर्पित करते हैं।
जलाभिषेक का अर्थ है भगवान शिव का जल से अभिषेक करना। पूजा के दौरान शिवलिंग पर पवित्र जल अर्पित किया जाता है जिससे उन्हें शीतलता प्रदान हो और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। यह एक सरल और सामान्य विधि है जिसे श्रद्धालु घर पर भी कर सकते हैं। जलाभिषेक विशेष रूप से सावन मास में किया जाता है, जब भक्तगण शिवलिंग पर गंगाजल, दूध या सामान्य जल अर्पित करते हैं।
रुद्राभिषेक क्या है?
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रुद्राभिषेक क्या है?
रुद्राभिषेक में ब्राह्मणों द्वारा वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर दूध, शहद, दही, घी और शुद्ध जल सहित पांच पवित्र द्रव्यों से अभिषेक किया जाता है। यह पूजा विधि विशेष रूप से मानसिक शांति, ग्रह दोषों की शांति, संतान सुख, रोग मुक्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए की जाती है। घर पर रुद्राभिषेक करते समय शिवलिंग को उत्तर दिशा में स्थापित करना चाहिए और पूज करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके अभिषेक करना चाहिए।
रुद्राभिषेक में ब्राह्मणों द्वारा वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर दूध, शहद, दही, घी और शुद्ध जल सहित पांच पवित्र द्रव्यों से अभिषेक किया जाता है। यह पूजा विधि विशेष रूप से मानसिक शांति, ग्रह दोषों की शांति, संतान सुख, रोग मुक्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए की जाती है। घर पर रुद्राभिषेक करते समय शिवलिंग को उत्तर दिशा में स्थापित करना चाहिए और पूज करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके अभिषेक करना चाहिए।
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किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
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किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
- तुलसी के पत्ते शिव पूजा में वर्जित माने जाते हैं, इसलिए इनका प्रयोग न करें।
- अभिषेक करते समय मन को शांत और एकाग्र रखना चाहिए, आपस में बातचीत करने से बचें।
- मंत्रों का उच्चारण शुद्ध रूप से करें, गलती से भी मंत्रों को तोड़-मरोड़कर न पढ़ें।
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किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
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- जल से रुद्राभिषेक करने के लिए तांबे के पात्र का प्रयोग सबसे शुभ माना जाता है।
- रुद्राभिषेक के दौरान रुद्राष्टाध्यायी या वैदिक मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायक माना जाता है।
- सावन मास में अगर नियम और विधि-विधान के साथ रुद्राभिषेक या जलाभिषेक किया जाए, तो भगवान शिव की कृपा जल्दी प्राप्त होती है और जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।