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कृष्ण संग करें रूक्मिणी की पूजा, होगी धन-धान्य में वृद्घि
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
Updated Fri, 04 Jan 2013 04:00 PM IST
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शास्त्रों में भगवान श्री
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कृष्ण की पत्नी रूक्मिणी की जन्म तिथि पौष कृष्ण अष्टमी बतायी गयी है। इस वर्ष यह
तिथि 5 जनवरी को है। रूक्मिणी को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है।
तन्दनानरामायण और तुलसीदास जी के रामायाण में उल्लेख आया है कि नारद के शाप के कारण
रामावतार में भगवान राम को सीता का वियोग सहना पड़ा। कृष्णावतार में राधा और कृष्ण
का वियोग हुआ।
लेकिन सदा भगवान विष्णु के साथ रहने वाली माता लक्ष्मी रूक्मिणी रूप में भगवान श्री कृष्ण के साथ रही। शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को हुआ, राधा भी अष्टमी तिथि को उत्पन्न हुई और रूक्मिणी का जन्म भी अष्टमी तिथि को हुआ है। इसलिए अष्टमी तिथि को शुभ माना गया है।
इनमें राधाष्टमी और रूक्मिणी अष्टमी को लक्ष्मी पूजन का दिन बताया गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति रूक्मिणी अष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण और देवी रूक्मिणी सहित इनके पुत्र प्रद्युम्न की पूजा करते हैं उनके घर में धन धान्य की वृद्धि होती है। परिवार में आपसी सामंजस्य बढ़ता तथा संतान सुख की प्राप्ति होती है।
रूक्मिणी जन्म के संदर्भ पद्म पुराण एक अन्य कथा का वर्णन मिलता है। इस पुराण के अनुसार देवी रूक्मिणी पूर्व जन्म एक ब्राह्मणी थी। युवावस्था में ही इन्हें विधवा होना पड़ा। इसके बाद यह भगवान विष्णु की पूजा आराधना में समय बिताने लगी। निरन्तर भगवान विष्णु की भक्ति से इन्हें अगले जन्म में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण की पत्नी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और यह लक्ष्मी तुल्य बन गयी।
लेकिन सदा भगवान विष्णु के साथ रहने वाली माता लक्ष्मी रूक्मिणी रूप में भगवान श्री कृष्ण के साथ रही। शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को हुआ, राधा भी अष्टमी तिथि को उत्पन्न हुई और रूक्मिणी का जन्म भी अष्टमी तिथि को हुआ है। इसलिए अष्टमी तिथि को शुभ माना गया है।
इनमें राधाष्टमी और रूक्मिणी अष्टमी को लक्ष्मी पूजन का दिन बताया गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति रूक्मिणी अष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण और देवी रूक्मिणी सहित इनके पुत्र प्रद्युम्न की पूजा करते हैं उनके घर में धन धान्य की वृद्धि होती है। परिवार में आपसी सामंजस्य बढ़ता तथा संतान सुख की प्राप्ति होती है।
रूक्मिणी जन्म के संदर्भ पद्म पुराण एक अन्य कथा का वर्णन मिलता है। इस पुराण के अनुसार देवी रूक्मिणी पूर्व जन्म एक ब्राह्मणी थी। युवावस्था में ही इन्हें विधवा होना पड़ा। इसके बाद यह भगवान विष्णु की पूजा आराधना में समय बिताने लगी। निरन्तर भगवान विष्णु की भक्ति से इन्हें अगले जन्म में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण की पत्नी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और यह लक्ष्मी तुल्य बन गयी।