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Rudraksha Wearing Rules: कैसे पहनें रुद्राक्ष? ज्योतिष अनुसार जानिए धारण करने की विधि और नियम

Fri, 18 Apr 2025 06:30 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 18 Apr 2025 06:30 AM IST
सार

Importance Of Rudraksha: ज्योतिषीय दृष्टिकोण से रुद्राक्ष धारण करना तभी फलदायी होता है जब उसे नियम, विधि-विधान, तथा पवित्रता के साथ धारण किया जाए। प्रत्येक मुखी रुद्राक्ष विशेष ग्रहों से संबंधित होता है, और उचित व्यक्ति को उपयुक्त दिन, शुभ मुहूर्त में उसका धारण करना चाहिए।

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Rudraksha Wearing Rules How to Wear Rudraksha According to Astrology
रुद्राक्ष को ऐसे करें धारण - फोटो : freepik.com

विस्तार

Importance Of Rudraksha: ज्योतिष शास्त्र एवं पुराणों में वर्णित है कि रुद्राक्ष का उद्भव स्वयं महादेव शिव के नेत्रों से बहते हुए अश्रुओं से हुआ। जब सती के वियोग में भगवान शिव ने विलाप किया, तब उनके आँसू धरती पर गिरे और वहीं से उत्पन्न हुआ यह दिव्य बीज, जिसे हम रुद्राक्ष के नाम से जानते हैं।

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यह केवल एक प्राकृतिक बीज नहीं, अपितु देवताओं में देव महादेव की ऊर्जा का मूर्त रूप है। रुद्राक्ष धारण करने से मनुष्य के जीवन में शांति, बल, साहस, एवं चित्त की एकाग्रता प्राप्त होती है। साथ ही यह ग्रह दोष, नकारात्मक ऊर्जा, तथा कर्मजनित क्लेशों का शमन करने में अत्यंत प्रभावी माना गया है।
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ज्योतिषीय दृष्टिकोण से रुद्राक्ष धारण करना तभी फलदायी होता है जब उसे नियम, विधि-विधान, तथा पवित्रता के साथ धारण किया जाए। प्रत्येक मुखी रुद्राक्ष विशेष ग्रहों से संबंधित होता है, और उचित व्यक्ति को उपयुक्त दिन, शुभ मुहूर्त में उसका धारण करना चाहिए। आइए जानते हैं रुद्राक्ष धारण करने की विधि, आवश्यक नियम, मंत्र और इससे प्राप्त होने वाले ज्योतिषीय लाभों के विषय में।
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Rudraksha Wearing Rules How to Wear Rudraksha According to Astrology
रुद्राक्ष को ऐसे करें धारण - फोटो : freepik

रुद्राक्ष धारण करने के शास्त्रीय नियम और विधि
रुद्राक्ष धारण करना केवल एक आध्यात्मिक परंपरा नहीं, अपितु यह एक शक्तिशाली ज्योतिषीय उपाय है, जो मानव जीवन से ग्रहदोष, मानसिक तनाव, और आत्मिक अशांति को दूर करने में समर्थ होता है। परंतु, इसके धारण से पूर्व कुछ विशेष नियमों का पालन आवश्यक है, जिससे इसके पूर्ण और शुभ प्रभाव की प्राप्ति हो सके।

  • रुद्राक्ष धारण करने से पहले “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ ह्रीं नमः” मूल मंत्र का कम से कम 9 बार जाप करें। यह जाप रुद्राक्ष में शिव ऊर्जा को जाग्रत करता है और इसे सजीव बनाता है।
  • रुद्राक्ष को बिना स्नान किए नहीं छूना चाहिए। स्नान के उपरांत ही इसे धारण करें। शुद्धता रुद्राक्ष के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है।
  • रुद्राक्ष को लाल या पीले रंग के शुभ धागे में पहनना उत्तम माना गया है। काले धागे का प्रयोग वर्जित है क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है।
  • रुद्राक्ष धारण करने वाले जातक को मांसाहार, मदिरा, और तामसिक आहार से दूर रहना चाहिए। यह संयम रुद्राक्ष की ऊर्जा को स्थिर रखता है।
  • रुद्राक्ष को श्मशान घाट या नवजात शिशु के जन्म स्थान पर ले जाना वर्जित है। इन स्थानों की ऊर्जा रुद्राक्ष की पवित्रता को प्रभावित कर सकती है।
  • एक बार जो रुद्राक्ष किसी ने धारण कर लिया है, उसे किसी अन्य को नहीं देना चाहिए। यह व्यक्तिगत आध्यात्मिक साधन है और इसकी ऊर्जा विशेष होती है।
  • रुद्राक्ष की माला को समय-समय पर साफ करें। यदि धागा गंदा या क्षतिग्रस्त हो जाए, तो उसे गंगाजल से धोकर नया धागा लगाएं।

Rudraksha Wearing Rules How to Wear Rudraksha According to Astrology
रुद्राक्ष को ऐसे करें धारण - फोटो : freepik

रुद्राक्ष धारण की विशेष विधि

  • सोमवार, महाशिवरात्रि, या श्रावण मास के किसी शुभ दिन को रुद्राक्ष धारण करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
  • धारण करने से पूर्व चांदी या तांबे की कटोरी लें।
  • उसमें दूध, दही, शहद, घी, और शक्कर मिलाएं।
  • उस मिश्रण से रुद्राक्ष का अभिषेक करें।
  • इसके बाद गंगाजल से शुद्ध स्नान कराएं।
  • लाल वस्त्र पर रुद्राक्ष को स्थापित करें।
  • एक गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • इसके बाद 108 बार ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें । 
  • अंत में रुद्राक्ष धारण करें। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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