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Rishi Panchami 2020: ऋषि पंचमी आज, जानिए पूजा विधि, सप्तऋषियों के नाम और तारा मंडल
Sun, 23 Aug 2020 10:54 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 23 Aug 2020 10:54 AM IST
सार
- हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर ऋषि पंचमी मनाई जाती है। भारत में प्राचीन समय से ही ऋषियों और मुनियों को पूजनीय माना जाता है।
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ऋषि पंचमी
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विस्तार
Rishi Panchami 2020 Vrat Katha Puja Vidhi: आज यानी 23 अगस्त को ऋषि पंचमी का व्रत है। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर ऋषि पंचमी मनाई जाती है। भारत में प्राचीन समय से ही ऋषियों और मुनियों को पूजनीय माना जाता है। इस धरती पर ज्ञान, धर्म, विज्ञान, ज्योतिष, वास्तु समाज आदि का प्रचार-प्रसार सप्तऋषियों के द्वारा ही किया गया। धरती पर सप्तऋषियों का योगदान स्मरणीय है। इस दिन महिलाएं व्रत करती हैं लेकिन इस दिन किसी देवी-देवता की नहीं बल्कि सप्तऋषियों का पूजन किया जाता है। आइए जानते हैं सप्तऋषियों के नाम और तारामंडल के बारे में...
पुराणों में सप्तऋषियो के नाम पर अलग-अलग नामावली मिलती हैं। वेदों के अध्ययन के हिसाब से सात ऋषियों के नाम इस प्रकार से बताए गए हैं।
ये हैं सप्तऋषियों के नाम
1.वशिष्ठ
2.विश्वामित्र
3.कण्व,
4.भारद्वाज,
5.अत्रि,
6.वामदेव
7.शौनक
किसे कहते हैं सप्तऋषि तारा मंडल
रात्रि के समय आकाश में 7 तारों का एक मंडल दिखाई देता है जिसें सप्तर्षि तारा मंडल कहा जाता है। इन तारों के नाम इन्हीं ऋषियों के नाम पर रख गए हैं। ये तारे ध्रुव तारें की परिक्रमा करते है जो 24 घंटो में पूरी होती है। इस तरह से दो तारें सदैव ध्रुव तारे की सीधी रेखा में रहते हैं और उड़ती हुई पतंग की तरह आकृति बनती हुई प्रतीत होती है। जब प्राचीन समय में कोई यंत्र नहीं था, तो गति और दिशा का पता ध्रुव तारें के द्वारा ही लगाया जाता था। वेदों में भी इसका उल्लेख मिलता है।
क्यों किया जाता है सप्तऋषि व्रत, क्या है इसका महत्व
यह व्रत स्त्रियों और कुवांरी लड़कियों के द्वारा रखा जाता है। यह व्रत सुख सौभाग्य को लिए नहीं, बल्कि जाने-अनजाने हो जाने वाली भूल की क्षमा के लिए रखा जाता है। ये व्रत किसी भी आयु की महिलाएं रख सकती हैं। इस व्रत को खासकर माहवारी के दौरान हुई धार्मिक गलतियों और उसके कारण लगने वाले दोष की क्षमा के लिए रखा जाता है। इसकी कथा भी इसी से जुड़ी हुई है। इस दिन सप्तऋषियों के पूजन के कारण इसे ऋषि पंचमी के नाम से जाना जाता है।
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ऋषि पंचमी पूजा विधि
- सबसे पहले पंचमी तिथि पर सुबह जल्दी उठे और स्नान कर लें फिर पीला कपड़ा पहन लें
- गंगाजल से घर पर बने मंदिर को शुद्ध करें
- इसके बाद पूजा स्थल पर सप्त ऋषियों की फोटो या विग्रह लगाएं
- सप्तऋषि को दीपक जलाकर उनकी आरती उतारें और भोग में उन्हें पीले फल-फूल और मिठाई अर्पित करें
- इसके बाद मन में सप्त ऋषियों से अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगे।
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पुराणों में सप्तऋषियो के नाम पर अलग-अलग नामावली मिलती हैं। वेदों के अध्ययन के हिसाब से सात ऋषियों के नाम इस प्रकार से बताए गए हैं।
ये हैं सप्तऋषियों के नाम
1.वशिष्ठ
2.विश्वामित्र
3.कण्व,
4.भारद्वाज,
5.अत्रि,
6.वामदेव
7.शौनक
किसे कहते हैं सप्तऋषि तारा मंडल
रात्रि के समय आकाश में 7 तारों का एक मंडल दिखाई देता है जिसें सप्तर्षि तारा मंडल कहा जाता है। इन तारों के नाम इन्हीं ऋषियों के नाम पर रख गए हैं। ये तारे ध्रुव तारें की परिक्रमा करते है जो 24 घंटो में पूरी होती है। इस तरह से दो तारें सदैव ध्रुव तारे की सीधी रेखा में रहते हैं और उड़ती हुई पतंग की तरह आकृति बनती हुई प्रतीत होती है। जब प्राचीन समय में कोई यंत्र नहीं था, तो गति और दिशा का पता ध्रुव तारें के द्वारा ही लगाया जाता था। वेदों में भी इसका उल्लेख मिलता है।
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क्यों किया जाता है सप्तऋषि व्रत, क्या है इसका महत्व
यह व्रत स्त्रियों और कुवांरी लड़कियों के द्वारा रखा जाता है। यह व्रत सुख सौभाग्य को लिए नहीं, बल्कि जाने-अनजाने हो जाने वाली भूल की क्षमा के लिए रखा जाता है। ये व्रत किसी भी आयु की महिलाएं रख सकती हैं। इस व्रत को खासकर माहवारी के दौरान हुई धार्मिक गलतियों और उसके कारण लगने वाले दोष की क्षमा के लिए रखा जाता है। इसकी कथा भी इसी से जुड़ी हुई है। इस दिन सप्तऋषियों के पूजन के कारण इसे ऋषि पंचमी के नाम से जाना जाता है।
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ऋषि पंचमी पूजा विधि
- सबसे पहले पंचमी तिथि पर सुबह जल्दी उठे और स्नान कर लें फिर पीला कपड़ा पहन लें
- गंगाजल से घर पर बने मंदिर को शुद्ध करें
- इसके बाद पूजा स्थल पर सप्त ऋषियों की फोटो या विग्रह लगाएं
- सप्तऋषि को दीपक जलाकर उनकी आरती उतारें और भोग में उन्हें पीले फल-फूल और मिठाई अर्पित करें
- इसके बाद मन में सप्त ऋषियों से अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगे।