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यहां राम नहीं कृष्ण के लिए बंदरों ने बनाया सेतु

Wed, 27 Nov 2013 04:45 PM IST
Updated Wed, 27 Nov 2013 04:45 PM IST
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ramsetu krishna kamyavan setband sarovar
भगवान राम जब लंका पर चढ़ाई करने जा रहे थे तब बंदरों ने समुद्र पर विशाल पुल का निर्माण किया था, इस बात को तो आप भी जानते होंगे। लेकिन राम का जब कृष्ण रूप में अवतार हुआ तब बंदरों ने फिर से कृष्ण के कहने पर एक सेतु का निर्माण किया था, इस बात का शायद ही आप जानते होंगे।
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यह सेतु मथुरा से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर काम्यवन में एक सरोवर पर बनाया गया था। इस कारण से यह  सेतुबंध सरोवर के नाम से जाता है। वर्तमान अब इस सेतु के ध्वांसावशेष ही मौजूद हैं जो इस तथ्य की पुष्टि करते हैं।
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rameshwar kamanइस सरोवर के उत्तर में एक शिव मंदिर है। रामेश्वर मंदिर कहलता है। सरोवर के दक्षिण में एक टीले पर लंका भी बना हुआ। जिससे इस स्थान पर आकर एक साथ राम और कृष्ण अवतार दोनों की झलक एक साथ मिल जाती है।
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इस सेतबंध सरोवर की कथा बड़ी ही रोचक है। एक बार श्री कृष्ण राधा और सखियों के साथ यहां बैठे थे तभी सखियों ने राम की वीरगाथा का बखान करना शुरू कर दिया। कृष्ण ने सखियों से कहा पूर्व जन्म में मैं ही राम था।

सखियों ने इसे कृष्ण का बड़बोलापन समझकर कहा अगर ऐसा है तो बंदरों से सरोवर पर एक सेतु बनवाकर दिखाओ। कृष्ण ने मुराली की तान छेड़ी वन में मौजूद सभी बंदर कृष्ण के पास आकर खड़े हो गए। श्री कृष्ण ने कहा कि मेरे लिए सरोवर पर एक सेतु का निर्माण कर दो।


कृष्ण की आज्ञा मिलते ही सभी बानर सेतु बनाने में जुट गए। रामावतार में जिस तरह राम ने रामेश्वर शिव की पूजा की थी उसी प्रकार कृष्ण ने शिव की पूजा की और जिससे यहां भी रामेश्वर मंदिर बन गया।

बनारों ने मेहनत और लगन से देखते ही देखते सरोवर पर सेतु का निर्माण कर दिया। सेतुबंध सरोवर को स्थानीय लोग लंका कुंड भी कहते हैं।
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