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रामलीला:आखिर राम कैसे सफल हुए धनुष तोड़ने में

Sun, 06 Oct 2013 09:16 AM IST
टीम डिजीटल
टीम डिजीटल Updated Sun, 06 Oct 2013 09:16 AM IST
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ramleela ram sita vivaah

रामलीला में राम जन्म के बाद जो सबसे महत्वपूर्ण घटना है वह है राम की शिक्षा और राजा जनक के दरबार में भगवान शिव के धनुष को तोड़कर सीता से विवाह करना। सीता से विवाह करने की इच्छा से एक से एक बलवान और पराक्रमी राजे महारजे जनक के दरबार में आए थे। इनमें रावण भी मौजूद था। सभी ने ऎड़ी चोटी का जोर लगाया लेकिन कोई भी शिव के धनुष को उठाने में सफल नहीं हुआ।

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अंत में ऋषि विश्वामित्र की आज्ञा से स्वयंवर देखने आए श्रीराम ने धनुष को खिलौने की तरह उठा लिया और सहज भाव से तोड़ दिया। यह तो मूल घटना है लेकिन सवाल उठता है कि राम आखिर धनुष तोड़ने में कैसे सफल हुआ। इसका उत्तर जानने के लिए सीता के बचपन की एक घटना को जानना होगा। एक बार सीता पूजा घर की साफ-सफाई कर रही थी।
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जहां शिव का धनुष रखा था वहां काफी गंदगी हो गई थी सीता ने इसे साफ करने के लिए एक हाथ से धनुष उठा लिया और दूसरा से सफाई करने लगी। अचानक राजा जनक पूजा घर में आ गए और सीता को शिव का धनुष उठाए देखकर हैरान रह गए। राजा जनक ने पूछा तुमने इस भारी धनुष को कैसे उठा लिया। सीता ने सहज भाव से उत्तर दिया, यह धनुष तो बहुत ही हल्का है, मैंने तो इसे एक हाथ से उठा लिया।
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इसी समय राजा जनक ने कहा कि जो कोई इस धनुष को भंग कर देगा वही सीता का पति होगा। सीता से विवाह के इच्छुक बलशाली व्यक्ति बल के अहंकार में डूबे थे। वह धनुष उठाते समय शरीर का पूरा बल धनुष पर लगा देते थे जिससे धनुष उठने की बजाय और बैठ जाता था। यह उसी प्रकार होता था जैसे किसी डब्बे के उपर लगा हुआ ढ़क्कन खोलते समय आप जोर लगाएं तो वह और बैठ जाता है लेकिन आराम से खोलें तो तुरंत खुल जाता है।


राम ने इस चीज को गौर से देखा कि सभी धनुष के साथ बल प्रयोग कर रहे हैं इसलिए धनुष उठ नहीं रहा है। इसलिए जब राम धनुष उठाने गए तो जिस प्रकार सीता सहज भाव से बिना बल लगाए धनुष उठा लेती थी उसी प्रकार राम ने भी धनुष को उठाने का प्रयास किया और सफल हुए। सीता राम की हो गई। राम ने यहां संसार को ज्ञान दिया कि बल की बजाय हमेशा बुद्धि से काम लेना चाहिए।

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