फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   ramleela ram hanuman friendship

रामलीलाः क्या वानर और हनुमान जी मनुष्य थे?

Tue, 08 Oct 2013 12:53 PM IST
टीम डिजिटल
टीम डिजिटल Updated Tue, 08 Oct 2013 12:53 PM IST
विज्ञापन
ramleela ram hanuman friendship

पिछले अंक में सीता हरण और राम लक्ष्मण का व्याकुल होकर सीता को ढूंढना आपने पढ़ा। आज के अंक में प्रस्तुत है राम जी का किष्किंधा पहुंचना और वानरों से दोस्ती का प्रसंग। चित्रकूट में सीता के नहीं मिलने पर राम और लक्ष्मण सीता को ढूंढते हुए मलय पर्वत को पार कर गए।

विज्ञापन


मलय पर्वत को उत्तर भारत और दक्षिण भारत की सीमा माना जाता है। पर्वत को पार करने के बाद राम और लक्ष्मण जब आगे बढ़े तब सुग्रीव के गुप्तचरों ने धनुष वाण लिए दो वीरों को देखा तो भयभीत हो गए उन्हें लगा कि सुग्रीव को मारने के लिए वानरों के राजा बाली ने इन्हें भेजा है।
विज्ञापन


गुप्तचरों ने भागकर सुग्रीव से कहा कि दो वीर युवक वन में धनुष वाण लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। सुग्रीव ने हनुमान जी से कहा कि पता करो वह युवक कौन हैं और क्या चाहते हैं। हनुमान जी ब्राह्मण का वेष बनाकर राम जी के पास पहुंच गए। हनुमान जी को जैसे ही पता चला कि दोनों युवक राम और लक्ष्मण हैं वह अपने वास्तविक रूप में आ गए। हनुमान जी ने दास भाव से राम जी के चरण पकड़ लिए। राम जी ने हनुमान को उठाकर गले से लगा लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


रामायण में हनुमान जी को वानर रूप में बताया गया है। लेकिन वानर पेड़ की डाली पर रहते हैं घर बनाकर नहीं रहते। इनका न कोई राज्य होता है और न इनकी राजधानी होती है। जबकि हनुमान जी और सुग्रीव का अपना राज्य था और इनकी प्रजा थी। संभवतः हनुमान और सुग्रीव इसलिए वानर कहे गए हैं क्योंकि यह अनार्य थे और राम आर्य थे।

अनार्य मलय पर्वत के पार रहते थे जिसे आज दक्षिण भारत कहा जाता हैं। आर्यों का मानना था कि अनार्य का रहन-सहन वानरों की तरह है उनमें अब सभ्यता का विकास नहीं हुआ है। वनों में प्राप्त कंद मूल और शिकार ही इनके जीवन का आधार था। इसलिए आर्य अनार्य में भेद-भाव था। राम ने सीता की तलाश करने के लिए अनार्य हनुमान की सहायता से वानरों के राजा सुग्रीव से मित्रता की।


रामायण में राम जी की सहायता करने वाले नरों को संभवतः इसलिए वानर कहा गया है क्योंकि वह वन में रहते थे। वानर का एक अर्थ वन में रहने वाले नर भी होता है।

आर्यों द्वारा मित्रता का समान अधिकार प्राप्त होने के कारण वानरों में राम के प्रति अगाध श्रद्घा और समर्पण का भाव आ गया था। समर्पण और निष्ठा के कारण कथित रूप से वानर कहे जाने वाले पिछड़े आर्यों में ने रावण की विशाल सेना को पराजित करने में भगवान राम की भरपूर सहयता की।

कल पढ़िए राम सेतु की दिलचस्प कहानी

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed