Ram Janam Bhumi Pujan: राम मंदिर निर्माण में 'चक्रसुदर्शन मुहूर्त' ही श्रेष्ठ और विवादहीन

पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य Updated Wed, 05 Aug 2020 08:16 AM IST
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सार

रामचरित मानस में भी कहा गया है कि नवमी तिथि मधुमास पुनीता। सुकल पक्ष अभिजीत हरिप्रीता।। मध्यदिवस अतिशीत न घामा पावन काल लोक विश्रामा।। इस पंक्ति से स्पष्ट हो जाता है कि राम का जन्म दोपहर 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट के मध्य हुआ।

विस्तार

योग, लगन, ग्रह, वार, तिथि सकल भये अनुकूल। शुभ अरु अशुभ हर्षजुत राम जनम सुखमूल।

ब्रह्म के साकार रूप की सेवा में तत्पर तिथि, वार ग्रह, नक्षत्र और योग मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जीवन और इनके द्वारा कही गई बातें मानव समाज के लिए न केवल आदर्श स्थापित करती हैं, अपितु विषम परिस्थितियों में भी विचलित न होने की प्रेरणा भी देती हैं। ग्रह नक्षत्रों की अनुकूलता होते हुए भी उन्होंने सामाजिक सन्देश के लिए अपने जीवन को लौकिक दृष्टि से कष्टकारक बनाया। हम सभी को भी श्रीराम के आदर्शों पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। श्रीराम का जन्म हुए लाखों वर्ष व्यतीत हो चुके हैं किन्तु आज भी जब हम उनका नाम लेते हैं तो, लगता है प्रभु धनुष बाण लिए पास ही खड़े हैं। 

इनके नाम स्मरण मात्र से ही शरीर में स्पंदन होने लगता है राम परंब्रह्म का साकार रूप हैं। जगत नियंता हैं। सर्व शक्तिमान हैं । इन्ही के विराट स्वरूप में अखिल ब्रह्मांड समाया हुआ है। ब्रह्मलोक इनका शीश, पाताल इनके चरण, सूर्य-चन्द्र इनके नेत्र, मेघ मंडल इनके काले केश, भयंकर काल इन्ही की भृकुटी संचालन से गतिमान होता है। वेद इनकी वाणी, शिव इनके अहंकार और ब्रह्मा इनकी बुद्धि हैं। श्रृष्टि की उत्त्पत्ति, पालन, और प्रलय इन्ही परंब्रह्म परमेश्वर की चेष्ठा है।
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यही परमेश्वर जब अधर्मियों का नाश करने और धर्म की स्थापना के लिए मानव शरीर धारण कर पृथ्वी पर आते हैं तो उनकी सेवा हेतु देवता, नाग, गन्धर्व, योगी आदि भी अलग अलग रूपों में पृथ्वी पर जन्म लेते हैं। यहां तक कि ग्रह, नक्षत्र, तिथि, वार, लग्न और सभी योग अनुकूल हो जाते हैं। किन्तु मानव कल्याण हेतु नारायण इन योगों से अलग अपनी ही लीला करते हैं क्योंकि, वे इन ग्रहों और उनके प्रभावों से परे हैं। आसुरी शक्तियों के बढ़ने और देवताओं की प्रार्थना पर जब परमेश्वर ने राम के रूप मानव शरीर धारण कर पृथ्वी पर जन्म लेने का संकल्प लिया तो योग, लगन, ग्रह, वार, तिथि सकल भये अनुकूल। शुभ अरु अशुभ हर्षजुत राम जनम सुखमूल। सभी ग्रह, योग, लग्न, नक्षत्र आदि अपने-अपने शुभ स्थान पर चले गये थे।
चक्रसुदर्शन मुहूर्त (अभिजित) ही श्रेष्ठ

'चक्रसुदर्शन मुहूर्त' में नारायण ने पृथ्वी पर जन्म लिया। रामचरित मानस में भी कहा गया है कि नवमी तिथि मधुमास पुनीता। सुकल पक्ष अभिजीत हरिप्रीता।। मध्यदिवस अतिशीत न घामा पावन काल लोक विश्रामा।। इस पंक्ति से स्पष्ट हो जाता है कि राम का जन्म दोपहर 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट के मध्य हुआ। आदिकाल में विश्वकर्मा ने इसी मुहूर्त में सूर्य के अतिशय तेज से शिव का त्रिशूल, वज्र, और चक्र सुदर्शन का निर्माण किया था। यह मुहूर्त आज भी सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसके मध्य किया गया कोई भी कार्य कभी असफल नहीं होता। अतः राम मंदिर निर्माण के लिए 05 अगस्त को दोपहर का चक्रसुदर्शन मुहूर्त (अभिजित) ही श्रेष्ठ रहेगा।
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