Paush Purnima 2020: पौष पूर्णिमा आज, जानिए व्रत विधि, शुभ मुहूर्त और पूर्णिमा तिथि का महत्व
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पौष पूर्णिमा 10 जनवरी को है। इस दिन पूर्णिमा व्रत, गंगा स्नान एवं दान-पुण्य किया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार पौष माह में शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पौष पूर्णिमा तिथि कहा जाता है। इस बार इसी तिथि को चंद्र मिथुन राशि में लग रहा है। हालांकि चंद्रमा का सूतक काल प्रभावी नहीं होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पौष पूर्णिमा के दिन व्रत, पवित्र नदी में स्नान, दान, जप और व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और मोक्ष मिलता है।
पौष पूर्णिमा 2020 व्रत मुहूर्त Paush Paush Purnima 2020 muhurat time and date)
10 जनवरी रात 2.30 बजे से पौष पूर्णिमा तिथि प्रारंभ
11 जनवरी की रात 12.10 बजे को पूर्णिमा तिथि समाप्त
पौष पूर्णिमा 2020 व्रत विधि
पौष पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान से पहले व्रत का संकल्प लें।
पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें और स्नान से पूर्व वरुण देव को प्रणाम करें।
स्नान के पश्चात सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए।
स्नान से निवृत्त होकर भगवान मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए और उन्हें नैवेद्य अर्पित करना चाहिए।
दान-दक्षिणा दें।
पूर्णिमा के दिन इन वस्तुओं का करें दान
दान में तिल, गुड़, कंबल और ऊनी वस्त्र विशेष रूप से देने चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि दान केवल जरुरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए।
पौष पूर्णिमा तिथि का महत्व
पौष पूर्णिमा, पूर्णिमा तिथि की अंतिम तिथि है। इस दिन चंद्रमा अपने संपूर्ण रूप में होता है जिसका प्रभाव व्यक्ति के मन मस्तिष्क में पड़ता है। ज्योतिष में चंद्रमा का मन एवं द्रव्य पदार्थों का कारक माना जाता है। जब भी पूर्णिमा की तिथि आती है उस दिन समुद्र में ज्वार-भाटा आता है। पूर्णिमा के दिन जल की गति और गुण बदल जाने के कारण इसका प्रभाव मनुष्यों के शरीर पर भी पड़ता है क्योंकि मनुष्यों के शरीर में लगभग 80 फीसदी पानी होता है।
पौष पूर्णिमा का सांस्कृतिक महत्व
पौष पूर्णिमा के बाद से माघ माह प्रारंभ हो जाता है, इसलिए पूर्णिमा के दिन से ही प्रयाग राज में संगम तट पर माघ मेला शुरु हो जाता है, जिसमें देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु संगम तट पर डुबकी लगाते हैं। संगम नगरी में यह मेला शिवरात्रि तक चलता है।