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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Paush Pradosh Vrat 2025 Benefits January Date and Time Parvati Chalisa

Pradosh Vrat 2025: साल के पहले प्रदोष पर करें इस चालीसा का पाठ, भोलेनाथ का मिलेगा आशीर्वाद

Sun, 05 Jan 2025 07:21 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sun, 05 Jan 2025 07:21 AM IST
सार

Parvati Chalisa In Hindi: हिंदू कैलेंडर के अनुसार शनि प्रदोष व्रत 11 जनवरी, शनिवार को मनाया जाएगा। उनका कहना है कि अगर आप इस दिन सच्ची भावना से भोलेनाथ की पूजा करेंगे तो आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

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Paush Pradosh Vrat 2025 Benefits January Date and Time Parvati Chalisa
Paush Pradosh Vrat - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Pradosh Vrat 2025: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन लोग भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार शनि प्रदोष व्रत 11 जनवरी, शनिवार को मनाया जाएगा। उनका कहना है कि अगर आप इस दिन सच्ची भावना से भोलेनाथ की पूजा करेंगे तो आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी। जीवन के कष्टों का भी अंत हो जाता है।  चूंकि यह दिन भोलेनाथ को समर्पित हैं। कहा जाता है कि आस्थावानों को इस दिन सच्ची पूजा के साथ व्रत रखना चाहिए। ऐसे में सुबह उठकर पवित्र स्नान करें। भोले बाबा को भांग, धतूरा, वेप, वेल पत्र आदि चढ़ाएं। इनके साथ ही माता पार्वती की विधिवत पूजा करें और पार्वती चालीसा का पाठ करें। 

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Paush Pradosh Vrat 2025 Benefits January Date and Time Parvati Chalisa
Paush Pradosh Vrat - फोटो : freepik

पूजा के नियम 

  • प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करें और वहां भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
  • पूजा में चंदन, लाल गुलाल, कपूर, बेल पत्र, धतूरा, गंगाजल, फल, धूप पूजन सामग्री को शामिल करें।
  • प्रदोष व्रत के दिन शाम के समय पूजा करें, क्योंकि यह समय शुभ माना जाता है।
  • इस दिन गरीबों को खाना खिलाएं और उन्हें जरूरत की चीजें दान करें।
  • सात्विक भोजन ग्रहण करें और तामसिक भोजन से परहेज करें।
  • इस दिन किसी व्यक्ति के बारे में बुरा बोलने से बचें।
  • कहते हैं कि ये तिथि शिव पूजा के लिए बहुत शुभ है इसलिए विधिवत शिव पूजन करें।

Paush Pradosh Vrat 2025 Benefits January Date and Time Parvati Chalisa
Paush Pradosh Vrat - फोटो : Instagram

पार्वती चालीसा 

।। दोहा ।।
जय गिरी तनये दक्षजे शम्भू प्रिये गुणखानि, गणपति जननी पार्वती, अम्बे, शक्ति, भवानी ।

।। चौपाई ।।
ब्रह्मा भेद न तुम्हरे पावे, पंच बदन नित तुमको ध्यावे ।
षड्मुख कहि न सकत यश तेरो, सहसबदन श्रम करत घनेरो ।
तेरो पार न पावत माता, स्थित रक्षा लय हित सजाता ।
अधर प्रवाल सदृश अरुणारे, अति कमनीय नयन कजरारे ।

ललित लालट विलेपित केशर, कुंकुंम अक्षत शोभा मनोहर ।
कनक बसन कञ्चुकि सजाये, कटी मेखला दिव्य लहराए ।
कंठ मदार हार की शोभा, जाहि देखि सहजहि मन लोभ ।
बालारुण अनंत छवि धारी, आभूषण की शोभा प्यारी ।

नाना रत्न जड़ित सिंहासन, तापर राजित हरी चतुरानन ।
इन्द्रादिक परिवार पूजित, जग मृग नाग यक्ष रव कूजित ।
गिर कैलाश निवासिनी जय जय, कोटिकप्रभा विकासिनी जय जय ।
त्रिभुवन सकल, कुटुंब तिहारी, अणु अणु महं तुम्हारी उजियारी ।

हैं महेश प्राणेश, तुम्हारे, त्रिभुवन के जो नित रखवारे ।
उनसो पति तुम प्राप्त कीन्ह जब, सुकृत पुरातन उदित भए तब ।
बुढा बैल सवारी जिनकी, महिमा का गावे कोउ तिनकी ।
सदा श्मशान विहरी शंकर, आभूषण हैं भुजंग भयंकर ।

कंठ हलाहल को छवि छायी, नीलकंठ की पदवी पायी ।
देव मगन के हित अस किन्हों, विष लै आपु तिनहि अमि दिन्हो ।
ताकी, तुम पत्नी छवि धारिणी, दुरित विदारिणी मंगल कारिणी ।
देखि परम सौंदर्य तिहारो, त्रिभुवन चकित बनावन हारो ।

भय भीता सो माता गंगा, लज्जा मय है सलिल तरंगा ।
सौत सामान शम्भू पहआयी, विष्णु पदाब्ज छोड़ि सो धायी ।
तेहि कों कमल बदन मुर्झायो, लखी सत्वर शिव शीश चढायो ।
नित्यानंद करी वरदायिनी, अभय भक्त कर नित अनपायिनी ।

अखिल पाप त्रय्ताप निकन्दनी , माहेश्वरी ,हिमालय नन्दिनी ।
काशी पूरी सदा मन भायी, सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायीं ।
भगवती प्रतिदिन भिक्षा दात्री, कृपा प्रमोद सनेह विधात्री ।
रिपुक्षय कारिणी जय जय अम्बे, वाचा सिद्ध करी अवलम्बे ।

गौरी उमा शंकरी काली, अन्नपूर्णा जग प्रतिपाली ।
सब जन की ईश्वरी भगवती, पतप्राणा परमेश्वरी सती ।
तुमने कठिन तपस्या किणी, नारद सो जब शिक्षा लीनी ।
अन्न न नीर न वायु अहारा, अस्थि मात्रतन भयउ तुम्हारा ।

पत्र घास को खाद्या न भायउ, उमा नाम तब तुमने पायउ ।
तप बिलोकी ऋषि सात पधारे, लगे डिगावन डिगी न हारे ।
तव तव जय जय जयउच्चारेउ, सप्तऋषि, निज गेह सिद्धारेउ ।
सुर विधि विष्णु पास तब आए, वर देने के वचन सुनाए ।

मांगे उमा वर पति तुम तिनसो, चाहत जग त्रिभुवन निधि, जिनसों ।
एवमस्तु कही ते दोऊ गए, सुफल मनोरथ तुमने लए ।
करि विवाह शिव सों हे भामा, पुनः कहाई हर की बामा ।
जो पढ़िहै जन यह चालीसा, धन जनसुख देइहै तेहि ईसा ।

।। दोहा ।।
कूट चन्द्रिका सुभग शिर जयति सुख खानी, पार्वती निज भक्त हित रहहु सदा वरदानी ।



 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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