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25 मार्च से चैत्र नवरात्रि और हिंदू विक्रम संवत् 2077 आरंभ, अधिमास के कारण 58 दिन का आश्विन माह
Tue, 24 Mar 2020 12:29 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 24 Mar 2020 12:29 PM IST
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कोरोना वारयरस के संकट के बीच 25 मार्च, बुधवार से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। नवरात्रि के पहले दिन देवी दुर्गा के 9 स्वरूपों में पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-आराधना की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना, पूजा और अखंड ज्योति के साथ चैत्र नवरात्रि का विधिवत शुभारंभ होगा।
नवरात्रि के शुरू होने के साथ ही नया हिंदू विक्रम संवत् 2077 आरंभ हो जाएगा। चैत्र का महीना हिंदू कैलेंडर का पहला महीना होता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार नए संवत्सर में 2 आश्विन महीने होंगे। गणना के अनुसार आश्विन का महीना 3 सितंबर से 31 अक्टूबर तक रहेगा। जिसमें एक माह का समय अधिमास रहेगा। अधिमास होने से इस बार के त्योहारों में कई बदलाव देखने को मिलेंगे। आइए जानते हैं इसके बारे में...
क्या होता है अधिमास
भारतीय ज्योतिष चंद्र मास की गणना के आधार पर चलता है। सौर मास 365 दिन का और चंद्र मास 354 दिन का होता है। इस लिहाज से देखा जाए तो दोनों में 11 दिन का अंतर आता है।अधिमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है। पंचांग के हिसाब से तीन वर्षों तक तिथियों का क्षय होता है। वह माह तीसरे वर्ष में अधिक मास के रूप में शामिल होता है।
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आश्विन माह 58 दिनों तक
इस बार आश्विन माह 58 दिनों तक चलेगा। जो 3 सितंबर से 31 अक्टूबर तक रहेगा। 3 से 17 सितंबर तक शुद्ध आश्विन माह रहेगा। इसके बाद यानि 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक अधिमास का कृष्ण और शुक्लपक्ष का समय रहेगा। 17 अक्टूबर से 31 अक्टूबर माह तक आश्विन माह के बाकी बचे दिन शुरू हो जाएंगें। इस कारण से शारदीय नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों की तिथियों में अंतर देखने को मिलेगा।
नव संवत्सर विक्रम संवत 2077
25 मार्च से 'प्रमादी' नामक संवत्सर का शुभारंभ होने वाला है जिसके राजा बुध और मंत्री चंद्र हैं। जिसके फलस्वरूप देश की अर्थव्यवस्था एवं प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना सरकार के लिए कठिन तो रहेगा, किंतु भारत सरकार इसमें पूर्ण तरह सफल रहेगी। नववर्ष का आरंभ बुधवार के दिन रेवती नक्षत्र, और मीन राशिगत चंद्रमा के गोचर के समय में हो रहा है।
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नवरात्रि के शुरू होने के साथ ही नया हिंदू विक्रम संवत् 2077 आरंभ हो जाएगा। चैत्र का महीना हिंदू कैलेंडर का पहला महीना होता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार नए संवत्सर में 2 आश्विन महीने होंगे। गणना के अनुसार आश्विन का महीना 3 सितंबर से 31 अक्टूबर तक रहेगा। जिसमें एक माह का समय अधिमास रहेगा। अधिमास होने से इस बार के त्योहारों में कई बदलाव देखने को मिलेंगे। आइए जानते हैं इसके बारे में...
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क्या होता है अधिमास
भारतीय ज्योतिष चंद्र मास की गणना के आधार पर चलता है। सौर मास 365 दिन का और चंद्र मास 354 दिन का होता है। इस लिहाज से देखा जाए तो दोनों में 11 दिन का अंतर आता है।अधिमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है। पंचांग के हिसाब से तीन वर्षों तक तिथियों का क्षय होता है। वह माह तीसरे वर्ष में अधिक मास के रूप में शामिल होता है।
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आश्विन माह 58 दिनों तक
इस बार आश्विन माह 58 दिनों तक चलेगा। जो 3 सितंबर से 31 अक्टूबर तक रहेगा। 3 से 17 सितंबर तक शुद्ध आश्विन माह रहेगा। इसके बाद यानि 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक अधिमास का कृष्ण और शुक्लपक्ष का समय रहेगा। 17 अक्टूबर से 31 अक्टूबर माह तक आश्विन माह के बाकी बचे दिन शुरू हो जाएंगें। इस कारण से शारदीय नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों की तिथियों में अंतर देखने को मिलेगा।
नव संवत्सर विक्रम संवत 2077
25 मार्च से 'प्रमादी' नामक संवत्सर का शुभारंभ होने वाला है जिसके राजा बुध और मंत्री चंद्र हैं। जिसके फलस्वरूप देश की अर्थव्यवस्था एवं प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना सरकार के लिए कठिन तो रहेगा, किंतु भारत सरकार इसमें पूर्ण तरह सफल रहेगी। नववर्ष का आरंभ बुधवार के दिन रेवती नक्षत्र, और मीन राशिगत चंद्रमा के गोचर के समय में हो रहा है।